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Sonipat News: रजनीश ध्यान मंदिर में धूमधाम से मनाया ओशो जन्मोत्सव
Sat, 13 Dec 2025 02:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 13 Dec 2025 02:32 AM IST
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फोटो :40: सोनीपत के गांव दीपालपुर स्थित ध्यान केंद्र में स्वामी शैलेंद्र सरस्वती व मां अमृत प्र
सोनीपत। गांव दीपालपुर स्थित रजनीश ध्यान मंदिर में ओशो जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए करीब 1300 साधकों ने भाग लिया। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती के मार्गदर्शन और मां अमृत प्रिया के भक्तिमय संगीत ने उत्सव का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम में स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने साधकों को भीतर की यात्रा अपनाने और जीवन को उत्सव की तरह जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ध्यान कोई विश्वास नहीं, यह एक विज्ञान है। जब भीतर शांति का प्रसाद उतरता है तभी जीवन उत्सव में बदलता है। ओशो व्यक्ति नहीं, एक चेतना हैं और उस चेतना को अपने भीतर जगाना ही उनका वास्तविक जन्मोत्सव है।
उन्होंने बताया कि ओशो का दर्शन अतीत के बुद्धपुरुषों से अलग इसलिए है क्योंकि उन्होंने आध्यात्मिकता को आधुनिक भाषा, मनोविज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने धर्म-रहित आध्यात्मिक मार्ग, व्यक्ति की स्वतंत्रता, जीवन-स्वीकृति, अंधविश्वासों की आलोचना और ध्यान-उत्सव के अनोखे संगम को जीवन शैली बनाया।
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भक्ति से गूंज उठा वातावरण
कार्यक्रम के दौरान मां अमृत प्रिया ने अपनी मधुर आवाज में ओशो को समर्पित कई भक्ति-गीत प्रस्तुत किए। उनके गायन ने साधकों को ध्यान, भाव और आनंद के एक अनूठे अनुभव से भर दिया। ध्यान सत्रों, साझा सत्संग और भक्ति-रसमय माहौल ने साधकों को आत्मचिंतन, जागृति और उत्सव की नई अनुभूति प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में सभी ने ओशो की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
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कार्यक्रम में स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने साधकों को भीतर की यात्रा अपनाने और जीवन को उत्सव की तरह जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ध्यान कोई विश्वास नहीं, यह एक विज्ञान है। जब भीतर शांति का प्रसाद उतरता है तभी जीवन उत्सव में बदलता है। ओशो व्यक्ति नहीं, एक चेतना हैं और उस चेतना को अपने भीतर जगाना ही उनका वास्तविक जन्मोत्सव है।
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उन्होंने बताया कि ओशो का दर्शन अतीत के बुद्धपुरुषों से अलग इसलिए है क्योंकि उन्होंने आध्यात्मिकता को आधुनिक भाषा, मनोविज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने धर्म-रहित आध्यात्मिक मार्ग, व्यक्ति की स्वतंत्रता, जीवन-स्वीकृति, अंधविश्वासों की आलोचना और ध्यान-उत्सव के अनोखे संगम को जीवन शैली बनाया।
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भक्ति से गूंज उठा वातावरण
कार्यक्रम के दौरान मां अमृत प्रिया ने अपनी मधुर आवाज में ओशो को समर्पित कई भक्ति-गीत प्रस्तुत किए। उनके गायन ने साधकों को ध्यान, भाव और आनंद के एक अनूठे अनुभव से भर दिया। ध्यान सत्रों, साझा सत्संग और भक्ति-रसमय माहौल ने साधकों को आत्मचिंतन, जागृति और उत्सव की नई अनुभूति प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में सभी ने ओशो की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

फोटो :40: सोनीपत के गांव दीपालपुर स्थित ध्यान केंद्र में स्वामी शैलेंद्र सरस्वती व मां अमृत प्र