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गोहाना बनेगा जिला : उम्मीदें चढ़ सकती है परवान, दो दशक के संघर्ष को मिल सकता है अंजाम
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सोनीपत। गोहाना को जिला बनाने की उम्मीद परवान चढ़ती दिखाई दे रही है। गोहाना को जिला बनाओ की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होती दिख रही है। करीब दो दशक पूर्व गठित जिला बनाओ संघर्ष समिति की लगातार सक्रियता, जन सहभागिता और राजनीतिक समर्थन के चलते अब गोहाना को जिले का दर्जा मिलने की उम्मीदों को नई ऊर्जा मिली है।
प्रदेश सरकार की तरफ से नए जिलों के गठन के लिए बनी कैबिनेट सब-कमेटी अगले सप्ताह बैठक कर सकती है। बैठक के उपरांत समिति की तरफ से सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने की संभावना है, जिसमें गोहाना को भी शामिल किया जा सकता है।
गोहाना को जिला बनाने का आंदोलन करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था। इसके लिए समिति गठित कर जयपाल मलिक को अध्यक्ष बनाया गया था। आंदोलन के करीब एक दशक बाद तत्कालीन कृषि मंत्री ओपी धनखड़ की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिश के बाद गोहाना का जिला बनना तय माना जा रहा था। उसके बाद भी कई साल बीत गए।
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इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो गोहाना को वर्ष 1826 में तहसील का दर्जा मिला था। लंबे अरसे पहले गोहाना उपमंडल भी बन गया था। अब करीब 199 साल बाद गोहाना तहसील के जिला बनने की उम्मीद परवान चढ़ती दिख रही है। गोहाना तहसील को पहले रोहतक जिले में जोड़ा गया था। रोहतक गोहाना से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। वर्ष 1972 में सोनीपत जिला बना। इसके बाद गोहाना तहसील को सोनीपत जिले में जोड़ दिया गया। गोहाना की सोनीपत से भी दूरी 36 किलोमीटर है। गोहाना के लोगों को विभिन्न कार्यो के लिए सोनीपत स्थित मुख्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। अगर गोहाना जिला बना तो गोहाना के लोगों को सोनीपत चक्कर नहीं काटने पड़ेगे।
गोहाना तहसील में 86 गांव आते हैं। कांग्रेस के राज में गोहाना नगर पालिका का दर्जा बढ़ा कर इसे नगर परिषद बना दिया गया था। गोहाना शहर में लगभग 80 हजार आबादी है।
शिक्षा की दृष्टि से अहम केंद्र
गोहाना शिक्षा की दृष्टि से भी अहम केंद्र रहा है। अंग्रेजों की हुकूमत के समय शहीद भगत फूल सिंह ने गांव भैंसवाल कलां में 23 मार्च, 1920 में गुरुकुल की नींव रखी थी। उन्होंने 1936 में केवल तीन छात्राओं के साथ गांव खानपुर कलां में कन्या गुरुकुल की स्थापना की थी। अब यह दोनों संस्थाएं उत्तर भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय का दर्जा पा चुकी हैं। महिला विश्वविद्यालय में हजारों की संख्या में छात्राएं पढ़ रही हैं। खानपुर कलां में उत्तर भारत का पहला महिला मेडिकल कॉलेज भी चल रहा है।
यातायात की बेहतर सुविधा
गोहाना रेल मार्ग और प्रमुख सड़क मार्गो से जुड़ा है। रोहतक-गोहाना-पानीपत रेल मार्ग तो अंग्रेजों के समय से चल रहा है। भाजपा सरकार में वर्ष 2016 में जींद-गोहाना-सोनीपत के बीच भी रेल सेवाएं शुरू हो गई। गोहाना से पानीपत-गोहाना-रोहतक नेशनल हाईवे-709 गुजरता है। कटरा हाईवे गोहाना से गुजर रहा तो एनएच-352ए भी सोनीपत को गोहाना होते हुए जींद को जोड़ रहा है। इसका निर्माण जल्द पूरा होने वाला है।
नौ शहरों का प्रमुख केंद्र है गोहाना
गोहाना नौ शहरों के केंद्र में है। गोहाना से सोनीपत 36 किलोमीटर, रोहतक 35 किलोमीटर, खरखौदा 34 किलोमीटर, जींद 40, सफीदों 35, पानीपत 41, महम 41, गन्नौर 34 और जुलाना 33 किलोमीटर दूर है।
कमेटी की रिपोर्ट का हो रहा इंतजार
