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तहसील में विजिलेंस का छापा
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Thu, 04 Aug 2016 12:14 AM IST
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विजिलेंस द्वारा तहसील कार्यालय से रिश्वत लेते पकड़ा गया आरोपी सीताराम उर्फ जगबीर सिंह।
- फोटो : bureau
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एक तरफ प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस की नीति का दंभ भर रही है, दूसरी तरफ लघु सचिवालय में अधिकारियों की नाक के नीचे आर्य नगर निवासी सीताराम उर्फ जगबीर सिंह तहसील के क्लर्क विकास का सहायक बुधवार को 500 रुपये रिश्वत लेते धरा गया। पुलिस ने सहायक को तो धर-दबोचा, लेकिन क्लर्क मौके से फरार हो गया। बाद में तहसीलदार जितेंद्र द्वारा डीसी को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर आरोपी क्लर्क को सस्पेंड कर दिया गया।
विजिलेंस इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि मालवीय नगर निवासी अमित ने शिकायत दी थी कि वह जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील गया। वहां, सीट पर बैठे व्यक्ति ने इसके लिए 500 रुपये रिश्वत मांगी। अमित ने इस संबंध में विजिलेंस को शिकायत कर दी और बुधवार को पहले से तय प्लान के मुताबिक अमित फिर से उसी व्यक्ति के पास गया। वहां जैसे ही अमित ने उसे 500 रुपये दिए, विजिलेंस की टीम ने सीट पर बैठे व्यक्ति को हिरासत में ले पूछताछ शुरू कर दी। इसी दौरान सीताराम नामक आरोपी ने खुलासा किया कि वह यहां क्लर्क नहीं है, बल्कि क्लर्क विकास का परिचित होने का फायदा उठा रहा था। उसी ने उसे अपनी जगह बैठा रखा था। जब तक विजिलेंस आरोपी क्लर्क को तलाश करती, वह चंपत हो चुका था।
हर कोई सीताराम को मान रहा था सरकारी कर्मचारी
विजिलेंस इंस्पेक्टर दीपक ने बताया कि लघु सचिवालय में अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछा कि वे कब से सीताराम को जानते हैं और वह कब से तहसील में आता रहा है। ज्यादातर ने बताया कि वे तो इसे सरकारी कर्मचारी मान रहे थे। विजिलेंस के मुताबिक पूछताछ में भी सीताराम ने कहा कि वह पहले भी तहसील में आता रहा है।
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अधिकारियों की नाक नीचे चल रहा था खेल
लघु सचिवालय में भूतल पर तहसील कार्यालय बनाया गया है, जहां दूसरी तरफ एसडीएम कार्यालय भी है। वहीं दूसरे फ्लोर पर डीसी और तीसरे पर एसपी का कार्यालय है। इसके बावजूद भ्रष्टाचार का इस तरह खेल चलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
डीसी ने जांच के बाद आरोपी क्लर्क को किया सस्पेंड
तहसीलदार जितेंद्र कुमार का कहना था कि वे तो 15 दिन पहले ही आए हैं। इस संबंध में डीसी और एसडीएम को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है, जिसमें क्लर्क विकास को सस्पेंड कर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। डीसी केएम पांडुरंग ने एसडीएम निशांत यादव को मामले की जांच के आदेश दिए थे। शाम को जिला उपायुक्त ने आरोपी क्लर्क को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
जांच में पता चला है कि सीताराम उर्फ जगबीर लंबे समय से लघु सचिवालय में आता रहा है। क्लर्क की सीट पर बैठकर आवेदन लेता था। किसी से 200 तो किसी से 500 रुपये मांगकर कहता, आपका काम हो जाएगा। लिखित में शिकायत मिलने पर विजिलेंस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आरोपी क्लर्क मौके से फरार है। दोनों के खिलाफ केस दर्ज भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
-दीपक कुमार, इंस्पेक्टर, विजिलेंस
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विजिलेंस इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि मालवीय नगर निवासी अमित ने शिकायत दी थी कि वह जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील गया। वहां, सीट पर बैठे व्यक्ति ने इसके लिए 500 रुपये रिश्वत मांगी। अमित ने इस संबंध में विजिलेंस को शिकायत कर दी और बुधवार को पहले से तय प्लान के मुताबिक अमित फिर से उसी व्यक्ति के पास गया। वहां जैसे ही अमित ने उसे 500 रुपये दिए, विजिलेंस की टीम ने सीट पर बैठे व्यक्ति को हिरासत में ले पूछताछ शुरू कर दी। इसी दौरान सीताराम नामक आरोपी ने खुलासा किया कि वह यहां क्लर्क नहीं है, बल्कि क्लर्क विकास का परिचित होने का फायदा उठा रहा था। उसी ने उसे अपनी जगह बैठा रखा था। जब तक विजिलेंस आरोपी क्लर्क को तलाश करती, वह चंपत हो चुका था।
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हर कोई सीताराम को मान रहा था सरकारी कर्मचारी
विजिलेंस इंस्पेक्टर दीपक ने बताया कि लघु सचिवालय में अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछा कि वे कब से सीताराम को जानते हैं और वह कब से तहसील में आता रहा है। ज्यादातर ने बताया कि वे तो इसे सरकारी कर्मचारी मान रहे थे। विजिलेंस के मुताबिक पूछताछ में भी सीताराम ने कहा कि वह पहले भी तहसील में आता रहा है।
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अधिकारियों की नाक नीचे चल रहा था खेल
लघु सचिवालय में भूतल पर तहसील कार्यालय बनाया गया है, जहां दूसरी तरफ एसडीएम कार्यालय भी है। वहीं दूसरे फ्लोर पर डीसी और तीसरे पर एसपी का कार्यालय है। इसके बावजूद भ्रष्टाचार का इस तरह खेल चलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
डीसी ने जांच के बाद आरोपी क्लर्क को किया सस्पेंड
तहसीलदार जितेंद्र कुमार का कहना था कि वे तो 15 दिन पहले ही आए हैं। इस संबंध में डीसी और एसडीएम को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है, जिसमें क्लर्क विकास को सस्पेंड कर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। डीसी केएम पांडुरंग ने एसडीएम निशांत यादव को मामले की जांच के आदेश दिए थे। शाम को जिला उपायुक्त ने आरोपी क्लर्क को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
जांच में पता चला है कि सीताराम उर्फ जगबीर लंबे समय से लघु सचिवालय में आता रहा है। क्लर्क की सीट पर बैठकर आवेदन लेता था। किसी से 200 तो किसी से 500 रुपये मांगकर कहता, आपका काम हो जाएगा। लिखित में शिकायत मिलने पर विजिलेंस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आरोपी क्लर्क मौके से फरार है। दोनों के खिलाफ केस दर्ज भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
-दीपक कुमार, इंस्पेक्टर, विजिलेंस