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सीआरपीएफ केंद्र में मनाया सशस्त्र सेना झंडा दिवस
Updated Sat, 08 Dec 2018 01:19 AM IST
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सीआरपीएफ केंद्र में मनाया सशस्त्र सेना झंडा दिवस
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सीआरपीएफ केंद्र खेवड़ा में शुक्रवार को सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया गया। जहां डीआईजी ओंकार सिंह चाड़क की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
डीआईजी ओंकार सिंह चाड़क ने सभी को इस दिवस के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत की आजादी के समय देश की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक थी और देश की सेना को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाते हुए इसे प्रगति के पथ पर अग्रसर भी करना था। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए 23 अगस्त 1947 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की रक्षा समिति ने 7 दिसंबर को झण्डा दिवस आयोजित करने का निर्णय लिया। जिससे कुछ धनराशि भी एकत्र हो जाए और देश का हर नागरिक इस दिन अपना कुछ अंशदान देकर सेना के प्रति अपना सम्मान भी प्रदर्शित कर सके। उसी समय से यह दिवस प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है और देश के लिए शहादत देने वाले जांबाज सैनिक के लिए दो मिनट का मौन भी रखा जाता है। इस दिन जितनी भी राशि एकत्र की जाती है, वह शहीद हुए जांबाज सैनिकों व हताहत होने वाले सैनिकों के कल्याण के साथ ही पुनर्वास में सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से खर्च की जाती है। डीआईजी ने कहा कि हमारे देश के जवान दिन-रात परिवार से दूर रहकर प्रकृति की मार झेलते हुए केवल इसीलिए अपनी ड्यूटी पर खड़े रहते हैं, जिससे देश के नागरिक चैन की नींद सो सके। कहा कि आज के दिन को केवल पैसा एकत्र करने का दिन नहीं समझते हुए सैनिकों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। जिससे उनका मनोबल बढ़े और उनको यह अनुभव हो कि देश का हर नागरिक उनके कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ है।
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सीआरपीएफ केंद्र खेवड़ा में शुक्रवार को सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया गया। जहां डीआईजी ओंकार सिंह चाड़क की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
डीआईजी ओंकार सिंह चाड़क ने सभी को इस दिवस के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत की आजादी के समय देश की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक थी और देश की सेना को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाते हुए इसे प्रगति के पथ पर अग्रसर भी करना था। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए 23 अगस्त 1947 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की रक्षा समिति ने 7 दिसंबर को झण्डा दिवस आयोजित करने का निर्णय लिया। जिससे कुछ धनराशि भी एकत्र हो जाए और देश का हर नागरिक इस दिन अपना कुछ अंशदान देकर सेना के प्रति अपना सम्मान भी प्रदर्शित कर सके। उसी समय से यह दिवस प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है और देश के लिए शहादत देने वाले जांबाज सैनिक के लिए दो मिनट का मौन भी रखा जाता है। इस दिन जितनी भी राशि एकत्र की जाती है, वह शहीद हुए जांबाज सैनिकों व हताहत होने वाले सैनिकों के कल्याण के साथ ही पुनर्वास में सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से खर्च की जाती है। डीआईजी ने कहा कि हमारे देश के जवान दिन-रात परिवार से दूर रहकर प्रकृति की मार झेलते हुए केवल इसीलिए अपनी ड्यूटी पर खड़े रहते हैं, जिससे देश के नागरिक चैन की नींद सो सके। कहा कि आज के दिन को केवल पैसा एकत्र करने का दिन नहीं समझते हुए सैनिकों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। जिससे उनका मनोबल बढ़े और उनको यह अनुभव हो कि देश का हर नागरिक उनके कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ है।
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