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Sonipat News: मुगल काल से आस्था का केंद्र बना बाबा नागे नाथ धाम
Fri, 23 Jan 2026 02:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 23 Jan 2026 02:08 AM IST
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फोटो 36: सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान बा
सोनीपत। मुरथल में स्थित बाबा नागे नाथ धाम नाथ संप्रदाय की प्राचीन साधना परंपरा का जीवंत प्रतीक रहा है। इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस धाम की स्थापना मुगलकाल में मानी जाती है। समय के साथ यह स्थल संत साधना, योग और जन कल्याण का प्रमुख केंद्र बन गया है।
चार दशक में बाबा नागे नाथ धाम ने विशेष पहचान बनाई है। आज यह न केवल हरियाणा बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। लगभग आठ एकड़ में फैला यह धाम साधना, सेवा और समरसता की त्रिवेणी का प्रतीक है।
धाम की आध्यात्मिक ऊर्जा और नाथ परंपरा की सादगी लोगों को आत्मिक शांति प्रदान करती है। धाम पर अब जल्द ही नेत्र अस्पताल बनाया जाएगा। इसकी पहल शुरू हो चुकी है। शिक्षा को बढ़ावा देने वाले नाथ संप्रदाय ने अब चिकित्सा सेवा की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।
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मशाण नाथ ने किशोरावस्था में चुना अध्यात्म का मार्ग
गद्दीनशीन हुए महंत बाबा मशाण नाथ महाराज ने बहुत छोटी उम्र में आध्यात्मिक जीवन की ओर कदम बढ़ा दिए थे। मुरथल गांव में ही जन्मे बाबा मशाण नाथ ने वर्ष 2007 में सातवीं कक्षा में अध्ययन के दौरान ही सांसारिक आकर्षणों से दूरी बनाते हुए अध्यात्म को जीवन का आधार बना लिया। उन्होंने बाबा कालेनाथ महाराज को अपना गुरु स्वीकार किया और बारहवीं कक्षा तक औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ समाजसेवा और साधना में स्वयं को समर्पित रखा।
नाथ परंपरा से जुड़कर साधना को मिली नई दिशा
वर्ष 2015 में बाबा मशाण नाथ महाराज विधिवत रूप से नाथ समुदाय से जुड़े और बाबा बुधनाथ महाराज के शिष्य बने। गुरु के सान्निध्य में रहते हुए उन्होंने योग, साधना, सेवा और अनुशासन की नाथ परंपरा को आत्मसात किया। इस अवधि में उन्होंने समाज को जोड़ने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और सेवा कार्यों को विस्तार देने में सक्रिय भूमिका निभाई।
गुरु परंपरा का निर्वहन, गद्दीनशीनी से मिला दायित्व
वर्ष 2023 में बाबा बुधनाथ महाराज के चोला त्यागने के बाद नाथ परंपरा के अनुसार अब बाबा मशाण नाथ महाराज को गद्दीनशीन किया गया। गद्दीनशीनी के साथ ही उन पर धाम की आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का दायित्व है। बाबा नागे नाथ धाम न केवल साधना का केंद्र है बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और संस्कारों का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यह धाम नाथ संप्रदाय की उस परंपरा का सशक्त प्रतीक है, जो युगों से समाज को दिशा देने का कार्य करती आ रही है।
नागे नाथ धाम की परंपरा व कली नाथ बाबा का प्रभाव, मुरथल के ढाबों पर केवल वैष्णव भोजन
मुरथल स्थित प्राचीन बाबा नागे नाथ धाम व कली नाथ बाबा के प्रभाव की आध्यात्मिक परंपरा का गहरा प्रभाव पूरे क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। धार्मिक आस्था और संत परंपरा के सम्मान में मुरथल के प्रसिद्ध ढाबों पर केवल वैष्णव भोजन ही परोसा जाता है। यहां मांसाहार पूरी तरह वर्जित है जिससे मुरथल देशभर में न केवल अपने स्वादिष्ट पराठों बल्कि सात्विक और शुद्ध भोजन परंपरा के लिए भी विशेष पहचान रखता है। यह परंपरा नाथ संप्रदाय की सादगी, संयम और शुद्ध जीवनशैली का जीवंत उदाहरण मानी जाती है।
