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Sonipat News: श्रीराम के पितृ धर्म का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
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फोटो: सोनीपत के नंदवानी नगर स्थित श्री हनुमान मंदिर में आयोजित राम कथा के दौरान उपस्थित श्रद्ध
- फोटो : Archive
सोनीपत। भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान पिता राजा दशरथ के श्राद्ध कर्म का पालन कर पितृ धर्म, श्रद्धा और कर्तव्य का संदेश दिया। श्रीराम के पितृ धर्म और पिता राजा दशरथ के श्राद्ध-पिंडदान का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
यह प्रसंग कथा वाचक ओमप्रकाश अरोड़ा ने रविवार को नंदवानी नगर स्थित श्री सेवा समिति महावीर दल के श्री हनुमान मंदिर में आयोजित रामकथा के दौरान सुनाया।
श्री राम परिवार की ओर से परूथी परिवार ने अपने माता-पिता की पुण्य स्मृति में सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन और रामकथा का आयोजन किया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लिया।
कथा वाचक ने श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकांड में वर्णित प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब भरत चित्रकूट पहुंचकर भगवान श्रीराम को राजा दशरथ के स्वर्गवास का समाचार देते हैं तो प्रभु राम अत्यंत दुखी हो जाते हैं। इसके बाद गुरु वशिष्ठ और अन्य मुनियों के निर्देश पर भगवान श्रीराम पिता का श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं।
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उन्होंने बताया कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने वन में उपलब्ध कंद-मूल और फलों से श्रद्धापूर्वक पिंडदान किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने पितृ धर्म, श्रद्धा और कर्तव्य पालन का संदेश दिया। कथा वाचक ने रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रसंग का भावार्थ भी समझाया।
कार्यक्रम में पवन सहगल, अशोक भुटानी, राकेश बहल, ललित बत्रा, महेश पांडे, सुरेंद्र, शंकर, रामनिवास, जितेंद्र, रमाकांत, मुकेश आनंद, मेहर चंद, महेश, दिनेश अरोड़ा, विजय, धीरज और भूषण समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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यह प्रसंग कथा वाचक ओमप्रकाश अरोड़ा ने रविवार को नंदवानी नगर स्थित श्री सेवा समिति महावीर दल के श्री हनुमान मंदिर में आयोजित रामकथा के दौरान सुनाया।
श्री राम परिवार की ओर से परूथी परिवार ने अपने माता-पिता की पुण्य स्मृति में सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन और रामकथा का आयोजन किया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लिया।
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कथा वाचक ने श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकांड में वर्णित प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब भरत चित्रकूट पहुंचकर भगवान श्रीराम को राजा दशरथ के स्वर्गवास का समाचार देते हैं तो प्रभु राम अत्यंत दुखी हो जाते हैं। इसके बाद गुरु वशिष्ठ और अन्य मुनियों के निर्देश पर भगवान श्रीराम पिता का श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं।
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उन्होंने बताया कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने वन में उपलब्ध कंद-मूल और फलों से श्रद्धापूर्वक पिंडदान किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने पितृ धर्म, श्रद्धा और कर्तव्य पालन का संदेश दिया। कथा वाचक ने रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रसंग का भावार्थ भी समझाया।
कार्यक्रम में पवन सहगल, अशोक भुटानी, राकेश बहल, ललित बत्रा, महेश पांडे, सुरेंद्र, शंकर, रामनिवास, जितेंद्र, रमाकांत, मुकेश आनंद, मेहर चंद, महेश, दिनेश अरोड़ा, विजय, धीरज और भूषण समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।