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Sonipat News: विद्यार्थियों को आलोचनात्मक सोच व रचनात्मक समस्याओं का हल करने के लिए किया प्रेरित
Mon, 30 Dec 2024 01:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 30 Dec 2024 01:50 AM IST
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सोेनीपत। 51वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी के चौथे दिन का समापन सत्र विद्यार्थियों को शैक्षणिक व व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला रहा। एससीईआरटी गुरुग्राम के संयुक्त निदेशक सुनील बजाज ने ग्रोथ माइंडसेट डेवलपमेंट पर सत्र आयोजित किया। उन्होंने पहेलियों व अंतर सक्रिय (इंटरेक्टिव) गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को आलोचनात्मक सोच व रचनात्मक समस्याओं को हल करने के लिए प्रेरित किया।
डीईओ नवीन गुलिया ने बताया कि राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी में रविवार को सोनीपत, गुरुग्राम, झज्जर, फरीदाबाद, अंबाला, पलवल व जींद जिलों के 8500 विद्यार्थियों के अलावा 28 राज्यों से आए 400 युवा विज्ञान प्रदर्शकों ने मानव जीवन की जटिलताओं को दूर करने वाले मॉडल प्रस्तुत किए। दिन की शुरुआत में डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-एनर्जी रिसर्च के वैज्ञानिक डॉ. अतुल ग्रोवर के कंप्यूटेशनल थिंकिंग : द एल्गोरिदमिक वर्ल्ड–फ्रॉम डार्विनिज्म टू डेटियाजम पर व्याख्यान दिया। उन्होंने डेटा-संचालित निर्णय लेने के बढ़ते प्रभाव, एआई-चालित दुनिया में नैतिक चिंताओं व स्मार्ट डिवाइस पर मानव निर्भरता के खतरों पर चर्चा की।
एनआईटी कुरुक्षेत्र के प्रो. यशचंद्र द्विवेदी की विज्ञान वार्ता आधुनिक खेती में लेजर प्रौद्योगिकी का उपयोग पर केंद्रित रही। उन्होंने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता जानने, फसल की जड़ों का निरीक्षण करने, बीमारियों का पता लगाने व खरपतवार को समाप्त करने के लिए लेजर के प्रयोग से अवगत कराया। जिला विज्ञान विशेषज्ञ सुरेंद्र सिंह के निर्देश में विज्ञान प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई। इसमें नाैवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने अपने बौद्धिक ज्ञान का परिचय दिया।
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यह मॉडल रहे आकर्षण का केंद्र
जीवन और पर्यावरण :
जैन गर्ल्स इंटर कॉलेज, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश की तृप्ती शर्मा ने शिक्षक उदय सिंह के सहयोग से धुएं की ऊष्मा ऊर्जा को बिजली में बदलने की प्रणाली का प्रदर्शन किया। इस नवाचार ने पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान करते हुए एक स्थायी ऊर्जा-उत्पादन विधि को प्रदर्शित किया।
पर्यावरणीय वायु शोधक :
त्रिपुरा के कथालिया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सुभराज देबनाथ व देबरघा घोष ने घरेलू वायु शोधकों की कार्यक्षमता का अनुकरण प्रदर्शित किया। यह एक सोलर पैनल के माध्यम से संचालित था। यह सक्रिय कार्बन और यूवी लैंप जैसे उन्नत फिल्टर का उपयोग कर वायु से कण पदार्थों को कम करने और वातावरण को स्वच्छ बनाने में सक्षम था।
उंगली के अनुकूल दरवाजा :
कर्नाटक के संभोटा तिब्बत स्कूल के तेनजिन डोधोन, तेनजिंग डिक्की व तेनजिन त्सेपकाल ने दरवाजों के कारण उंगलियों की चोटों को रोकने के लिए मॉडल प्रस्तुत किया है। यह बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
अल्गी से बिजली
डिमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल, भुवनेश्वर के एसके सफिउर रहमान और उनकी टीम ने अल्गी से बिजली बनाने का मॉडल पेश किया। इसमें जैव-ईंधन में बदलने के लिए फोटो सिंथेटिक शैवाल का उपयोग किया। इसमें बताया कि शैवाल स्थायी ऊर्जा समाधानों में कैसे योगदान कर सकते हैं।
कार्बन मोनोऑक्साइड डिटेक्टर :
श्रीनगर के जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के जुरैन नजीर ने कार्बन मोनोऑक्साइड डिटेक्टर मॉडल बनाया। यह उपकरण हानिकारक सीओ उत्सर्जन का पता लगाता है और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक एग्जॉस्ट फैन सक्रिय करता है। यह कोयले पर निर्भर क्षेत्रों के लिए एक व्यावहारिक और किफायती समाधान है।
ऑटो रेस्क्यू स्मार्ट नोटिफिकेशन सिस्टम :
केरल के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय के अभिकृष्ण के.ए. की इस परियोजना का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है। यह स्वचालित रूप से दुर्घटनाओं का पता लगाता है और आपातकालीन सेवाओं को सूचित करता है। यह जीपीएस, जीएसएम व कैपेसिटिव सेंसर पर आधारित है, जो वास्तविक समय में संचार और कुशल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है।
स्मार्ट रेलवे प्लेटफॉर्म :
उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेज के रोहित कुमार ने इस परियोजना से प्लेटफार्मों के बीच एक स्वचालित ब्रिज बनाया है, जो वृद्ध व विकलांग यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करता है। मॉडल में सेंसर व एलईडी संकेतों का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा और पहुंच को बढ़ावा देता है।
