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Sonipat News: एक दिन पहले बहन बांधी थी राखी, अगले दिन यमुना ने छीन लिए दोनों भाई
Sat, 29 Aug 2026 09:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 29 Aug 2026 09:19 PM IST
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बेगा घाट पर नाव से सत्यम व शिवम को तलाशत करती एनडीआरएफ। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
गन्नौर। रक्षाबंधन के अगले ही दिन यमुना नदी ने सनपेड़ा निवासी सिमरन से दोनों भाई छीन लिए। बेगा घाट पर नहाने गए सत्यम (15) और शिवम (17) नदी के तेज बहाव में बह गए। इस दुखद घटना से परिवार में मातम छा गया है। सिमरन अपने भाइयों को याद कर बार-बार बेसुध हो जा रही है। एनडीआरएफ के गोताखोरों ने देर शाम तक दोनों भाइयों की तलाश की लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।
एक दिन पहले ही सिमरन ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। उसने ईश्वर से उनकी खुशहाली की मन्नत मांगी थी और भाइयों ने उसकी रक्षा का वचन दिया था। त्योहार की खुशियां अगले ही दिन दुख में बदल गईं, जिससे परिवार सदमे में है। पिता रविंद्र ने बताया कि शनिवार को स्कूल की छुट्टी होने के कारण तीनों बच्चे घर पर थे।
दोनों बेटे बाइक सीखने की बात कहकर सुबह घर से निकले थे। काफी देर तक वापस न लौटने पर रविंद्र ने फोन किया, जिसे किसी अन्य व्यक्ति ने उठाया। उस व्यक्ति ने बताया कि उनके बच्चे यमुना नदी में बह गए हैं, जिससे परिवार स्तब्ध रह गया। तत्काल यमुना घाट पर पहुंचकर परिवार ने बेटों की तलाश शुरू की। शिवम 11वीं कक्षा में था, सत्यम 10वीं में और सिमरन 8वीं की छात्रा है।
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एनडीआरएफ के गोताखोरों ने नदी में घंटों तक दोनों भाइयों की तलाश की। बताया जा रहा है कि सत्यम और शिवम कपड़ों समेत ही नदी में उतरे थे। देर शाम तक भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी तलाश अभियान में सहयोग कर रहा है। परिवार और ग्रामीण अभी भी उनके सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
इंसेट
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पिता रविंद्र ने बताया कि शिवम घर के कामकाज में हाथ बंटाने लगा था। उन्हें उम्मीद थी कि उनके बेटे अब परिवार का सहारा बनेंगे। रक्षाबंधन के अगले दिन हुए इस हादसे ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दीं। रविंद्र की पत्नी पिछले 11 वर्ष से बीमार हैं। पिता के काम पर जाने के बाद बच्चे ही खाना बनाते थे और मां की देखभाल करते थे। दोनों भाइयों के अचानक चले जाने से पूरा परिवार टूट गया है।
इंसेट
बेगा घाट पर सुविधाओं का अभाव
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बेगा घाट पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। यह घाट पूरी तरह कच्चा है और यहां किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने प्रशासन की अनदेखी को इन हादसों का कारण बताया। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से घाट पक्का कराने की गुहार लगाई है। हालांकि, उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है और कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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गन्नौर। रक्षाबंधन के अगले ही दिन यमुना नदी ने सनपेड़ा निवासी सिमरन से दोनों भाई छीन लिए। बेगा घाट पर नहाने गए सत्यम (15) और शिवम (17) नदी के तेज बहाव में बह गए। इस दुखद घटना से परिवार में मातम छा गया है। सिमरन अपने भाइयों को याद कर बार-बार बेसुध हो जा रही है। एनडीआरएफ के गोताखोरों ने देर शाम तक दोनों भाइयों की तलाश की लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।
एक दिन पहले ही सिमरन ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। उसने ईश्वर से उनकी खुशहाली की मन्नत मांगी थी और भाइयों ने उसकी रक्षा का वचन दिया था। त्योहार की खुशियां अगले ही दिन दुख में बदल गईं, जिससे परिवार सदमे में है। पिता रविंद्र ने बताया कि शनिवार को स्कूल की छुट्टी होने के कारण तीनों बच्चे घर पर थे।
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दोनों बेटे बाइक सीखने की बात कहकर सुबह घर से निकले थे। काफी देर तक वापस न लौटने पर रविंद्र ने फोन किया, जिसे किसी अन्य व्यक्ति ने उठाया। उस व्यक्ति ने बताया कि उनके बच्चे यमुना नदी में बह गए हैं, जिससे परिवार स्तब्ध रह गया। तत्काल यमुना घाट पर पहुंचकर परिवार ने बेटों की तलाश शुरू की। शिवम 11वीं कक्षा में था, सत्यम 10वीं में और सिमरन 8वीं की छात्रा है।
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एनडीआरएफ के गोताखोरों ने नदी में घंटों तक दोनों भाइयों की तलाश की। बताया जा रहा है कि सत्यम और शिवम कपड़ों समेत ही नदी में उतरे थे। देर शाम तक भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी तलाश अभियान में सहयोग कर रहा है। परिवार और ग्रामीण अभी भी उनके सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पिता रविंद्र ने बताया कि शिवम घर के कामकाज में हाथ बंटाने लगा था। उन्हें उम्मीद थी कि उनके बेटे अब परिवार का सहारा बनेंगे। रक्षाबंधन के अगले दिन हुए इस हादसे ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दीं। रविंद्र की पत्नी पिछले 11 वर्ष से बीमार हैं। पिता के काम पर जाने के बाद बच्चे ही खाना बनाते थे और मां की देखभाल करते थे। दोनों भाइयों के अचानक चले जाने से पूरा परिवार टूट गया है।
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बेगा घाट पर सुविधाओं का अभाव
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बेगा घाट पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। यह घाट पूरी तरह कच्चा है और यहां किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने प्रशासन की अनदेखी को इन हादसों का कारण बताया। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से घाट पक्का कराने की गुहार लगाई है। हालांकि, उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है और कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

बेगा घाट पर नाव से सत्यम व शिवम को तलाशत करती एनडीआरएफ। संवाद

बेगा घाट पर नाव से सत्यम व शिवम को तलाशत करती एनडीआरएफ। संवाद