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Sonipat News: काजल को हिंदुस्तान यूथ आइकॉन अवॉर्ड
Thu, 10 Jul 2025 01:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 10 Jul 2025 01:44 AM IST
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फोटो 24: राष्ट्रीय अवार्डी स्वयंसेविका काजल कौशिक।
सोनीपत। गांव भूर्री निवासी काजल कौशिक को हिंदुस्तान यूथ आइकॉन अवार्ड 2025 से सम्मानित किया जाएगा। हिंदुस्तान यूथ आइकॉन बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल किया जाएगा। यह कार्यक्रम 28 जुलाई को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ग्लोकल विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाएगा। काजल कौशिक को वर्ष 2021-21 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एनएसएस नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया था।
उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा शंभू दयाल मॉडर्न स्कूल से हुई। वहीं से उनका एनएसएस स्वयंसेविका का सफर अध्यापिका मधु लहरी के निर्देशन में शुरू हुआ। हिंदू कन्या महाविद्यालय में को-ऑर्डिनेटर डॉ. माया चौधरी के निर्देशन में एनएसएस इकाई में जुड़कर समाजसेवा में नि:स्वार्थ भाव से योगदान दिया। साथ ही वह महाविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेविका बनीं।
स्लम एरिया के स्कूलों और विद्यार्थियों के लिए डांस और पेंटिंग वर्कशॉप निशुल्क प्रदान की। छात्रों को शिक्षित करने के लिए निजी स्तर पर स्लम एरिया को गोद लिया और भोजन वितरण कर छोटी-मोटी सौगात दी ।
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उन्हें वर्ष 2023 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के एनएसएस यूनिवर्सिटी स्तरीय अवार्ड में पहला स्थान प्राप्त हुआ। स्वयंसेविका काजल कौशिक ने इस जीत का श्रेय माता ओमवती कौशिक, पिता जगमोहन कौशिक व उनको मार्गदर्शन देने वाली उनकी प्रोफेसर माया चौधरी को दिया।
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उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा शंभू दयाल मॉडर्न स्कूल से हुई। वहीं से उनका एनएसएस स्वयंसेविका का सफर अध्यापिका मधु लहरी के निर्देशन में शुरू हुआ। हिंदू कन्या महाविद्यालय में को-ऑर्डिनेटर डॉ. माया चौधरी के निर्देशन में एनएसएस इकाई में जुड़कर समाजसेवा में नि:स्वार्थ भाव से योगदान दिया। साथ ही वह महाविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेविका बनीं।
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स्लम एरिया के स्कूलों और विद्यार्थियों के लिए डांस और पेंटिंग वर्कशॉप निशुल्क प्रदान की। छात्रों को शिक्षित करने के लिए निजी स्तर पर स्लम एरिया को गोद लिया और भोजन वितरण कर छोटी-मोटी सौगात दी ।
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उन्हें वर्ष 2023 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के एनएसएस यूनिवर्सिटी स्तरीय अवार्ड में पहला स्थान प्राप्त हुआ। स्वयंसेविका काजल कौशिक ने इस जीत का श्रेय माता ओमवती कौशिक, पिता जगमोहन कौशिक व उनको मार्गदर्शन देने वाली उनकी प्रोफेसर माया चौधरी को दिया।