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पंचायत में किसानों व सरकार को सड़क खाली कराने को एक सप्ताह का अल्टीमेटम, टकराव की आशंका बढ़ी

Mon, 21 Jun 2021 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jun 2021 12:27 AM IST
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farmers and villegers dispute, panchayat, road open
गांव सेरसा में आयोजित पंचायत में उपस्थित आसपास के ग्रामीण। - फोटो : Sonipat
कुंडली/सोनीपत। कुंडली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के कारण बंद नेशनल हाईवे-44 को एक तरफ से खोलने की मांग को लेकर रविवार को सेरसा में पंचायत की गई। इसमें आसपास के गांवों के लोग शामिल हुए और वहां ग्रामीण उग्र दिखाई दिए। पंचायत में ग्रामीणों ने किसानों व सरकार को सड़क खाली कराने को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। इस तरह अल्टीमेटम दिए जाने से किसानों व ग्रामीणों में टकराव की आशंका बढ़ गई हैं। वहीं किसान नेताओं ने टकराव कराने के लिए इसे सरकार का षड्यंत्र बताया है।
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कुंडली बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों व आसपास के ग्रामीणों के बीच चल रहे गतिरोध का हल नहीं निकल सका है। रविवार को जांटी रोड पर गांव सेरसा में पंचायत कर ग्रामीणों ने किसानों व सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा कि सप्ताह के अंदर कुंडली बॉर्डर पर दिल्ली आवागमन के लिए एक तरफ का रास्ता नहीं खोला गया तो वह इससे भी बड़ी महापंचायत दिल्ली में करेंगे। जिसमें हरियाणा व दिल्ली के करीब 30 गांवों के ग्रामीण शामिल होंगे और उसमें कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा। पंचायत में ग्रामीणों ने कहा कि किसानों के धरने को 7 माह पूरे होने वाले हैं। नेशनल हाईवे-44 से दिल्ली में आवागमन बंद होने से आसपास के गांवों के ग्रामीण कई बार किसानों से एक तरफ का रास्ता खोलने की मांग कर चुके हैं। इस मुद्दे को लेकर किसानों व ग्रामीणों की प्रशासन के साथ बैठक भी हो चुकी है, लेकिन जब कोई हल नहीं निकला तो ग्रामीणों ने रविवार को गांव सेरसा में राष्ट्रवादी एकता मंच के बैनर तले पंचायत बुलाई। जिसमें कुंडली क्षेत्र के साथ ही दिल्ली के गांवों से भी ग्रामीण शामिल हुए।
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पंचायत में रामफल सरोहा ने कहा कि उनका किसानों के साथ कोई मनमुटाव नहीं है, लेकिन 7 माह से उनके रास्ते बंद हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि बॉर्डर पर एक तरफ का रास्ता खोल दिया जाए। साथ ही कहा कि किसानों व सरकार ने सप्ताहभर के भीतर रास्ता नहीं खुलवाया तो वह महापंचायत करेंगे और उसमें आंदोलन का निर्णय लेंगे। यदि किसान परेशान होकर आंदोलन कर रहे हैं तो ग्रामीण भी परेशान होकर सड़क पर आ सकते हैं। पंचायत में निर्णय लिया है कि उनका एक प्रतिनिधि दल केंद्र सरकार से मिलकर रास्ता खुलवाने की मांग करेगा।
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आसपास के लोग हुए बर्बाद, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित
पंचायत में ग्रामीणों ने कहा कि आसपास के गांवों के लोग बर्बाद हो गए हैं। उनके काम भी पूरी तरह से ठप हो गए। अब रास्ता खोला जाना जरूरी है। किसानों के रास्ता बंद करने से दुकान व शोरूम बंद हैं और काम धंधे चौपट है। दिल्ली कोचिंग के लिए जाने वाले छात्रों की पढ़ाई भी बाधित है। क्षेत्र के लोगों की भलाई के लिए अब बॉर्डर पर रास्ता खोला जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने सरकार को जिम्मेदार बताते हुए लिए तीन निर्णय
सेरसा में हुई पंचायत की अध्यक्षता कर रहे हेमंत नांदल ने पंचायत के निर्णय से अवगत कराते हुए बताया कि आंदोलनकारी व सरकार कुंडली बॉर्डर बंद होने से आ रही परेशानियों के लिए जिम्मेदार है। स्थानीय लोगों को आपसी सद्भावना का माहौल बनाए रखना चाहिए। पंचायत ने सर्वसम्मति से आंदोलनकारियों व सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है।
यह हुआ निर्णय
- सप्ताहभर में प्रशासन और प्रदेश सरकार द्वारा एक तरफ का रास्ता खाली नहीं करवाया गया तो आने वाली परिस्थितियों के लिए आंदोलनकारी और सरकार ही जिम्मेदार होंगे।
- पंचायत में दूसरा निर्णय लिया गया कि बॉर्डर पर हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कमेटी बनाई जाएगी।
- तीसरा निर्णय यह लिया गया कि आंदोलनकारियों द्वारा की गई बैरिकेडिंग हटवाई जाएगी। मंच अगले सप्ताह एक कमेटी बनाकर जनप्रतिनिधियों एवं खाप प्रधानों से मिलकर समर्थन लेगा।

किसान मोर्चा ने बताया सरकार का षड्यंत्र
सेरसा में हुई पंचायत को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल आदि ने कहा कि यह सरकार का रचा गया षड्यंत्र है। अपने लोगों से विरोध कराकर टकराव कराने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ गिने-चुने लोग सरकार के इशारे पर किसानों का विरोध कर रहे हैं, जबकि आसपास के ग्रामीण किसानों का भरपूर सहयोग कर रहे हैं। सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही। किसानों को बदनाम करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि आपस में लड़वाकर किसानों के आंदोलन को कमजोर किया जाए, लेकिन सरकार की यह मंशा किसान पूरी नहीं होने देंगे।
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