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11 दिन में कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल ने 263 कोरोना पॉजिटिव किए ट्रेस
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कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल में शामिल कर्मियों को संबोधित करती अंडर ट्रेनी आईएएस सलोनी शर्मा
- फोटो : Sonipat
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सोनीपत। कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल कारगर भूमिका अदा कर रही है। लघु सचिवालय परिसर में सरल केंद्र में स्थापित कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल की कमान अंडर ट्रेनी आईएएस सलोनी शर्मा को सौंपी गई है, जिनके नेतृत्व में अभी तक 263 कोरोना पॉजिटिव मरीजों को ट्रेस किया जा चुका है।
लघु सचिवालय में कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल 4 जून से क्रियान्वित की गई। अब तक सेल की सहायता से 263 पॉजिटिव मरीजों को ट्रेस किया जा चुका है। साथ ही पॉजिटिव मरीजों के 794 कांटेक्ट भी ट्रेस किए गए हैं। हाल ही में पॉजिटिव मरीजों के आंकड़ों में उछाल आया है। ऐसे में कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम को भी सुदृढ़ करना जरूरी था। इसके लिए उपायुक्त ने सेल का गठन करवाया। पहले यह कार्य सिविल अस्पताल में आईडीएसपी विभाग करता था।
कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल की नोडल अधिकारी सलोनी शर्मा के नेतृत्व में डा. मनीष (आईडीएसपी विभाग के पब्लिक हेल्थ मैनेजर) को सेल का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इनके अंतर्गत 12 लोगों की समर्पित टीम कार्यरत है, जिसमें शिक्षा विभाग के कंप्यूटर कर्मचारी व शिक्षक शामिल हैं। इन्हें दो टीमों (छह-छह व्यक्ति एक टीम में) में बांटा गया है। एक टीम केस टे्रसिंग व कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए कॉलिंग का काम करती है और दूसरी टीम कंप्यूटर पर कांटेक्ट ट्रेसिंग संबंधित फॉरमेट तैयार करती है।
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हाई रिस्क व लो रिस्क संपर्कों की करते हैं सूची तैयार
नोडल अधिकारी सलोनी शर्मा ने बताया कि कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल के माध्यम से पॉजीटिव मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों की दो सूची तैयार की जाती है। एक सूची में हाई रिस्क व दूसरी सूची में लो-रिस्क मरीज शामिल किए जाते हैं। हाई रिस्क में वह लोग होते हैं जो पोजिटिव मरीज के सीधे संपर्क में आते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से परिजन व सिम्पटोमैटिक व्यक्ति होते हैं। लो-रिस्क में कार्यक्षेत्र व पड़ोस के लोग शामिल किए जाते हैं। सूची में शामिल लोगों को 14 से 28 दिन के होम क्वारंटीन की जानकारी दी जाती है। पहले 14 दिनों तक लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।
दो से तीन घंटों में 30 से 40 केस कर सकते हैं ट्रेस
सेल के प्रभारी डॉ. मनीष ने बताया कि कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल दो से तीन घंटों में 30 से 40 पॉजीटिव केस ट्रेस कर सकती हैं। इसके बाद इनके कांटेक्ट ट्रेस किए जाते हैं, जिसके लिए फोन पर सीधा संपर्क साधा जाता है। जो मरीज अपने कांटेक्ट छिपाते हैं, उनकी सीडीआर (कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड) निकलवाई जाती है। सीडीआर निकालने में पुलिस की मदद ली जाती है। इसके अलावा क्षेत्रीय स्तर पर भी जानकारी ली जाती है, जिसमें एएनएम व आशा वर्कर और एमपीएचडब्ल्यू सहायता करते हैं।
पॉजिटिव मरीजों के कांटेक्ट को भी ट्रेस करना आवश्यक
