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नशे की लत से लग रहा एड्स का रोग
Updated Fri, 01 Dec 2017 01:53 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
एड्स जैसी गंभीर बीमारी को लेकर लोगों में लगातार जागरूकता बढ़ रही है और यही कारण है कि एड्स रोगियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। जहां चार साल पहले 212 एड्स रोगी सामने आए थे, वहीं अब यह संख्या काफी घटकर 75 पर पहुंच गई है। यह जरूर है कि जब इनकी काउंसलिंग की काउंसलिंग की गई तो काउंसलरों के सामने चौंकाने वाली बातें सामने आईं। इन रोगियों में सबसे ज्यादा वह मिले, जिनको नशे की लत थी और वह इंजेक्शन लगाकर नशा करते थे। एक साथ बैठकर नशा करने के लिए एक ही सीरिंज को कई लोगों के इस्तेमाल करने के कारण उनका एचआईवी पॉजीटिव हो गया। यह बात सामने आने के बाद अपने जागरूकता कार्यक्रमों में एड्स कंट्रोल सोसायटी अब इसके लिए भी लोगों को जागरूक करती है, जिससे एचआईवी पॉजीटिव होने से बचाया जा सके। इनके अलावा घरों से कई महीने दूर रहकर ट्रक चलाने वाले भी एड्स की चपेट में आ रहे हैं।
एड्स जैसी गंभीर बीमारी के रोगी बढने पर इसको लेकर जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाए गए तो इसपर सेमिनार व अन्य कार्यक्रम किए गए। उनका असर अब देखने को मिलने लगा है और जिले में एड्स रोगियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। जहां 2013 में एड्स रोगियों की संख्या 168 थी, वहीं यह 2014 में बढ़कर 212 हो गई। इस साल रोगियों में बड़ी बढ़ोतरी हुई, लेकिन उसके बाद यह कम होती चली गई। वर्ष 2015 में जिले में 204 एड्स रोगी सामने आए तो 2016 में केवल 153 रोगी मिले। वहीं वर्ष 2017 में केवल 75 रोगी एड्स के मिले हैं। यह जरूर है कि जिन लोगों का एचआईवी पॉजीटिव मिला है, उनमें से काफी को जिस तरह से यह बीमारी लगी है उसने एड्स कंट्रोल सोसायटी के कर्मियों तक को चौंका दिया है। इंजेक्शन लगाकर नशा करने वाले भी एड्स की चपेट में आ गए है, क्योंकि ऐसे कई लोग मिलकर एक ही सीरिंज व सुई के सहारे नशा करते हैं। इसको लेकर ही अब जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
इस तरह हो सकता है एचआईवी पॉजीटिव
-असुरक्षित यौन संबंध बनाने
-बिना जांच के खून चढ़ाने
-सीरिंज की सुई का कई बार इस्तेमाल करने
-दाढ़ी बनवाते समय इस्तेमाल ब्लेड का दोबारा इस्तेमाल करने
यह हैं लक्षण
-वजन का काफी कम हो जाना
-लगातार खांसी बने रहना
-बार-बार जुकाम का होना
-बुखार
-सिरदर्द
-थकान
-शरीर पर निशान बनना
-भूख न लगना आदि
इस तरह होता है उपचार
सरकार ने एचआईवी की जांच के लिए एफआईसीटीसी सेंटर बनाए हुए हैं और जिले में इस समय 10 सेंटर चल रहे हैं। इनमें सबसे पहले जाने वाले संभावित रोगी के टेस्ट कराए जाते हैं। वह संदिग्ध लगता है तो उसे एसीटीसीआई में भेज दिया जाता है। जिले में इस समय 5 एसीटीसीआई सेंटर चल रहे है, जहां दोबारा जांच की जाती है और एचआईवी पॉजीटिव मिलने पर काउंसिलिंग की जाती है। ऐसे रोगियों को लिंक एआरटी के सहारे दवाइयां उपलब्ध कराई जाती है और उनको लगातार दवाइयां खानी पड़ती हैं।
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एड्स को लेकर जागरूकता नहीं होने के कारण पहले लगातार रोगियों की संख्या बढ़ती जाती थी, लेकिन अब पिछले कई सालों से संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है और लोग जागरूक हो रहे है। लोगों को बताया जाता है कि किस तरह से यह बीमारी फैलती है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।
