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Sonipat News: एनईपी पर सरकार के आदेशों की अवहेलना का आरोप, सौंपा ज्ञापन
Mon, 13 Jan 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 13 Jan 2025 12:06 AM IST
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फोटो 34. सोनीपत के मुरथल विश्वविद्यालय में कैबिनेट मंत्री डाॅ. अरविंद शर्मा को ज्ञापन सौंपते डी
- फोटो : संवाद
सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल की टीचिंग एसोसिएशन (डीक्रूटा) ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति (एनईपी) पर सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। स्कीम और पाठ्यक्रम संशोधन में यूनिवर्सिटी एक्ट की अवहेलना की जा रही है। जिससे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जारी है।
डीक्रूटा के प्रधान डाॅ. अजय कुमार ने बताया कि पहले सेमेस्टर की परीक्षा की तिथि जारी कर दी गई है, जबकि बच्चों के पाठ्यक्रम दिन-रात बदले जा रहे हैं। जिससे छात्र अपनी पढ़ाई व परीक्षा को लेकर चिंतित हैं। डीक्रूटा ने विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था व अन्य अनियमितताओं को लेकर कैबिनेट मंत्री डाॅ. अरविंद शर्मा को ज्ञापन सौंपा। साथ ही गुहार लगाई कि प्रशासन की ओर से विश्वविद्यालय में की जा रही अनियमितताओं पर रोक लगाई जाए। डाॅ. अजय कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति में सबसे पहला काम तीन वर्षीय कोर्सों को चार वर्षीय कोर्सों में करने का था, लेकिन प्रदेश में मुरथल विश्वविद्यालय इकलौता विश्वविद्यालय है जो तीन वर्षीय कोर्स जारी किए हुए है। सरकार के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। नई शिक्षा नीति के नाम पर विश्वविद्यालय प्रशासन लीपापोती में लगा हुआ है।
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डीक्रूटा के प्रधान डाॅ. अजय कुमार ने बताया कि पहले सेमेस्टर की परीक्षा की तिथि जारी कर दी गई है, जबकि बच्चों के पाठ्यक्रम दिन-रात बदले जा रहे हैं। जिससे छात्र अपनी पढ़ाई व परीक्षा को लेकर चिंतित हैं। डीक्रूटा ने विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था व अन्य अनियमितताओं को लेकर कैबिनेट मंत्री डाॅ. अरविंद शर्मा को ज्ञापन सौंपा। साथ ही गुहार लगाई कि प्रशासन की ओर से विश्वविद्यालय में की जा रही अनियमितताओं पर रोक लगाई जाए। डाॅ. अजय कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति में सबसे पहला काम तीन वर्षीय कोर्सों को चार वर्षीय कोर्सों में करने का था, लेकिन प्रदेश में मुरथल विश्वविद्यालय इकलौता विश्वविद्यालय है जो तीन वर्षीय कोर्स जारी किए हुए है। सरकार के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। नई शिक्षा नीति के नाम पर विश्वविद्यालय प्रशासन लीपापोती में लगा हुआ है।
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