कमेटी के पास गोहाना के साथ हांसी, डबवाली, असंध व सफीदों को जिला बनाने का प्रस्ताव आया है। कमेटी की चार बैठक हो चुकी हैं। कमेटी ने संबंधित उपायुक्तों से इस संबंध में रिपोर्ट भी मांगी थी। कमेटी का कार्यकाल 30 जून तक का है।
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प्रदेश सरकार की तरफ से नए जिलों के गठन के लिए बनी कैबिनेट सब-कमेटी अगले सप्ताह बैठक कर सकती है। बैठक के उपरांत समिति की तरफ से सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने की संभावना है, जिसमें गोहाना को भी शामिल किया जा सकता है।
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गोहाना को जिला बनाने का आंदोलन करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था। इसके लिए समिति गठित कर जयपाल मलिक को अध्यक्ष बनाया गया था। आंदोलन के करीब एक दशक बाद तत्कालीन कृषि मंत्री ओपी धनखड़ की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिश के बाद गोहाना का जिला बनना तय माना जा रहा था। उसके बाद भी कई साल बीत गए।
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इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो गोहाना को वर्ष 1826 में तहसील का दर्जा मिला था। लंबे अरसे पहले गोहाना उपमंडल भी बन गया था। अब करीब 199 साल बाद गोहाना तहसील के जिला बनने की उम्मीद परवान चढ़ती दिख रही है। गोहाना तहसील को पहले रोहतक जिले में जोड़ा गया था। रोहतक गोहाना से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। वर्ष 1972 में सोनीपत जिला बना। इसके बाद गोहाना तहसील को सोनीपत जिले में जोड़ दिया गया। गोहाना की सोनीपत से भी दूरी 36 किलोमीटर है। गोहाना के लोगों को विभिन्न कार्यो के लिए सोनीपत स्थित मुख्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। अगर गोहाना जिला बना तो गोहाना के लोगों को सोनीपत चक्कर नहीं काटने पड़ेगे।
गोहाना तहसील में 86 गांव आते हैं। कांग्रेस के राज में गोहाना नगर पालिका का दर्जा बढ़ा कर इसे नगर परिषद बना दिया गया था। गोहाना शहर में लगभग 80 हजार आबादी है।
शिक्षा की दृष्टि से अहम केंद्र
गोहाना शिक्षा की दृष्टि से भी अहम केंद्र रहा है। अंग्रेजों की हुकूमत के समय शहीद भगत फूल सिंह ने गांव भैंसवाल कलां में 23 मार्च, 1920 में गुरुकुल की नींव रखी थी। उन्होंने 1936 में केवल तीन छात्राओं के साथ गांव खानपुर कलां में कन्या गुरुकुल की स्थापना की थी। अब यह दोनों संस्थाएं उत्तर भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय का दर्जा पा चुकी हैं। महिला विश्वविद्यालय में हजारों की संख्या में छात्राएं पढ़ रही हैं। खानपुर कलां में उत्तर भारत का पहला महिला मेडिकल कॉलेज भी चल रहा है।
यातायात की बेहतर सुविधा
गोहाना रेल मार्ग और प्रमुख सड़क मार्गो से जुड़ा है। रोहतक-गोहाना-पानीपत रेल मार्ग तो अंग्रेजों के समय से चल रहा है। भाजपा सरकार में वर्ष 2016 में जींद-गोहाना-सोनीपत के बीच भी रेल सेवाएं शुरू हो गई। गोहाना से पानीपत-गोहाना-रोहतक नेशनल हाईवे-709 गुजरता है। कटरा हाईवे गोहाना से गुजर रहा तो एनएच-352ए भी सोनीपत को गोहाना होते हुए जींद को जोड़ रहा है। इसका निर्माण जल्द पूरा होने वाला है।
नौ शहरों का प्रमुख केंद्र है गोहाना
गोहाना नौ शहरों के केंद्र में है। गोहाना से सोनीपत 36 किलोमीटर, रोहतक 35 किलोमीटर, खरखौदा 34 किलोमीटर, जींद 40, सफीदों 35, पानीपत 41, महम 41, गन्नौर 34 और जुलाना 33 किलोमीटर दूर है।
कमेटी की रिपोर्ट का हो रहा इंतजार
कमेटी के पास गोहाना के साथ हांसी, डबवाली, असंध व सफीदों को जिला बनाने का प्रस्ताव आया है। कमेटी की चार बैठक हो चुकी हैं। कमेटी ने संबंधित उपायुक्तों से इस संबंध में रिपोर्ट भी मांगी थी। कमेटी का कार्यकाल 30 जून तक का है।