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प्रभु ने जगत का कल्याण कर दिखाया सत्यता का मार्ग : गोस्वामी
Fri, 04 Oct 2024 06:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 04 Oct 2024 06:41 PM IST
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खरखौदा। लाला जयनारायण धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का पांचवां दिन रहा। कथा व्यास श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी ने गोवर्धन पर्वत व भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब भगवान ने पृथ्वी पर जन्म लिया है, तब-तब उन्होंने जगत का कल्याण कर सत्यता का मार्ग दिखाया है।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज वासियों को गिरिराज की पूजा-अर्चना करने के लिए कहा तो इंद्रदेव काफी क्रोधित हो गए, उन्होंने ब्रज में बारिश की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रज वासियों की रक्षा की थी। तब इंद्र देवता को ज्ञात हुआ कि श्रीकृष्ण स्वयं साक्षात परमेश्वर हैं, इसलिए भगवान कृष्ण को गिरिधर नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण को रुक्मणी अपने मन ही मन में पति स्वीकार चुकी थी। जब प्रभु को पता चला कि रुक्मणी का विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध होने जा रहा है, तब उन्होंने रुक्मणी का हरण कर उनसे विवाह रचाया था। कथा में अमित सिंगला, आनंद गर्ग, आशीष गर्ग, वीरेंद्र व नीरज गुप्ता मौजूद रहे।
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कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज वासियों को गिरिराज की पूजा-अर्चना करने के लिए कहा तो इंद्रदेव काफी क्रोधित हो गए, उन्होंने ब्रज में बारिश की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रज वासियों की रक्षा की थी। तब इंद्र देवता को ज्ञात हुआ कि श्रीकृष्ण स्वयं साक्षात परमेश्वर हैं, इसलिए भगवान कृष्ण को गिरिधर नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण को रुक्मणी अपने मन ही मन में पति स्वीकार चुकी थी। जब प्रभु को पता चला कि रुक्मणी का विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध होने जा रहा है, तब उन्होंने रुक्मणी का हरण कर उनसे विवाह रचाया था। कथा में अमित सिंगला, आनंद गर्ग, आशीष गर्ग, वीरेंद्र व नीरज गुप्ता मौजूद रहे।
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