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Sirsa News: श्री जाम्भाणी हरि कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Mon, 21 Sep 2026 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 21 Sep 2026 11:18 PM IST
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डबवाली। शहीद माता अमृता देवी बिश्नोई चौक में आयोजित श्रीमद् जाम्भाणी हरि कथा का पाठ करते हुए आच
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। शहीद माता अमृता देवी बिश्नोई चौक में सोमवार को श्रीमद् जाम्भाणी हरि कथा का पाठ हुआ। यह कथा 363 पर्यावरण शहीदों और ब्रह्मलीन गो-ऋषि स्वामी राजेंद्रानंद महाराज की स्मृति में आयोजित की गई।
आचार्य अखिलेश मुनि ने भगवान के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया। गांव के प्रबुद्धजनों और अशोक कुमार भाम्भू ने आचार्य अखिलेश मुनि, स्वामी सुखदेव मुनि और संगीत मंडली का स्वागत किया। आचार्य ने ओउम् विष्णु कीर्तन के साथ कथा आरंभ की। उन्होंने बिश्नोई धर्म के प्रमुख नियम जीव दया पालणी और रूंख लीलो नहीं घावे की व्याख्या की।
आचार्य ने बताया कि बिश्नोई समाज सदियों से जीव-जंतुओं की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित रहा है। समाज जीव हत्या सहन नहीं कर सकता। प्रकृति की रक्षा के लिए त्याग की परंपरा निभाता आया है।
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आचार्य ने खेजड़ली के ऐतिहासिक बलिदान का मार्मिक वर्णन किया। जोधपुर के राजा अभय सिंह के मंत्री गिरधर भंडारी ने हरे पेड़ों को काटने के आदेश दिए थे। माता अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोई वीरों ने पेड़ों से लिपटकर अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
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डबवाली। शहीद माता अमृता देवी बिश्नोई चौक में सोमवार को श्रीमद् जाम्भाणी हरि कथा का पाठ हुआ। यह कथा 363 पर्यावरण शहीदों और ब्रह्मलीन गो-ऋषि स्वामी राजेंद्रानंद महाराज की स्मृति में आयोजित की गई।
आचार्य अखिलेश मुनि ने भगवान के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया। गांव के प्रबुद्धजनों और अशोक कुमार भाम्भू ने आचार्य अखिलेश मुनि, स्वामी सुखदेव मुनि और संगीत मंडली का स्वागत किया। आचार्य ने ओउम् विष्णु कीर्तन के साथ कथा आरंभ की। उन्होंने बिश्नोई धर्म के प्रमुख नियम जीव दया पालणी और रूंख लीलो नहीं घावे की व्याख्या की।
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आचार्य ने बताया कि बिश्नोई समाज सदियों से जीव-जंतुओं की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित रहा है। समाज जीव हत्या सहन नहीं कर सकता। प्रकृति की रक्षा के लिए त्याग की परंपरा निभाता आया है।
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आचार्य ने खेजड़ली के ऐतिहासिक बलिदान का मार्मिक वर्णन किया। जोधपुर के राजा अभय सिंह के मंत्री गिरधर भंडारी ने हरे पेड़ों को काटने के आदेश दिए थे। माता अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोई वीरों ने पेड़ों से लिपटकर अपने प्राण न्योछावर कर दिए।