फाइव-इन-वन ट्रक :
केरल से अहमद निब्रास ई.ए. और मोहम्मद शमिल सिदीक ने बहुउद्देशीय ट्रक बनाया है। यह पांच वाहनों को एक में संयोजित करता है। यह खुदाई करने वाले, क्रेन, डंप ट्रक, पेड़ काटने वाली मशीन व पानी के छिड़काव के रूप में कार्य कर सकता है। यह निर्माण और आपदा प्रबंधन के लिए बहुमुखी समाधान साबित होगा।
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डीईओ नवीन गुलिया ने बताया कि राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी में रविवार को सोनीपत, गुरुग्राम, झज्जर, फरीदाबाद, अंबाला, पलवल व जींद जिलों के 8500 विद्यार्थियों के अलावा 28 राज्यों से आए 400 युवा विज्ञान प्रदर्शकों ने मानव जीवन की जटिलताओं को दूर करने वाले मॉडल प्रस्तुत किए। दिन की शुरुआत में डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-एनर्जी रिसर्च के वैज्ञानिक डॉ. अतुल ग्रोवर के कंप्यूटेशनल थिंकिंग : द एल्गोरिदमिक वर्ल्ड–फ्रॉम डार्विनिज्म टू डेटियाजम पर व्याख्यान दिया। उन्होंने डेटा-संचालित निर्णय लेने के बढ़ते प्रभाव, एआई-चालित दुनिया में नैतिक चिंताओं व स्मार्ट डिवाइस पर मानव निर्भरता के खतरों पर चर्चा की।
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एनआईटी कुरुक्षेत्र के प्रो. यशचंद्र द्विवेदी की विज्ञान वार्ता आधुनिक खेती में लेजर प्रौद्योगिकी का उपयोग पर केंद्रित रही। उन्होंने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता जानने, फसल की जड़ों का निरीक्षण करने, बीमारियों का पता लगाने व खरपतवार को समाप्त करने के लिए लेजर के प्रयोग से अवगत कराया। जिला विज्ञान विशेषज्ञ सुरेंद्र सिंह के निर्देश में विज्ञान प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई। इसमें नाैवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने अपने बौद्धिक ज्ञान का परिचय दिया।
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यह मॉडल रहे आकर्षण का केंद्र
जीवन और पर्यावरण :
जैन गर्ल्स इंटर कॉलेज, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश की तृप्ती शर्मा ने शिक्षक उदय सिंह के सहयोग से धुएं की ऊष्मा ऊर्जा को बिजली में बदलने की प्रणाली का प्रदर्शन किया। इस नवाचार ने पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान करते हुए एक स्थायी ऊर्जा-उत्पादन विधि को प्रदर्शित किया।
पर्यावरणीय वायु शोधक :
त्रिपुरा के कथालिया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सुभराज देबनाथ व देबरघा घोष ने घरेलू वायु शोधकों की कार्यक्षमता का अनुकरण प्रदर्शित किया। यह एक सोलर पैनल के माध्यम से संचालित था। यह सक्रिय कार्बन और यूवी लैंप जैसे उन्नत फिल्टर का उपयोग कर वायु से कण पदार्थों को कम करने और वातावरण को स्वच्छ बनाने में सक्षम था।
उंगली के अनुकूल दरवाजा :
कर्नाटक के संभोटा तिब्बत स्कूल के तेनजिन डोधोन, तेनजिंग डिक्की व तेनजिन त्सेपकाल ने दरवाजों के कारण उंगलियों की चोटों को रोकने के लिए मॉडल प्रस्तुत किया है। यह बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
अल्गी से बिजली
डिमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल, भुवनेश्वर के एसके सफिउर रहमान और उनकी टीम ने अल्गी से बिजली बनाने का मॉडल पेश किया। इसमें जैव-ईंधन में बदलने के लिए फोटो सिंथेटिक शैवाल का उपयोग किया। इसमें बताया कि शैवाल स्थायी ऊर्जा समाधानों में कैसे योगदान कर सकते हैं।
कार्बन मोनोऑक्साइड डिटेक्टर :
श्रीनगर के जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के जुरैन नजीर ने कार्बन मोनोऑक्साइड डिटेक्टर मॉडल बनाया। यह उपकरण हानिकारक सीओ उत्सर्जन का पता लगाता है और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक एग्जॉस्ट फैन सक्रिय करता है। यह कोयले पर निर्भर क्षेत्रों के लिए एक व्यावहारिक और किफायती समाधान है।
ऑटो रेस्क्यू स्मार्ट नोटिफिकेशन सिस्टम :
केरल के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय के अभिकृष्ण के.ए. की इस परियोजना का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है। यह स्वचालित रूप से दुर्घटनाओं का पता लगाता है और आपातकालीन सेवाओं को सूचित करता है। यह जीपीएस, जीएसएम व कैपेसिटिव सेंसर पर आधारित है, जो वास्तविक समय में संचार और कुशल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है।
स्मार्ट रेलवे प्लेटफॉर्म :
उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेज के रोहित कुमार ने इस परियोजना से प्लेटफार्मों के बीच एक स्वचालित ब्रिज बनाया है, जो वृद्ध व विकलांग यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करता है। मॉडल में सेंसर व एलईडी संकेतों का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा और पहुंच को बढ़ावा देता है।
फाइव-इन-वन ट्रक :
केरल से अहमद निब्रास ई.ए. और मोहम्मद शमिल सिदीक ने बहुउद्देशीय ट्रक बनाया है। यह पांच वाहनों को एक में संयोजित करता है। यह खुदाई करने वाले, क्रेन, डंप ट्रक, पेड़ काटने वाली मशीन व पानी के छिड़काव के रूप में कार्य कर सकता है। यह निर्माण और आपदा प्रबंधन के लिए बहुमुखी समाधान साबित होगा।