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Sirsa News: होलिका पूजन के लिए बड़कूले बनाने में जुटीं महिलाएं
Wed, 25 Feb 2026 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 25 Feb 2026 11:32 PM IST
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सिरसा।शहर के प्रेम नगर में महिला बड़ूकले की माला बनाते हुए। संवाद
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होली पर्व नजदीक, होलिका पूजन की तैयारियों में जुटीं
गोबर के बड़कूले और पूजन सामग्री की मालाएं बनाने में दिखा उत्साह
फोटो- 27
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही होली पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। खासतौर पर महिलाओं में होलिका पूजन पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। घर-आंगन की साफ-सफाई से लेकर पूजन सामग्री तैयार करने तक महिलाएं पूरे मनोयोग से लगी हुई हैं।
होलिका पूजन भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से गोबर से बड़कूले तैयार कर रही हैं। बड़कूले छोटे-छोटे गोल या चपटी आकार के बनाए जाते हैं, जिन्हें सुखाकर होलिका दहन के समय अर्पित किया जाता है।
कई स्थानों पर इन बड़ूकलों पर रोली और हल्दी से तिलक भी लगाया जाता है। महिलाओं का मानना है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गांवों में तो यह परंपरा विशेष रूप से जीवंत दिखाई देती है।
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महिलाएं एक-दूसरे के घर एकत्रित होकर गोबर इकट्ठा करती हैं और मिलकर बड़कूले बनाती हैं। इस दौरान लोकगीत भी गाए जाते हैं, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो उठता है। बुजुर्ग महिलाएं नई पीढ़ी को पूजन की विधि और इसके महत्व के बारे में जानकारी दे रही हैं, ताकि परंपराएं आगे भी जीवित रहें।
बेर, टॉफिया व अन्य सामान की बनाई जा रहीं मालाएं
इसके साथ ही पूजन में चढ़ाई जाने वाली सामग्री की भी तैयारी की जा रही है। महिलाएं बेर, नारियल, टॉफियां, बताशे और अन्य पूजन सामग्री की सुंदर मालाएं बना रही हैं। इन मालाओं को होलिका में अर्पित किया जाता है। बाजारों में भी इन वस्तुओं की मांग बढ़ गई है, लेकिन कई महिलाएं घर पर ही अपने हाथों से मालाएं तैयार करना पसंद कर रही हैं। उनका कहना है कि स्वयं बनाए गए पूजन सामग्री का अलग ही महत्व होता है।
रंगों से सजे बाजार
शहर के बाजारों में भी होली की रौनक दिखाई देने लगी है। रंग, गुलाल, पिचकारियां और सजावटी सामान के साथ-साथ पूजन सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा रही है। खासकर बेर और नारियल की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। दुकानदार दीपक कुमार का कहना है कि जैसे-जैसे होलिका दहन की तिथि नजदीक आ रही है, खरीदारी और तेज होने की उम्मीद है।
महिलाएं व्रत भी रखती हैं
महिलाएं होलिका पूजन से पहले व्रत भी रखती हैं और शाम के समय पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं। परिवार की खुशहाली, बच्चों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। पूजा के बाद होलिका की परिक्रमा कर बड़कूले, मालाएं और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है।
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गोबर के बड़कूले और पूजन सामग्री की मालाएं बनाने में दिखा उत्साह
फोटो- 27
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही होली पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। खासतौर पर महिलाओं में होलिका पूजन पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। घर-आंगन की साफ-सफाई से लेकर पूजन सामग्री तैयार करने तक महिलाएं पूरे मनोयोग से लगी हुई हैं।
होलिका पूजन भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से गोबर से बड़कूले तैयार कर रही हैं। बड़कूले छोटे-छोटे गोल या चपटी आकार के बनाए जाते हैं, जिन्हें सुखाकर होलिका दहन के समय अर्पित किया जाता है।
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कई स्थानों पर इन बड़ूकलों पर रोली और हल्दी से तिलक भी लगाया जाता है। महिलाओं का मानना है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गांवों में तो यह परंपरा विशेष रूप से जीवंत दिखाई देती है।
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महिलाएं एक-दूसरे के घर एकत्रित होकर गोबर इकट्ठा करती हैं और मिलकर बड़कूले बनाती हैं। इस दौरान लोकगीत भी गाए जाते हैं, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो उठता है। बुजुर्ग महिलाएं नई पीढ़ी को पूजन की विधि और इसके महत्व के बारे में जानकारी दे रही हैं, ताकि परंपराएं आगे भी जीवित रहें।
बेर, टॉफिया व अन्य सामान की बनाई जा रहीं मालाएं
इसके साथ ही पूजन में चढ़ाई जाने वाली सामग्री की भी तैयारी की जा रही है। महिलाएं बेर, नारियल, टॉफियां, बताशे और अन्य पूजन सामग्री की सुंदर मालाएं बना रही हैं। इन मालाओं को होलिका में अर्पित किया जाता है। बाजारों में भी इन वस्तुओं की मांग बढ़ गई है, लेकिन कई महिलाएं घर पर ही अपने हाथों से मालाएं तैयार करना पसंद कर रही हैं। उनका कहना है कि स्वयं बनाए गए पूजन सामग्री का अलग ही महत्व होता है।
रंगों से सजे बाजार
शहर के बाजारों में भी होली की रौनक दिखाई देने लगी है। रंग, गुलाल, पिचकारियां और सजावटी सामान के साथ-साथ पूजन सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा रही है। खासकर बेर और नारियल की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। दुकानदार दीपक कुमार का कहना है कि जैसे-जैसे होलिका दहन की तिथि नजदीक आ रही है, खरीदारी और तेज होने की उम्मीद है।
महिलाएं व्रत भी रखती हैं
महिलाएं होलिका पूजन से पहले व्रत भी रखती हैं और शाम के समय पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं। परिवार की खुशहाली, बच्चों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। पूजा के बाद होलिका की परिक्रमा कर बड़कूले, मालाएं और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है।