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रोडवेज की अब तक की सबसे लंबी हड़ताल, 1979 में 11 दिन बाद हुई थी खत्म

Sun, 28 Oct 2018 12:05 AM IST
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:05 AM IST
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रोडवेज की अब तक की सबसे लंबी हड़ताल, 1979 में 11 दिन बाद हुई थी खत्म
अशोक शर्मा
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गोहाना। रोडवेज कर्मियों की शनिवार के दिन भी हड़ताल रही तो यह प्रदेश की अब तक की सबसे लंबी हड़ताल बन गई। इस तरह सीएम मनोहर लाल के कार्यकाल में 39 साल पुराना 11 दिन तक चली हड़ताल का रिकार्ड टूट गया है और अब हड़ताल का नया रिकार्ड बनना शुरू हो गया है। क्योंकि इससे पहले 1979 में भजन लाल की सरकार में सबसे ज्यादा 11 दिन हड़ताल चली थी और उस समय सीएम रहे भजनलाल ने रोडवेज कर्मियों की मांगों को मान लिया था। अब भाजपा सरकार में यह हड़ताल कितने ओर दिन चलेगी, यह आगे ही पता चल सकेगा।
प्रदेश सरकार किलोमीटर स्कीम के हिसाब से 720 निजी बसों को परमिट जारी कर चुकी है। जिसके विरोध में प्रदेशभर के रोडवेज कर्मचारी 12 दिट से हड़ताल कर रहे है। वहीं सीएम मनोहर लाल व उच्च अधिकारी कर्मचारियों की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इस तरह रोडवेज की हड़ताल लंबी खिंचती जा रही है, लेकिन इससे पहले हुई रोडवेज की हड़ताल की बात करें तो वर्ष 1979 में अभी तक की 11 दिन की सबसे लंबी हड़ताल हुई थी। उस समय प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार थी और उस समय मुख्यमंत्री भजन लाल थे। वर्ष 1979 में विभागीय मुद्दों को लेकर रोडवेज कर्मियों की 11 दिन तक हड़ताल चली थी। इस तरह वर्तमान में चल रही रोडवेज कर्मियों की हड़ताल ने वर्ष 1979 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।
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इन सरकारों के समय भी रही हड़ताल
इसके अलावा वर्ष 1993 में प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार था और उस समय भी सीएम भजनलाल थे। उस समय सरकार की ओर से परिवहन समिति की बसों के परमिट जारी करने के विरोध में रोडवेज कर्मियों ने 9 दिन तक हड़ताल रखी। 1999 में प्रदेश में हरियाणा विकास पार्टी के बंसीलाल की सरकार में मैक्सी कैब चलाने के परमिट जारी करने के विरोध में रोडवेज कर्मियों की 5 दिन तक हड़ताल हुई। जिसके बाद वर्ष 2006 में कांग्रेस सरकार में सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के निजी बसों को परमिट देने के विरोध में 4 दिन तक हड़ताल रही थी। लेकिन प्रदेश के इन सभी मुख्यमंत्रियों के रिकॉर्ड को सीएम मनोहर लाल के समय ने तोड़ पीछे छोड़ दिया है।
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हड़ताल को लेकर भाजपा सरकार जिस तरह रवैया अपना रही है, वह ठीक नहीं है। रोडवेज कर्मचारियों की मांगें जायज है। वह निजीकरण के विरोध में हड़ताल कर रहे है। पिछली सरकारों में इतनी लंबी हड़ताल रोडवेज कर्मचारियों ने नहीं की। भाजपा सरकार कर्मचारी विरोधी है व सभी विभागों को निजीकरण की ओर धकेलना चाहती है। जगबीर सिंह मलिक, कांग्रेस विधायक गोहाना।
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भाजपा के लोगों को सरकार चलाने का अनुभव नहीं है। रोडवेज कर्मचारी अपना वेतन, भत्ता व अन्य सुविधाएं देने की मांग नहीं कर रहे है, बल्कि वह निजीकरण का विरोध कर रहे है। अगर सरकार ने उनकी मांग को नहीं माना और प्राइवेट बसों को लेने से पीछे नहीं हटी तो इनेलो भी पूरी तरह से समर्थन करेगी। डॉ. केसी बांगड़, राष्ट्रीय प्रवक्ता इनेलो।

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सरकार ने रोडवेज कर्मचारी नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया था। लेकिन कर्मचारी यूनियन में दो फाड़ होने के चलते बात सिरे नहीं चढ़ पाई। हड़ताल को राजनीतिक तूल दिया जा रहा है। अगर भविष्य में वार्ता के लिए कर्मचारी नेता तैयार है तो सरकार भी कर्मचारियों की जायज मांगे मानने को तैयार है। सरकार की नीतियों का कर्मियों को समर्थन करना चाहिए। डा. धर्मबीर सिंह नांदल, जिलाध्यक्ष भाजपा
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