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रिश्वतखोर रजिस्ट्री क्लर्क को चार साल कैद
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:30 AM IST
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रिश्वतखोर रजिस्ट्री क्लर्क को चार साल कैद
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत ने रिश्वत लेने के मामले में सुनवाई करते हुए दोष साबित होने पर रिश्वतखोर रजिस्ट्री क्लर्क को चार साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना न देने पर तीन माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।
गांव सबौली निवासी संसबीर ने 26 अगस्त, 2015 को विजिलेंस को शिकायत दी थी कि राई उप तहसील का रजिस्ट्री क्लर्क रामभज उससे प्लाट की रजिस्ट्री के नाम पर 20 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। वह 122 गज के प्लाट की रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम पर करवाना चाहता था। इस पर विजिलेंस निरीक्षक राजीव सोनी ने मामले में अधिकारियों से बातचीत की थी। जिस पर मुरथल के बीडीपीओ सुरेश कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था। साथ ही निरीक्षक राजीव सोनी, एएसआइ राजेंद्र सिंह, पवन, रोहित, अनिल व सुरजीत की टीम बनाई गई थी।
जब संसबीर ने रामभज को रिश्वत के तौर पर 20 हजार रुपये थमाए तो विजिलेंस की टीम ने उसे तुरंत रंगे हाथ काबू कर लिया था। उसके कब्जे से रिश्वत की राशि को बरामद कर लिया था। विजिलेंस टीम ने आरोपी का मेडिकल परीक्षण करवाया था। मामले की सुनवाई करते हुए शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत ने रजिस्ट्री क्लर्क को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे चार साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत ने रिश्वत लेने के मामले में सुनवाई करते हुए दोष साबित होने पर रिश्वतखोर रजिस्ट्री क्लर्क को चार साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना न देने पर तीन माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।
गांव सबौली निवासी संसबीर ने 26 अगस्त, 2015 को विजिलेंस को शिकायत दी थी कि राई उप तहसील का रजिस्ट्री क्लर्क रामभज उससे प्लाट की रजिस्ट्री के नाम पर 20 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। वह 122 गज के प्लाट की रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम पर करवाना चाहता था। इस पर विजिलेंस निरीक्षक राजीव सोनी ने मामले में अधिकारियों से बातचीत की थी। जिस पर मुरथल के बीडीपीओ सुरेश कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था। साथ ही निरीक्षक राजीव सोनी, एएसआइ राजेंद्र सिंह, पवन, रोहित, अनिल व सुरजीत की टीम बनाई गई थी।
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जब संसबीर ने रामभज को रिश्वत के तौर पर 20 हजार रुपये थमाए तो विजिलेंस की टीम ने उसे तुरंत रंगे हाथ काबू कर लिया था। उसके कब्जे से रिश्वत की राशि को बरामद कर लिया था। विजिलेंस टीम ने आरोपी का मेडिकल परीक्षण करवाया था। मामले की सुनवाई करते हुए शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत ने रजिस्ट्री क्लर्क को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे चार साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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