{"_id":"5a52775e4f1c1b32198b58a4","slug":"91515353950-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश को सोने के तमगे दिलाने को पहलवान बेटियों ने त्यागा मोबाइल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देश को सोने के तमगे दिलाने को पहलवान बेटियों ने त्यागा मोबाइल
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंकित चौहान
सोनीपत। कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को सोने का तमगा दिलाने की चाहत में पहलवान बेटियों ने खुद को मोबाइल फोन से दूर कर लिया है। इस तरह प्रैक्टिस और सोने के तमगे पर फोकस करने के लिए पहलवानों ने खुद को देश और दुनिया से काट लिया है। पहलवान बेटियों ने केवल मोबाइल फोन ही नहीं छोड़ा है, बल्कि वह 24 में से 12 घंटे तक प्रैक्टिस कर रही हैं। महिला पहलवानों ने ठान लिया है कि इस बार कॉमनवेल्थ में सभी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाएंगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाली सबसे ज्यादा पहलवान हरियाणा से ताल्लुक से रखती है। जिनमें ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक के अलावा दंगल गर्ल बबीता फौगाट, ओलंपियन विनेश फौगाट, पूजा ढांडा, किरण है तो एक पहलवान दिल्ली की दिव्या काकरान है। इन सभी महिला पहलवानों ने ठान लिया है कि वह इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में सभी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाएंगी। क्योंकि यह सभी पिछले काफी समय से बेहतर लय में चल रही है और इनको उम्मीद है कि यह लय कॉमनवेल्थ गेम्स में भी बरकरार रहेगी। यही कारण है कि उनकी प्रैक्टिस भी 8-12 घंटे हो गई है। इसके साथ ही महिला पहलवानों ने फैसला लिया है कि वह प्रैक्टिस के दौरान अपने साथ मोबाइल नहीं रखेगी, क्योंकि मोबाइल से उनका ध्यान भटकता है। अगर उनको अपने घर बात करने की जरूरत पड़ती है तो वह साई सेंटर के फोन का इस्तेमाल कर रही है। महिला पहलवानों की इस कड़ी मेहनत को देखते हुए उम्मीद है कि इस बार कॉमनवेल्थ में देश को कई गोल्ड मेडल मिल सकते हैं।
दिव्या ने पिता को दिया मोबाइल
कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई कर चुकी पहलवान दिव्या काकरान का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से सबसे बेहतरीन चल रहा है। इस प्रदर्शन को वह किसी भी तरह से कमजोर नहीं पडने देना चाहती है। यही कारण है कि दिव्या ने अपना मोबाइल भी घर रख दिया है। उसके पिता के पास ही दिव्या का मोबाइल रहता है और दिव्या से बात करने के लिए कोच या साई सेंटर का नंबर ही मिलाना पड़ता है। वहीं किरण ने अपना मोबाइल बंद कर दिया है, क्योंकि उसके लिए कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल जीतना एक बड़ा सपना है और यह सपना पूरा करने के लिए वह खूब पसीना बहा रही है।
विज्ञापन
प्रैक्टिस के दौरान मोबाइल रखने से खेल प्रभावित होता है और उसका सीधा असर कुश्ती पर पड़ता है। ऐसा होने पर पहलवानों का खेल बिगडने के साथ ही देश के लिए मेडल जीतने की उम्मीदों को झटका लग सकता है। इसलिए महिला पहलवान प्रैक्टिस के दौरान मोबाइल नहीं रखती है और यह सभी के लिए अच्छा फैसला है, जिसको आगे भी जारी रखा जाएगा।
- कुलदीप मलिक, चीफ कोच भारतीय महिला कुश्ती
विज्ञापन
सोनीपत। कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को सोने का तमगा दिलाने की चाहत में पहलवान बेटियों ने खुद को मोबाइल फोन से दूर कर लिया है। इस तरह प्रैक्टिस और सोने के तमगे पर फोकस करने के लिए पहलवानों ने खुद को देश और दुनिया से काट लिया है। पहलवान बेटियों ने केवल मोबाइल फोन ही नहीं छोड़ा है, बल्कि वह 24 में से 12 घंटे तक प्रैक्टिस कर रही हैं। महिला पहलवानों ने ठान लिया है कि इस बार कॉमनवेल्थ में सभी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाएंगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाली सबसे ज्यादा पहलवान हरियाणा से ताल्लुक से रखती है। जिनमें ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक के अलावा दंगल गर्ल बबीता फौगाट, ओलंपियन विनेश फौगाट, पूजा ढांडा, किरण है तो एक पहलवान दिल्ली की दिव्या काकरान है। इन सभी महिला पहलवानों ने ठान लिया है कि वह इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में सभी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाएंगी। क्योंकि यह सभी पिछले काफी समय से बेहतर लय में चल रही है और इनको उम्मीद है कि यह लय कॉमनवेल्थ गेम्स में भी बरकरार रहेगी। यही कारण है कि उनकी प्रैक्टिस भी 8-12 घंटे हो गई है। इसके साथ ही महिला पहलवानों ने फैसला लिया है कि वह प्रैक्टिस के दौरान अपने साथ मोबाइल नहीं रखेगी, क्योंकि मोबाइल से उनका ध्यान भटकता है। अगर उनको अपने घर बात करने की जरूरत पड़ती है तो वह साई सेंटर के फोन का इस्तेमाल कर रही है। महिला पहलवानों की इस कड़ी मेहनत को देखते हुए उम्मीद है कि इस बार कॉमनवेल्थ में देश को कई गोल्ड मेडल मिल सकते हैं।
विज्ञापन
दिव्या ने पिता को दिया मोबाइल
कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई कर चुकी पहलवान दिव्या काकरान का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से सबसे बेहतरीन चल रहा है। इस प्रदर्शन को वह किसी भी तरह से कमजोर नहीं पडने देना चाहती है। यही कारण है कि दिव्या ने अपना मोबाइल भी घर रख दिया है। उसके पिता के पास ही दिव्या का मोबाइल रहता है और दिव्या से बात करने के लिए कोच या साई सेंटर का नंबर ही मिलाना पड़ता है। वहीं किरण ने अपना मोबाइल बंद कर दिया है, क्योंकि उसके लिए कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल जीतना एक बड़ा सपना है और यह सपना पूरा करने के लिए वह खूब पसीना बहा रही है।
विज्ञापन
प्रैक्टिस के दौरान मोबाइल रखने से खेल प्रभावित होता है और उसका सीधा असर कुश्ती पर पड़ता है। ऐसा होने पर पहलवानों का खेल बिगडने के साथ ही देश के लिए मेडल जीतने की उम्मीदों को झटका लग सकता है। इसलिए महिला पहलवान प्रैक्टिस के दौरान मोबाइल नहीं रखती है और यह सभी के लिए अच्छा फैसला है, जिसको आगे भी जारी रखा जाएगा।
- कुलदीप मलिक, चीफ कोच भारतीय महिला कुश्ती