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Sonipat News: आरोप... छात्रों को लेना पड़ रहा न्यायालय का सहारा
Sat, 12 Apr 2025 12:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 12 Apr 2025 12:51 AM IST
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फोटो 29- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बनाय
सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ डीक्रूटा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में अव्यवस्था का दौर जारी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन लालफीताशाही कर रहा है, जिसकी वजह से विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए ठोकर खानी पड़ रही हैं। छात्र पिछले 5 माह से पीएचडी में एडमिशन के लिए प्रशासन के रवैये से तंग होकर अब न्यायालय में जाने के लिए मजबूर हैं। उन्हें मजबूरन न्यायालय जाना पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की सुध न लेकर विधानसभा में पास यूनिवर्सिटी एक्ट के नियमों की अवहेलना करने पर लगा है। इसके लिए डीक्रूटा ने कई बार राज्यपाल व सरकार से जांच की मांग की है। डीक्रूटा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि करीब 5 माह से मानविकी विभाग में छात्रा ने पीएचडी में एडमिशन के लिए एप्लीकेशन दे रखी थी।
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पीएचडी में एडमिशन डिपार्टमेंट रिसर्च कमेटी में प्रस्तुति देने के बाद होना था। विवि प्रशासन ने डीआरसी को लेकर टालमटोल जारी रखी, इसके कारण छात्रा को मिलने वाले वजीफे पर संकट के बादल छा गए। मजबूरन छात्रा को न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने छात्रा के पीएचडी एडमिशन की प्रक्रिया शुरू की।
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विश्वविद्यालय प्रशासन लालफीताशाही कर रहा है, जिसकी वजह से विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए ठोकर खानी पड़ रही हैं। छात्र पिछले 5 माह से पीएचडी में एडमिशन के लिए प्रशासन के रवैये से तंग होकर अब न्यायालय में जाने के लिए मजबूर हैं। उन्हें मजबूरन न्यायालय जाना पड़ रहा है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की सुध न लेकर विधानसभा में पास यूनिवर्सिटी एक्ट के नियमों की अवहेलना करने पर लगा है। इसके लिए डीक्रूटा ने कई बार राज्यपाल व सरकार से जांच की मांग की है। डीक्रूटा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि करीब 5 माह से मानविकी विभाग में छात्रा ने पीएचडी में एडमिशन के लिए एप्लीकेशन दे रखी थी।
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पीएचडी में एडमिशन डिपार्टमेंट रिसर्च कमेटी में प्रस्तुति देने के बाद होना था। विवि प्रशासन ने डीआरसी को लेकर टालमटोल जारी रखी, इसके कारण छात्रा को मिलने वाले वजीफे पर संकट के बादल छा गए। मजबूरन छात्रा को न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने छात्रा के पीएचडी एडमिशन की प्रक्रिया शुरू की।