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छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ी तो लिया युवतियों को मजबूत बनाने का फैसला, 10 हजार से ज्यादा को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण देकर बनाया मजबूत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 12:13 AM IST
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When the incidents of molestation increased, the decision was taken to strengthen the girls, made more than 10 thousand strong by training in self-defense
स्कूल की छात्राओं को कराटे का परीक्षण देती अनिता सैनी। - फोटो : Sirsa
सिरसा। छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की संख्या बढ़ी तो उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता ओर सवाल खड़े हुए। हर समय पुलिस सुरक्षा देना संभव नहीं है और परिवार के सदस्य भी साथ नहीं चल सकते। रात के समय घर जाते समय शरारती तत्वों ने पीछा कर छेड़छाड़ की कोशिश की तो उन्हें रात के अंधेरे में ही अच्छा सबक सिखाया। क्योंकि वह कराटे और जुड़ो की माहिर खिलाड़ी है। इतना ही नहीं उसने स्कूल की छोटी कक्षाओं की छात्राओं को भी सेल्फ डिफेंस के लिए प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया, ताकि सुरक्षा की भावना पनप सके और अपनी सुरक्षा छात्राएं खुद कर सके। हम बात कर रहे हैं सिरसा की निवासी अनिता सैनी की। जो स्वयं अब जूडो और कराटे की कोच हैं।
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अनिता सैनी ने बहुत कुछ झेला है। जिसे अब वह याद नहीं करना चाहती। लेकिन इन घटनाओं से सबक लेते हुए उसने फैसला किया कि वह सभी छात्राओं और युवतियों को इस लायक बना देगी कि उन्हें अपनी रक्षा के लिए किसी ओर को न बुलाना पड़े। सेल्फ डिफेंस के लिए अनिता सैनी ने स्कूलों में जाकर उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। एक एनजीओ का गठन किया और स्कूल-स्कूल जाकर प्रशिक्षण दिया। अब तक अनिता सैनी दस हजार से ज्यादा छात्राओं को जुडो कराटे और सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे चुकी है। इतना ही नहीं 150 से ज्यादा मास्टर ट्रेनर भी अनिता ने तैयार किए हैं। जो आगे छात्राओं को प्रशिक्षण देते हैं।
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गणतंत्र दिवस समारोह में कराटे देखा तो किया सीखने का फैसला
अनिता बताती है कि 26 जनवरी के समारोह में स्कूल की ओर से वह गई थी। इस दौरान कराटे का एक शो हुआ। उस समय इस खेल का नाम नहीं पता था, लेकिन उसने फैसला किया कि यही सीखना है। अनिता बताती हैं कि शुरूआत में स्कूल से फरलो मारकर कराटे सीखा। करीब तीन महीने तक अलग-अलग दिनों में सीखकर खेल में भाग लिया। करीब पांच-छह महीने बाद ही अनिता ने जुड़ो में मेडल भी हासिल कर लिया। मेडल लेकर घर गई और परिजनों को बताया कि वह स्कूल से फरलो मारकर जुड़ो सीखने जाती है और अब उसका मेडल आ गया है। एक बार परिवार ने विश्वास नहीं किया, लेकिन जब विश्वास हुआ तो उनका भी साथ मिला।
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