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रेत के स्टॉक जांच में अवैध मिलने पर नोटिस जारी करने के बाद ही खनन अधिकारी का तबादला
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सोनीपत। रेत के स्टॉक की जांच करने के लिए अधिकारियों की टीम ने छापा मार अभियान चलाया और मिमारपुर के पास रेत का अवैध स्टॉक मिलने पर खनन अधिकारी ने नोटिस जारी कर दिया। उस नोटिस को जारी करने के बाद ही खनन अधिकारी का तबादला कर दिया गया है। यहां रेत के अवैध स्टॉक के साथ ही फर्जीवाड़ा भी करने की बात सामने आई थी और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस जारी करने को खनन अधिकारी के तबादले से जोड़ा जा रहा है। हालांकि खनन अधिकारी ने नोटिस की कॉपी डीसी के साथ ही खनन विभाग के निदेशक के पास पहले ही भेज दी थी।
रेत के अवैध स्टॉक की शिकायत शासन के पास पहुंचने के बाद एक टीम बनाकर छापा लगवाया गया था। उस छापा मारने वाली टीम में खनन अधिकारी रहे राजेश कुमार के अलावा राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल किए गए थे। उस टीम ने मिमारपुर के पास छापा मारा तो वहां स्टॉक की जांच करने पर कोई कागज नहीं मिला। उसके बावजूद खनन अधिकारी ने कागज दिखाने का समय दिया और उनको जल्द ही कार्यालय में कागज दिखाने के लिए कहा गया। जब मिमारपुर के पास लगाए गए उस स्टॉक का कोई कागज नहीं दिखाया गया तो 16 मार्च को अवैध स्टॉक लगाने वालों को नोटिस भेजा गया और उसकी एक कॉपी डीसी व खनन विभाग के निदेशक के पास भी भेजी गई।
नोटिस को जारी करने के बाद ही खनन अधिकारी राजेश का तबादला कर दिया गया और उनकी जगह पहले खनन अधिकारी रहे गुरजीत सिंह को दोबारा भेजा गया है। इसके बाद खनन अधिकारी राजेश के नोटिस पर आगे कोई कार्रवाई ही नहीं की गई, जबकि निदेशक के पास भी उस नोटिस की कॉपी पूरा खुलासा करते हुए भेजी गई थी। वहीं डीसी श्यामलाल पूनिया का कहना है कि स्टॉक की जांच टीम ने की थी और उसमें नोटिस भी जारी हुआ था। लेकिन खनन अधिकारी का तबादला किस कारण से किया गया है, इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते हैं।
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रेत के अवैध स्टॉक की शिकायत शासन के पास पहुंचने के बाद एक टीम बनाकर छापा लगवाया गया था। उस छापा मारने वाली टीम में खनन अधिकारी रहे राजेश कुमार के अलावा राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल किए गए थे। उस टीम ने मिमारपुर के पास छापा मारा तो वहां स्टॉक की जांच करने पर कोई कागज नहीं मिला। उसके बावजूद खनन अधिकारी ने कागज दिखाने का समय दिया और उनको जल्द ही कार्यालय में कागज दिखाने के लिए कहा गया। जब मिमारपुर के पास लगाए गए उस स्टॉक का कोई कागज नहीं दिखाया गया तो 16 मार्च को अवैध स्टॉक लगाने वालों को नोटिस भेजा गया और उसकी एक कॉपी डीसी व खनन विभाग के निदेशक के पास भी भेजी गई।
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नोटिस को जारी करने के बाद ही खनन अधिकारी राजेश का तबादला कर दिया गया और उनकी जगह पहले खनन अधिकारी रहे गुरजीत सिंह को दोबारा भेजा गया है। इसके बाद खनन अधिकारी राजेश के नोटिस पर आगे कोई कार्रवाई ही नहीं की गई, जबकि निदेशक के पास भी उस नोटिस की कॉपी पूरा खुलासा करते हुए भेजी गई थी। वहीं डीसी श्यामलाल पूनिया का कहना है कि स्टॉक की जांच टीम ने की थी और उसमें नोटिस भी जारी हुआ था। लेकिन खनन अधिकारी का तबादला किस कारण से किया गया है, इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते हैं।
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