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नाबालिग को भगाकर दुष्कर्म करने के दोषी को दस साल कैद
Updated Tue, 13 Mar 2018 01:16 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनीता ग्रोवर की अदालत ने नाबालिग को बहकाकर भगाने और बाद में जालंधर ले जाकर उससे दुष्कर्म करने के मामले में दोषी को दस वर्ष कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 27 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। जुर्माना न देेने पर छह माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।
शहर थाना में सोनीपत निवासी एक व्यक्ति ने 24 अक्तूबर 2015 को शिकायत दी थी कि उसकी 15 वर्षीय बेटी को अज्ञात ने बंधक बनाकर रख लिया है। वह 23 अक्तूबर 2015 को घर से दुकान पर सामान लेने गइ थी। उसके बाद से उसका कोई सुराग नहीं है। सिटी थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था। बाद में मामले की जांच एसआईटी को दी गई थी। एसआईटी के एएसआई बिजेंद्र की टीम ने साइबर की मदद से लड़की को जालंधर से बरामद कर लिया था। पुलिस ने मौके से अनीता नाम की महिला को भी काबू किया था। अनीता पर लड़की को भगाने में आरोपियों की मदद का आरोप था। बाद में संजय व उसके भाई राकेश को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। संजय लड़की को अपने दोस्त पानीपत के गांव बुढ़शाम निवासी सुनील के साथ शादी कराने के नाम पर लेकर गया था। आरोप था कि लड़की को बंधक बनाकर दुष्कर्म किया गया था। मामले में सेक्टर-23 चौकी में नियुक्त तत्कालीन एएसआई रमेश ने सुनील को काबू कर लिया था। आरोपियों ने लड़की को तीन माह तक बंधक बनाकर रखा था।
मामले की सुनवाई के बाद एएसजे सुनीता ग्रोवर की अदालत ने सुनील को दोषी करार दिया है। सरकारी अधिवक्ता पवन अत्री ने बताया कि दोषी को भादसं की धारा 376 में दस साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माना, धारा 363 में पांच साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 366 में पांच साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 366ए में पांच साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 506 में दो साल कैद व दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सभी सजा एक साथ चलेंगी।
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सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनीता ग्रोवर की अदालत ने नाबालिग को बहकाकर भगाने और बाद में जालंधर ले जाकर उससे दुष्कर्म करने के मामले में दोषी को दस वर्ष कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 27 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। जुर्माना न देेने पर छह माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।
शहर थाना में सोनीपत निवासी एक व्यक्ति ने 24 अक्तूबर 2015 को शिकायत दी थी कि उसकी 15 वर्षीय बेटी को अज्ञात ने बंधक बनाकर रख लिया है। वह 23 अक्तूबर 2015 को घर से दुकान पर सामान लेने गइ थी। उसके बाद से उसका कोई सुराग नहीं है। सिटी थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था। बाद में मामले की जांच एसआईटी को दी गई थी। एसआईटी के एएसआई बिजेंद्र की टीम ने साइबर की मदद से लड़की को जालंधर से बरामद कर लिया था। पुलिस ने मौके से अनीता नाम की महिला को भी काबू किया था। अनीता पर लड़की को भगाने में आरोपियों की मदद का आरोप था। बाद में संजय व उसके भाई राकेश को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। संजय लड़की को अपने दोस्त पानीपत के गांव बुढ़शाम निवासी सुनील के साथ शादी कराने के नाम पर लेकर गया था। आरोप था कि लड़की को बंधक बनाकर दुष्कर्म किया गया था। मामले में सेक्टर-23 चौकी में नियुक्त तत्कालीन एएसआई रमेश ने सुनील को काबू कर लिया था। आरोपियों ने लड़की को तीन माह तक बंधक बनाकर रखा था।
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मामले की सुनवाई के बाद एएसजे सुनीता ग्रोवर की अदालत ने सुनील को दोषी करार दिया है। सरकारी अधिवक्ता पवन अत्री ने बताया कि दोषी को भादसं की धारा 376 में दस साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माना, धारा 363 में पांच साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 366 में पांच साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 366ए में पांच साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, 506 में दो साल कैद व दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सभी सजा एक साथ चलेंगी।
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