डॉ. तरुण यादव, नोडल ऑफिसर एड्स कंट्रोल सोसायटी
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सोनीपत।
एड्स जैसी गंभीर बीमारी को लेकर लोगों में लगातार जागरूकता बढ़ रही है और यही कारण है कि एड्स रोगियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। जहां चार साल पहले 212 एड्स रोगी सामने आए थे, वहीं अब यह संख्या काफी घटकर 75 पर पहुंच गई है। यह जरूर है कि जब इनकी काउंसलिंग की काउंसलिंग की गई तो काउंसलरों के सामने चौंकाने वाली बातें सामने आईं। इन रोगियों में सबसे ज्यादा वह मिले, जिनको नशे की लत थी और वह इंजेक्शन लगाकर नशा करते थे। एक साथ बैठकर नशा करने के लिए एक ही सीरिंज को कई लोगों के इस्तेमाल करने के कारण उनका एचआईवी पॉजीटिव हो गया। यह बात सामने आने के बाद अपने जागरूकता कार्यक्रमों में एड्स कंट्रोल सोसायटी अब इसके लिए भी लोगों को जागरूक करती है, जिससे एचआईवी पॉजीटिव होने से बचाया जा सके। इनके अलावा घरों से कई महीने दूर रहकर ट्रक चलाने वाले भी एड्स की चपेट में आ रहे हैं।
एड्स जैसी गंभीर बीमारी के रोगी बढने पर इसको लेकर जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाए गए तो इसपर सेमिनार व अन्य कार्यक्रम किए गए। उनका असर अब देखने को मिलने लगा है और जिले में एड्स रोगियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। जहां 2013 में एड्स रोगियों की संख्या 168 थी, वहीं यह 2014 में बढ़कर 212 हो गई। इस साल रोगियों में बड़ी बढ़ोतरी हुई, लेकिन उसके बाद यह कम होती चली गई। वर्ष 2015 में जिले में 204 एड्स रोगी सामने आए तो 2016 में केवल 153 रोगी मिले। वहीं वर्ष 2017 में केवल 75 रोगी एड्स के मिले हैं। यह जरूर है कि जिन लोगों का एचआईवी पॉजीटिव मिला है, उनमें से काफी को जिस तरह से यह बीमारी लगी है उसने एड्स कंट्रोल सोसायटी के कर्मियों तक को चौंका दिया है। इंजेक्शन लगाकर नशा करने वाले भी एड्स की चपेट में आ गए है, क्योंकि ऐसे कई लोग मिलकर एक ही सीरिंज व सुई के सहारे नशा करते हैं। इसको लेकर ही अब जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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इस तरह हो सकता है एचआईवी पॉजीटिव
-असुरक्षित यौन संबंध बनाने
-बिना जांच के खून चढ़ाने
-सीरिंज की सुई का कई बार इस्तेमाल करने
-दाढ़ी बनवाते समय इस्तेमाल ब्लेड का दोबारा इस्तेमाल करने
यह हैं लक्षण
-वजन का काफी कम हो जाना
-लगातार खांसी बने रहना
-बार-बार जुकाम का होना
-बुखार
-सिरदर्द
-थकान
-शरीर पर निशान बनना
-भूख न लगना आदि
इस तरह होता है उपचार
सरकार ने एचआईवी की जांच के लिए एफआईसीटीसी सेंटर बनाए हुए हैं और जिले में इस समय 10 सेंटर चल रहे हैं। इनमें सबसे पहले जाने वाले संभावित रोगी के टेस्ट कराए जाते हैं। वह संदिग्ध लगता है तो उसे एसीटीसीआई में भेज दिया जाता है। जिले में इस समय 5 एसीटीसीआई सेंटर चल रहे है, जहां दोबारा जांच की जाती है और एचआईवी पॉजीटिव मिलने पर काउंसिलिंग की जाती है। ऐसे रोगियों को लिंक एआरटी के सहारे दवाइयां उपलब्ध कराई जाती है और उनको लगातार दवाइयां खानी पड़ती हैं।
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एड्स को लेकर जागरूकता नहीं होने के कारण पहले लगातार रोगियों की संख्या बढ़ती जाती थी, लेकिन अब पिछले कई सालों से संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है और लोग जागरूक हो रहे है। लोगों को बताया जाता है कि किस तरह से यह बीमारी फैलती है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।
डॉ. तरुण यादव, नोडल ऑफिसर एड्स कंट्रोल सोसायटी