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Sonipat News: हत्या की कोशिश व धमकी के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज
Sat, 02 May 2026 02:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 02 May 2026 02:51 AM IST
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सोनीपत। हत्या की कोशिश व जान से मारने की धमकी के एक मामले में एएसजे नरेंद्र सिंह ने आरोपी प्रवीण की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया है। मामला 13 अप्रैल को बरोदा थाने में दर्ज हुआ था।
गांव रिंढ़ाणा निवासी अजमेर ने आरोप लगाया कि 12 अप्रैल को जब वह अपनी किराना की दुकान पर थे तब गांव का ही प्रवीण सामान खरीदने आया था। जब शिकायतकर्ता ने उससे पुराने बकाया पैसे मांगे तो प्रवीण ने गुस्सा होकर गाली-गलौज शुरू कर दी थी।
उसने दुकान में घुसकर सामान फैला दिया था और पास रखी लोहे की रॉड से शिकायतकर्ता के सिर पर वार किया था। भागते समय उसने शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे गलत तरीके से फंसाया गया है।
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बताया कि चोट केवल एक ही थी और शिकायतकर्ता को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। चिकित्सक की कोई अंतिम राय अभी तक नहीं ली गई है। वह जांच में शामिल होने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपी का नाम एफआईआर में दर्ज है। अपराध में इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड बरामद करना अभी बाकी है। आरोपी का बरोदा थाने में पुराना आपराधिक इतिहास है उससे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि अग्रिम जमानत मिलने पर अभियुक्त से पूछताछ केवल औपचारिकता रह जाती है। मामले की तह तक जाने के लिए हिरासत में पूछताछ अधिक प्रभावी होती है। चोट सिर पर मारी गई थी और जांच अभी शुरुआती चरण में है इसलिए केवल एक चोट या जल्द छुट्टी मिलना अग्रिम जमानत का आधार नहीं हो सकता।
आरोपी के खिलाफ पहले से भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
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गांव रिंढ़ाणा निवासी अजमेर ने आरोप लगाया कि 12 अप्रैल को जब वह अपनी किराना की दुकान पर थे तब गांव का ही प्रवीण सामान खरीदने आया था। जब शिकायतकर्ता ने उससे पुराने बकाया पैसे मांगे तो प्रवीण ने गुस्सा होकर गाली-गलौज शुरू कर दी थी।
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उसने दुकान में घुसकर सामान फैला दिया था और पास रखी लोहे की रॉड से शिकायतकर्ता के सिर पर वार किया था। भागते समय उसने शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे गलत तरीके से फंसाया गया है।
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बताया कि चोट केवल एक ही थी और शिकायतकर्ता को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। चिकित्सक की कोई अंतिम राय अभी तक नहीं ली गई है। वह जांच में शामिल होने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपी का नाम एफआईआर में दर्ज है। अपराध में इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड बरामद करना अभी बाकी है। आरोपी का बरोदा थाने में पुराना आपराधिक इतिहास है उससे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि अग्रिम जमानत मिलने पर अभियुक्त से पूछताछ केवल औपचारिकता रह जाती है। मामले की तह तक जाने के लिए हिरासत में पूछताछ अधिक प्रभावी होती है। चोट सिर पर मारी गई थी और जांच अभी शुरुआती चरण में है इसलिए केवल एक चोट या जल्द छुट्टी मिलना अग्रिम जमानत का आधार नहीं हो सकता।
आरोपी के खिलाफ पहले से भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।