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चार दशक में बाबा नागे नाथ धाम ने विशेष पहचान बनाई है। आज यह न केवल हरियाणा बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। लगभग आठ एकड़ में फैला यह धाम साधना, सेवा और समरसता की त्रिवेणी का प्रतीक है।
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धाम की आध्यात्मिक ऊर्जा और नाथ परंपरा की सादगी लोगों को आत्मिक शांति प्रदान करती है। धाम पर अब जल्द ही नेत्र अस्पताल बनाया जाएगा। इसकी पहल शुरू हो चुकी है। शिक्षा को बढ़ावा देने वाले नाथ संप्रदाय ने अब चिकित्सा सेवा की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।
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मशाण नाथ ने किशोरावस्था में चुना अध्यात्म का मार्ग
गद्दीनशीन हुए महंत बाबा मशाण नाथ महाराज ने बहुत छोटी उम्र में आध्यात्मिक जीवन की ओर कदम बढ़ा दिए थे। मुरथल गांव में ही जन्मे बाबा मशाण नाथ ने वर्ष 2007 में सातवीं कक्षा में अध्ययन के दौरान ही सांसारिक आकर्षणों से दूरी बनाते हुए अध्यात्म को जीवन का आधार बना लिया। उन्होंने बाबा कालेनाथ महाराज को अपना गुरु स्वीकार किया और बारहवीं कक्षा तक औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ समाजसेवा और साधना में स्वयं को समर्पित रखा।
नाथ परंपरा से जुड़कर साधना को मिली नई दिशा
वर्ष 2015 में बाबा मशाण नाथ महाराज विधिवत रूप से नाथ समुदाय से जुड़े और बाबा बुधनाथ महाराज के शिष्य बने। गुरु के सान्निध्य में रहते हुए उन्होंने योग, साधना, सेवा और अनुशासन की नाथ परंपरा को आत्मसात किया। इस अवधि में उन्होंने समाज को जोड़ने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और सेवा कार्यों को विस्तार देने में सक्रिय भूमिका निभाई।
गुरु परंपरा का निर्वहन, गद्दीनशीनी से मिला दायित्व
वर्ष 2023 में बाबा बुधनाथ महाराज के चोला त्यागने के बाद नाथ परंपरा के अनुसार अब बाबा मशाण नाथ महाराज को गद्दीनशीन किया गया। गद्दीनशीनी के साथ ही उन पर धाम की आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का दायित्व है। बाबा नागे नाथ धाम न केवल साधना का केंद्र है बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और संस्कारों का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यह धाम नाथ संप्रदाय की उस परंपरा का सशक्त प्रतीक है, जो युगों से समाज को दिशा देने का कार्य करती आ रही है।
नागे नाथ धाम की परंपरा व कली नाथ बाबा का प्रभाव, मुरथल के ढाबों पर केवल वैष्णव भोजन
मुरथल स्थित प्राचीन बाबा नागे नाथ धाम व कली नाथ बाबा के प्रभाव की आध्यात्मिक परंपरा का गहरा प्रभाव पूरे क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। धार्मिक आस्था और संत परंपरा के सम्मान में मुरथल के प्रसिद्ध ढाबों पर केवल वैष्णव भोजन ही परोसा जाता है। यहां मांसाहार पूरी तरह वर्जित है जिससे मुरथल देशभर में न केवल अपने स्वादिष्ट पराठों बल्कि सात्विक और शुद्ध भोजन परंपरा के लिए भी विशेष पहचान रखता है। यह परंपरा नाथ संप्रदाय की सादगी, संयम और शुद्ध जीवनशैली का जीवंत उदाहरण मानी जाती है।

फोटो 36: सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान बा

फोटो 36: सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान बा

फोटो 36: सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान बा

फोटो 36: सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान बा