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कमेटी को मानने से किसानों का इनकार, आंदोलन जारी रखने का एलान
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कृषि कानूनों के लागू किए जाने पर रोक और कमेटी बनाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसानों ने सिरे से नकार दिया है। किसानों ने साफ कर दिया है कि कमेटी के पक्ष में वह कभी नहीं रहे हैं और अब वह कमेटी के समक्ष नहीं जाएंगे। किसानों ने कहा कि वह कोर्ट नहीं गए थे, बल्कि सरकार ने यह याचिका डलवाई थी। उन्होंने कहा कि किसान पहले से जानते थे कि सरकार अपना पल्ला झाड़ने के लिए इस तरह से कुछ करेगी। लेकिन किसान किसी भी हालत में पीछे हटने वाले नहीं हैं और कृषि कानून रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुंडली बॉर्डर पर बातचीत करते हुए संयुक्त मोर्चा के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल, जगमोहन सिंह, जगजीत सिंह दल्लेवाल व प्रेम सिंह पंघू ने कहा कि यह अचंभे की बात है कि सरकार ने कमेटी के लिए ऐसे चार नाम दिए जो पहले से ही इन कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। सरकार के इन कानूनों की प्रशंसा में उनके खूब लेख प्रकाशित हो चुके हैं। ऐसे में यह लोग किसान के हित में कैसे सोच सकते हैं। वहीं जब किसानों ने कमेटी का कोई प्रस्ताव रखा ही नहीं है तो इसका कोई औचित्य नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि जहां तक कानूनों को स्थगित करने का सवाल है, यह कोई समाधान नहीं है। किसानों ने साफ कर रखा है कि वह कानून रद्द कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड को लेकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास हो रहा है। हर जगह भ्रम फैलाया जा रहा है कि जैसे दुश्मन देश पर हमला करना चाहते हों। दिल्ली फतह करने जा रहे हैं। फिलहाल ऐसा कोई इरादा किसानों का नहीं है।
उन्होंने कहा कि लालकिले पर तिरंगा फहराने या संसद में जाने का अभी तक कोई कार्यक्रम नहीं है। इस बारे में 15 की बैठक के बाद तय होगा कि आंदोलन का स्वरूप क्या होगा। शांतिपूर्ण ढंग से जैसे पहले किसान आंदोलन करते रहे हैं, आगे भी इसी तरह चलेगा और शांतिभंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों ने कहा कि 15 जनवरी को बातचीत के लिए जरूर जाएंगे और इसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति बनेगी। संभव है कि यह आंदोलन अब और लंबा चले। फिलहाल तक किसान आज लोहड़ी पर कृषि कानूनों प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट में बची एक पिटीशन
किसान नेता प्रेमसिंह पंघू ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग पिटीशन डाली गई थी। इनमें से एक सड़क से किसानों को उठाने की थी। जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने मनाही कर दी और किसानों के धरने को कानूनी रूप से वाजिब ठहराया है। दूसरी में कानूनों पर रोक लगाते हुए कमेटी बनाई है। जिसे किसानों ने मानने से इनकार कर दिया है। तीसरी पिटीशन अब 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड पर रोक के लिए दिल्ली पुलिस ने लगा रखी है। इसमें 8 जत्थेबंदियों को नोटिस प्राप्त हो चुका है। इसमें सुप्रीम कोर्ट में हम अपना पक्ष रखेंगे और 15 जनवरी की वार्ता के बाद अगले आंदोलन के बारे में बताएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुंडली बॉर्डर पर बातचीत करते हुए संयुक्त मोर्चा के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल, जगमोहन सिंह, जगजीत सिंह दल्लेवाल व प्रेम सिंह पंघू ने कहा कि यह अचंभे की बात है कि सरकार ने कमेटी के लिए ऐसे चार नाम दिए जो पहले से ही इन कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। सरकार के इन कानूनों की प्रशंसा में उनके खूब लेख प्रकाशित हो चुके हैं। ऐसे में यह लोग किसान के हित में कैसे सोच सकते हैं। वहीं जब किसानों ने कमेटी का कोई प्रस्ताव रखा ही नहीं है तो इसका कोई औचित्य नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि जहां तक कानूनों को स्थगित करने का सवाल है, यह कोई समाधान नहीं है। किसानों ने साफ कर रखा है कि वह कानून रद्द कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड को लेकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास हो रहा है। हर जगह भ्रम फैलाया जा रहा है कि जैसे दुश्मन देश पर हमला करना चाहते हों। दिल्ली फतह करने जा रहे हैं। फिलहाल ऐसा कोई इरादा किसानों का नहीं है।
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उन्होंने कहा कि लालकिले पर तिरंगा फहराने या संसद में जाने का अभी तक कोई कार्यक्रम नहीं है। इस बारे में 15 की बैठक के बाद तय होगा कि आंदोलन का स्वरूप क्या होगा। शांतिपूर्ण ढंग से जैसे पहले किसान आंदोलन करते रहे हैं, आगे भी इसी तरह चलेगा और शांतिभंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों ने कहा कि 15 जनवरी को बातचीत के लिए जरूर जाएंगे और इसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति बनेगी। संभव है कि यह आंदोलन अब और लंबा चले। फिलहाल तक किसान आज लोहड़ी पर कृषि कानूनों प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट में बची एक पिटीशन
किसान नेता प्रेमसिंह पंघू ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग पिटीशन डाली गई थी। इनमें से एक सड़क से किसानों को उठाने की थी। जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने मनाही कर दी और किसानों के धरने को कानूनी रूप से वाजिब ठहराया है। दूसरी में कानूनों पर रोक लगाते हुए कमेटी बनाई है। जिसे किसानों ने मानने से इनकार कर दिया है। तीसरी पिटीशन अब 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड पर रोक के लिए दिल्ली पुलिस ने लगा रखी है। इसमें 8 जत्थेबंदियों को नोटिस प्राप्त हो चुका है। इसमें सुप्रीम कोर्ट में हम अपना पक्ष रखेंगे और 15 जनवरी की वार्ता के बाद अगले आंदोलन के बारे में बताएंगे।