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गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड से बातचीत का रास्ता नहीं खुला तो आंदोलन बढ़ाएंगे किसान

Mon, 25 Jan 2021 12:05 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jan 2021 12:05 AM IST
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अंकित चौहान
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सोनीपत। किसानों व सरकार के बीच बातचीत का बंद हुआ रास्ता अब गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड के बाद भी नहीं खुला तो किसान आंदोलन को बढ़ाने की तैयारी कर चुके हैं। किसान देश के अन्य कई नेशनल हाईवे पर पड़ाव डाल सकते हैं। इसके अलावा वह सरकारी भवनों पर कब्जा भी कर सकते हैं। गणतंत्र दिवस की परेड के बाद किसान नेता कुछ इंतजार करेंगे और उसके बाद आंदोलन को बढ़ाने की रणनीति तय करके किसानों को बताई जाएगी। हालांकि किसानों का मानना है कि गणतंत्र दिवस की परेड ऐतिहासिक होगी और उसके बाद बातचीत का रास्ता खुलने के साथ ही उनकी मांग भी सरकार को पूरी करनी पड़ेगी।
बता दें कि कृषि कानून रद्द कराने के लिए किसान पिछले दो महीने से आंदोलन कर रहे हैं और वे सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं। इसको लेकर किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है, जिनमें कई दौर की बातचीत लगातार हुई। किसानों व सरकार के बीच अधिकतर बैठकें बेनतीजा रहीं और उनसे दोनों के बीच गतिरोध कम होने की जगह बढ़ता ही गया। हालांकि एक बैठक में सरकार का रुख जरूर कुछ सकारात्मक दिखा, जिसमें डेढ़ साल के लिए कानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन उसे भी किसानों ने नामंजूर कर दिया और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद हो गया। अब किसानों व सरकार के बीच बातचीत का रास्ता गणतंत्र दिवस की परेड के बाद खुलने की बात कही जा रही है। यह माना जा रहा है कि किसानों की गणतंत्र दिवस पर होने वाली ट्रैक्टर परेड सफल होती है तो सरकार पर कहीं न कहीं उसका दबाव पड़ेगा। किसानों को खुद भी यह उम्मीद है कि जिस तरह से गणतंत्र दिवस की परेड ऐतिहासिक होगी और उस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। उसे शांतिपूर्ण तरीके से पूरी करके सरकार पर दबाव डालने पर जोर रहेगा। जिससे सरकार बातचीत का रास्ता खोलने के साथ ही उनकी मांगों को करते हुए कृषि कानून रद्द करे। वहीं अगर ऐसा नहीं होता है तो किसानों ने आंदोलन को बढ़ाने की पूरी तैयारी की हुई है। जिसमें कई अन्य जगहों पर नेशनल हाईवे जाम करने की तैयारी है। इसके अलावा सरकारी भवनों तक पर किसान डेरा डाल सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिस तरह से गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड में देश के अधिकतर राज्यों से किसान जुड़े हैं, उसे देखते हुए किसान नेताओं ने उन सभी राज्यों में आंदोलन शुरू कराने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। लेकिन पहले किसान भी सरकार का रुख देख रहे हैं कि गणतंत्र दिवस परेड के बाद भी सरकार का क्या रुख रहता है। उस रुख के आधार पर आगे आंदोलन को बढ़ाया जाएगा।
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वर्जन ::::
किसानों का इस समय पूरा ध्यान गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड पर है। इस परेड को शांतिपूर्ण तरीके से कराया जाएगा और इस तरह पहली बार ऐतिहासिक परेड होगी। जिसमें जय जवान-जय किसान का नारा सच होगा। जहां एक तरफ जवान परेड करेंगे, वहीं दूसरी ओर किसान परेड निकालेंगे। इस परेड को पूरी दुनिया देखेगी और इस परेड को देखकर सरकार को किसानों की मांग जरूर पूरी करनी पड़ेगी। उसके बाद भी सरकार का रुख ठीक नहीं लगता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। जिसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा अपनी रणनीति तय करेगा।
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-अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा।
वर्जन :::::
इस समय हम सभी की जिम्मेदारी गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराना है। इस परेड में किसी को जल्दबाजी नहीं दिखानी है और ट्रैक्टर को दौड़ाने से बचना है। इसके साथ ही शरारती तत्वों व अफवाहों से बचने की सभी से अपील कर रहे हैं। यह परेड ऐतिहासिक होगी और इसका सरकार पर पूरा दबाव है। परेड के बाद सरकार को कानून रद्द करने पर फैसला लेना होगा। उसके बाद भी कोई फैसला नहीं लिया जाता है तो आंदोलन को बढ़ाया जाएगा और यह आंदोलन कानून रद्द होने के बाद ही खत्म होगा।
- राजेंद्र आर्य दादूपुर, अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर नौजवान यूनियन।
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