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नहरों के बीच 1400 करोड़ से बनेगा हाइवे, एचएसआरडीसी तैयार कर रहा डीपीआर
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:36 AM IST
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प्रदीप कौशिक
सोनीपत।
जीटी रोड पर वाहनों का भार कम करने के लिए नहरों के बीच रिलीफ हाईवे बनाने की घोषणा के तीन साल बाद सरकार की नींद टूटी है। दिल्ली बॉर्डर से यमुनानगर तक पश्चिमी युमना नहर पर बनाए जाने वाले एक्सप्रेस-वे के लिए एचएसआरडीसी के अधिकारी डीपीआर तैयार करने में जुट गए है। इस पर करीब 1400 करोड़ रुपये खर्च होने है। डीपीआर तैयार होने के बाद ही एस्टीमेट बनाया जाएगा। सरकार की ओर से बजट जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सीएम मनोहरलाल ने वर्ष 2014 में पश्चिमी यमुना नहर पर दिल्ली के हैदरपुर से बवाना- सोनीपत- पानीपत- मुनक- करनाल- इंद्री- यमुनानगर तक एक्सप्रेस वे के निर्माण की घोषणा की थी। इसके लिए उन्होंने परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की स्वीकृति दी थी। इसके सर्वे के लिए लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी गई। सरकार के अहम प्रोजेक्ट के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बवाघना-सोनीपत-पानीपत-करनाल से मुनक तक सर्वे किया गया। इसके बाद सरकार ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण की जिम्मेदारी एचएसआरडीसी को सौंप दी थी।
दिल्ली से करनाल तक खर्च किए जाने है 1400 करोड़
करनाल के नजदीक घोगड़ीपुर से दिल्ली में हैदरपुर के पार आउटर रिंग रोड तक हाईवे का निर्माण किया जाना हैं। करनाल से आगे यमुनानगर तक पहले से हाईवे है। 121 किलोमीटर लंबे हाईवे निर्माण में करीब 1400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए कंसल्टेंट से डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनवाई जा रही है। हाईवे का निर्माण कार्य एनसीआर प्लानिंग बोर्ड स्कीम के तहत कराया जाना है। डीपीआर तैयार होने पर एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। शासन की तरफ से बजट मंजूर होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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नए एक्सप्रेस-वे की है जरूरत
जीटी रोड पर वाहनों का दबाव ज्यादा है। एक्सप्रेस-वे बनने से हिमाचल, यूपी, उत्तराखंड के वाहन जीटी रोड की बजाय इस रोड से गुजरेंगे। नहर की वजह से किनारों पर भूमि-कटाव रुकेगा। ट्रैफिक को डायवर्ट करने से हादसे भी कम होंगे।
नए एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए शासन से डीपीआर तैयार करने के निर्देश मिले हैं। जल्द ही कंसल्टेंट के जरिए डीपीआर तैयार कर सरकार से बजट मांगा जाएगा। इसके बाद हाईवे बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
बीआर सरोहा, डीजीएम एचएसआरडीसी
सोनीपत।
जीटी रोड पर वाहनों का भार कम करने के लिए नहरों के बीच रिलीफ हाईवे बनाने की घोषणा के तीन साल बाद सरकार की नींद टूटी है। दिल्ली बॉर्डर से यमुनानगर तक पश्चिमी युमना नहर पर बनाए जाने वाले एक्सप्रेस-वे के लिए एचएसआरडीसी के अधिकारी डीपीआर तैयार करने में जुट गए है। इस पर करीब 1400 करोड़ रुपये खर्च होने है। डीपीआर तैयार होने के बाद ही एस्टीमेट बनाया जाएगा। सरकार की ओर से बजट जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सीएम मनोहरलाल ने वर्ष 2014 में पश्चिमी यमुना नहर पर दिल्ली के हैदरपुर से बवाना- सोनीपत- पानीपत- मुनक- करनाल- इंद्री- यमुनानगर तक एक्सप्रेस वे के निर्माण की घोषणा की थी। इसके लिए उन्होंने परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की स्वीकृति दी थी। इसके सर्वे के लिए लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी गई। सरकार के अहम प्रोजेक्ट के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बवाघना-सोनीपत-पानीपत-करनाल से मुनक तक सर्वे किया गया। इसके बाद सरकार ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण की जिम्मेदारी एचएसआरडीसी को सौंप दी थी।
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दिल्ली से करनाल तक खर्च किए जाने है 1400 करोड़
करनाल के नजदीक घोगड़ीपुर से दिल्ली में हैदरपुर के पार आउटर रिंग रोड तक हाईवे का निर्माण किया जाना हैं। करनाल से आगे यमुनानगर तक पहले से हाईवे है। 121 किलोमीटर लंबे हाईवे निर्माण में करीब 1400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए कंसल्टेंट से डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनवाई जा रही है। हाईवे का निर्माण कार्य एनसीआर प्लानिंग बोर्ड स्कीम के तहत कराया जाना है। डीपीआर तैयार होने पर एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। शासन की तरफ से बजट मंजूर होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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नए एक्सप्रेस-वे की है जरूरत
जीटी रोड पर वाहनों का दबाव ज्यादा है। एक्सप्रेस-वे बनने से हिमाचल, यूपी, उत्तराखंड के वाहन जीटी रोड की बजाय इस रोड से गुजरेंगे। नहर की वजह से किनारों पर भूमि-कटाव रुकेगा। ट्रैफिक को डायवर्ट करने से हादसे भी कम होंगे।
नए एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए शासन से डीपीआर तैयार करने के निर्देश मिले हैं। जल्द ही कंसल्टेंट के जरिए डीपीआर तैयार कर सरकार से बजट मांगा जाएगा। इसके बाद हाईवे बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
बीआर सरोहा, डीजीएम एचएसआरडीसी