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Sonipat News: गर्भ धारण के आठ सप्ताह के भीतर गर्भवती का नामांकन जरूरी
Tue, 27 May 2025 01:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 27 May 2025 01:02 AM IST
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सोनीपत। प्रत्येक गर्भवती का नामांकन गर्भावस्था के प्रथम आठ सप्ताह में आंगनबाड़ी केंद्र में सुनिश्चित किया जाए। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को जागरूक कर बेटा-बेटी एक समान की सोच को प्रोत्साहित करना है। इससे लिंगानुपात में सुधार हो सके और सामाजिक रूढि़यों व मानसिकताओं में बदलाव आए।
ये बातें उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने सोमवार को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और लिंगानुपात सुधार को लेकर माजरी, किड़ौली और आनंदपुर झरोठ गांवों की समीक्षा बैठक में कही। इन गांवों का लिंगानुपात बहुत कम है। उपायुक्त ने सरपंचों, पंचों, चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को जरूरी निर्देश दिए।
उपायुक्त ने कहा कि लिंगानुपात में कमी सामाजिक कलंक है। इसे मिटाने के लिए प्रत्येक ग्रामीण की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गिरते लिंगानुपात के मामले में राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी-पीएनडीटी) अधिनियम को लागू किया जा रहा है। हर जिले में डीएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष पुलिस सेल के गठन का प्रस्ताव है, जो फर्जी ग्राहक बनकर लिंग जांच करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश करेंगे।
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उपायुक्त ने कहा कि आशा कार्यकर्ता गांव स्तर पर लिंग जांच के मामलों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। प्रशासन उनकी पूरी सहायता करेगा। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. ज्योत्सना, पीसी पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. सुमित कौशिक, जिला परियोजना अधिकारी प्रवीण कुमारी भी उपस्थित रहीं।
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ये बातें उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने सोमवार को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और लिंगानुपात सुधार को लेकर माजरी, किड़ौली और आनंदपुर झरोठ गांवों की समीक्षा बैठक में कही। इन गांवों का लिंगानुपात बहुत कम है। उपायुक्त ने सरपंचों, पंचों, चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को जरूरी निर्देश दिए।
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उपायुक्त ने कहा कि लिंगानुपात में कमी सामाजिक कलंक है। इसे मिटाने के लिए प्रत्येक ग्रामीण की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गिरते लिंगानुपात के मामले में राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी-पीएनडीटी) अधिनियम को लागू किया जा रहा है। हर जिले में डीएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष पुलिस सेल के गठन का प्रस्ताव है, जो फर्जी ग्राहक बनकर लिंग जांच करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश करेंगे।
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उपायुक्त ने कहा कि आशा कार्यकर्ता गांव स्तर पर लिंग जांच के मामलों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। प्रशासन उनकी पूरी सहायता करेगा। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. ज्योत्सना, पीसी पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. सुमित कौशिक, जिला परियोजना अधिकारी प्रवीण कुमारी भी उपस्थित रहीं।