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Sirsa News: गुलाबी सुंडी ने किए किसानों के अरमान खाक

Mon, 04 Sep 2023 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 04 Sep 2023 11:43 PM IST
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The pink caterpillar destroyed the hopes of the farmers
इकबाल सिंह। 
ओढां। इस बार मौसम अनुकूल रहने व पर्याप्त मात्रा मेें बरसात होने के चलते नरमे की फसल काफी अच्छी थी, लेकिन अंतिम पड़ाव में गुलाबी सुंडी ने किसानों की उम्मीदें धूमिल कर दी। परेशान किसान महंगे कीटनाशकों के छिड़काव पर जोर दे रहे हैं। लेकिन फिर भी राहत नहीं मिल पा रही।
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गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाने के लिए किसान 10 से अधिक बार छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन भी कोई असर नहीं हो रहा। किसानों को समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए। अच्छी फसल को देखकर किसानों ने सपने बुने थे। किसी ने नया मकान बनाना था तो किसी ने बच्चों की शादी व पढ़ाई पर खर्च करना था। लेकिन गुलाबी सुंडी ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया।
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इस बार मैंने पूर्व की अपेक्षा नरमे की बिजाई अधिक की थी। पौधे पर टिंडों की भरमार है, लेकिन उनमें गुलाबी सुंडी का प्रकोप है। अच्छी फसल देखकर उम्मीद थी कि इस बार औसतन 12 से 14 क्विंटल प्रति एकड़ नरमा होगा। अब तो ये लगता है कि बचत तो दूर जमीन का ठेका पूरा भी नहीं होगा। सोचा तो ये था कि इस बार फसल अच्छी होगी तो बेटी की फीस भरेंगे और कुछ लेनदेन भी हो जाएगा। लेकिन गुलाबी सुंडी ने उम्मीदें धूमिल कर दीं। किसान अपनी फसल पर ही सपने बुनता है। इस बार मजदूर भी विगत वर्ष के बजाय 300 रुपये अधिक मजदूरी मांग रहे हैं। यानी 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल की चुगाई व आने-जाने का किराया व आटा अलग से है। इस बार किसानों की हालत बेहद खराब है। फसलें 50 से 70 प्रतिशत तक खराब हो चुकी है। - जगदीश सहारण, किसान।
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समय पर बरसात व मौसम ठीक रहने के चलते इस बार फसल अच्छी थी। फसल को देखकर ये लगता था कि इस बार ईश्वर खूब मेहरबान हुआ है। ऐन मौके पर पकी फसल में इस गुलाबी सुंडी ने दोहरी चपेट मार दी। किसान कैसे तो कर्ज उतारेगा और कैसे अपने परिवार का पालन पोषण करेगा। विगत वर्ष भी फसल अच्छी नहीं थी। समझ नहीं आ रहा कि कैसे काम चलेगा। मैंने इस बार 15 एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। सोचा था कि अच्छी फसल होगी, जिससे एक तो बेटे की शादी करेंगे और दूसरा नया मकान भी बना लेंगे। लेकिन ऐन मौके पर गुलाबी सुंडी ने सभी सपनों पर पानी फेर दिया। हमारे क्षेत्र में गुलाबी सुंडी के कारण करीब 70 प्रतिशत तक नरमे की फसल बर्बाद हो चुकी है। मजदूर अधिक चुगाई मांग रहे हैं। वे अपने जगह सही हैं, लेकिन किसान क्या करे। - आत्माराम पारीक, किसान।

विगत वर्ष न के बराबर ही थी। लेकिन उम्मीद थी कि इस बार फसल अच्छी होगी, जिससे न केवल पीछे वाला घाटा भी पूरा हो जाएगा और कुछ लेनदेन भी हो जाएगा। इस बार मैंने 20 एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। अंतिम पड़ाव में गुलाबी सुंडी आफत बनकर आ गई। सुंडी पर नियंत्रण के लिए मैं अब से पहले 15 बार छिड़काव कर चुका हूं। लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आए। हजारों रुपये छिड़काव पर खर्च हो गए फिर भी कुछ भी पल्ले पड़ता दिखाई नहीं दे रहा। समझ नहीं आ रहा कि किसान अगली बिजाई किस दम पर करेगा। किसान का जीवन तो हमेशा से ही परेशानियों से भरा रहा है। -सतपाल बडज़ाती, किसान।


कभी मौसम की मार तो कभी समय पर खाद-पानी नहीं। एक किसान को तो हमेशा से ही परेशानियों से जूझना पड़ता है। इस बार मैंने 25 एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। विगत वर्ष भी फसल बेहद कमजोर थी और इस बार भी वही स्थिति है। पौधे पर टिंडों की भरमार है, लेकिन लगभग हर टिंडे में गुलाबी सुंडी है। सुंडी पर नियंत्रण के लिए महंगे कीटनाशकों से 10 बार छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन कोई असर नहीं। शुरुआत में नरमा बहुत अच्छा था। सोचा था कि नरमा अच्छा होगा तो आढ़ती का हिसाब कर देंगे, जमीन की लिमिट भर देंगे और कुछ पैसे बच भी जाएंगे। लेकिन इस गुलाबी सुंडी ने सब-कुछ खत्म सा कर दिया। समझ नहीं आ रहा कि किसान कैसे तो घर-बार चलाएगा और कैसे खर्चा को पूरा कर पाएगा।
- इकबाल सिंह, किसान।
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