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Sonipat News: सांस अभियान...आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों की करेंगी स्क्रीनिंग
Thu, 13 Nov 2025 01:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 13 Nov 2025 01:18 AM IST
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फोटो 39: सोनीपत के नागरिक अस्पताल में सांस अभियान के शुभारंभ अवसर पर जानकारी देती उप सिविल सर्
सोनीपत। नागरिक अस्पताल में बुधवार को विश्व निमोनिया दिवस पर सांस अभियान की शुरुआत उप सिविल सर्जन डॉ. योगेश गोयल, डॉ. नीरज यादव ने किया। उन्होंने बताया कि निमोनिया के कारण होने वाली मृत्यु (01-05 वर्ष) को कम करने के उद्देश्य से सामाजिक जागरूकता और कार्रवाई (सांस) अभियान चलाया गया है। यह 28 फरवरी 2026 तक चलेगा।
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर 0 से 5 वर्ष तक बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। निमोनिया के संदिग्ध बच्चों को अस्पताल भेजा जाएगा। सभी सरकारी अस्पतालों में निमोनिया के मरीजों की विशेष देखभाल की जाएगी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अलंकृता गेरा ने बताया कि जन्म से लेकर पांच वर्ष तक बच्चों की होने वाली मृत्यु में निमोनिया मुख्य कारण है।
निमोनिया रोधक पीसीवी इंजेक्शन की पहली डोज आधा माह पर दूसरी डोज साढ़े तीन माह पर और बूस्टर डोज नौ माह पर लगाया जाता है। आशा कार्यकर्ता की ओर से घर घर जाकर पीसीवी टीकाकरण से छूटे बच्चों की सूची तैयार करके उनका टीकाकरण करवाया जाएगा।
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इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. ज्योत्सना ने जिला वासियों से अपील की गई कि वह जन्म से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों के अभिभावक सर्दी के मौसम में अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें, निर्धारित समय पर निमोनिया रोधक पीसीवी टीकाकरण करवाएं।
जिले में 0 से 5 वर्ष तक के 2 लाख ज्यादा बच्चे हैं। इनमें 16 फीसदी बच्चे प्रति वर्ष निमोनिया से संक्रमित हो जाते हैं। सांस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता व एएनएम को अगर किसी बच्चे को बुखार की शिकायत है तो उसका रिकॉर्ड रखा जाएगा और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर दवा दिलाई जाएगी। इस अवसर पर डॉ. अंजलि, डॉ. राहुल भी मौजूद रहे।
कब कितने बच्चों की हुई निमोनिया से मौत
वर्ष निमोनिया से बच्चों की मौत
2023-24 28
2024-25 15
2025-26 5
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अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर 0 से 5 वर्ष तक बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। निमोनिया के संदिग्ध बच्चों को अस्पताल भेजा जाएगा। सभी सरकारी अस्पतालों में निमोनिया के मरीजों की विशेष देखभाल की जाएगी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अलंकृता गेरा ने बताया कि जन्म से लेकर पांच वर्ष तक बच्चों की होने वाली मृत्यु में निमोनिया मुख्य कारण है।
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निमोनिया रोधक पीसीवी इंजेक्शन की पहली डोज आधा माह पर दूसरी डोज साढ़े तीन माह पर और बूस्टर डोज नौ माह पर लगाया जाता है। आशा कार्यकर्ता की ओर से घर घर जाकर पीसीवी टीकाकरण से छूटे बच्चों की सूची तैयार करके उनका टीकाकरण करवाया जाएगा।
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इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. ज्योत्सना ने जिला वासियों से अपील की गई कि वह जन्म से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों के अभिभावक सर्दी के मौसम में अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें, निर्धारित समय पर निमोनिया रोधक पीसीवी टीकाकरण करवाएं।
जिले में 0 से 5 वर्ष तक के 2 लाख ज्यादा बच्चे हैं। इनमें 16 फीसदी बच्चे प्रति वर्ष निमोनिया से संक्रमित हो जाते हैं। सांस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता व एएनएम को अगर किसी बच्चे को बुखार की शिकायत है तो उसका रिकॉर्ड रखा जाएगा और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर दवा दिलाई जाएगी। इस अवसर पर डॉ. अंजलि, डॉ. राहुल भी मौजूद रहे।
कब कितने बच्चों की हुई निमोनिया से मौत
वर्ष निमोनिया से बच्चों की मौत
2023-24 28
2024-25 15
2025-26 5