डीसी श्याम लाल पूनिया ने कहा कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए जरूरी है कि पॉजीटिव मरीजों की तुरंत प्रभाव से पहचान कर क्वारंटीन किया जाए। साथ ही पॉजीटिव मरीजों के कांटेक्ट को भी ट्रेस करना अति आवश्यक है। ऐसा करके इसके फैलाव को रोका जा सकता है। कांटेक्ट हिस्ट्री में शामिल लोगों को फोन पर ही जानकारी दी जाती है कि वह किस प्रकार से खुद को क्वारंटीन करके दूसरों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। हेल्पलाइन नंबर-1950 की भी जानकारी दी जाती है, जिस पर कॉल करके कोई भी मदद ली जा सकती है।
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लघु सचिवालय में कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल 4 जून से क्रियान्वित की गई। अब तक सेल की सहायता से 263 पॉजिटिव मरीजों को ट्रेस किया जा चुका है। साथ ही पॉजिटिव मरीजों के 794 कांटेक्ट भी ट्रेस किए गए हैं। हाल ही में पॉजिटिव मरीजों के आंकड़ों में उछाल आया है। ऐसे में कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम को भी सुदृढ़ करना जरूरी था। इसके लिए उपायुक्त ने सेल का गठन करवाया। पहले यह कार्य सिविल अस्पताल में आईडीएसपी विभाग करता था।
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कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल की नोडल अधिकारी सलोनी शर्मा के नेतृत्व में डा. मनीष (आईडीएसपी विभाग के पब्लिक हेल्थ मैनेजर) को सेल का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इनके अंतर्गत 12 लोगों की समर्पित टीम कार्यरत है, जिसमें शिक्षा विभाग के कंप्यूटर कर्मचारी व शिक्षक शामिल हैं। इन्हें दो टीमों (छह-छह व्यक्ति एक टीम में) में बांटा गया है। एक टीम केस टे्रसिंग व कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए कॉलिंग का काम करती है और दूसरी टीम कंप्यूटर पर कांटेक्ट ट्रेसिंग संबंधित फॉरमेट तैयार करती है।
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हाई रिस्क व लो रिस्क संपर्कों की करते हैं सूची तैयार
नोडल अधिकारी सलोनी शर्मा ने बताया कि कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल के माध्यम से पॉजीटिव मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों की दो सूची तैयार की जाती है। एक सूची में हाई रिस्क व दूसरी सूची में लो-रिस्क मरीज शामिल किए जाते हैं। हाई रिस्क में वह लोग होते हैं जो पोजिटिव मरीज के सीधे संपर्क में आते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से परिजन व सिम्पटोमैटिक व्यक्ति होते हैं। लो-रिस्क में कार्यक्षेत्र व पड़ोस के लोग शामिल किए जाते हैं। सूची में शामिल लोगों को 14 से 28 दिन के होम क्वारंटीन की जानकारी दी जाती है। पहले 14 दिनों तक लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।
दो से तीन घंटों में 30 से 40 केस कर सकते हैं ट्रेस
सेल के प्रभारी डॉ. मनीष ने बताया कि कांटेक्ट ट्रेसिंग सेल दो से तीन घंटों में 30 से 40 पॉजीटिव केस ट्रेस कर सकती हैं। इसके बाद इनके कांटेक्ट ट्रेस किए जाते हैं, जिसके लिए फोन पर सीधा संपर्क साधा जाता है। जो मरीज अपने कांटेक्ट छिपाते हैं, उनकी सीडीआर (कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड) निकलवाई जाती है। सीडीआर निकालने में पुलिस की मदद ली जाती है। इसके अलावा क्षेत्रीय स्तर पर भी जानकारी ली जाती है, जिसमें एएनएम व आशा वर्कर और एमपीएचडब्ल्यू सहायता करते हैं।
पॉजिटिव मरीजों के कांटेक्ट को भी ट्रेस करना आवश्यक
डीसी श्याम लाल पूनिया ने कहा कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए जरूरी है कि पॉजीटिव मरीजों की तुरंत प्रभाव से पहचान कर क्वारंटीन किया जाए। साथ ही पॉजीटिव मरीजों के कांटेक्ट को भी ट्रेस करना अति आवश्यक है। ऐसा करके इसके फैलाव को रोका जा सकता है। कांटेक्ट हिस्ट्री में शामिल लोगों को फोन पर ही जानकारी दी जाती है कि वह किस प्रकार से खुद को क्वारंटीन करके दूसरों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। हेल्पलाइन नंबर-1950 की भी जानकारी दी जाती है, जिस पर कॉल करके कोई भी मदद ली जा सकती है।