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Sirsa News: सुखचैन सिंह अमर रहे को नारों से गूंजा माहौल, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

Sat, 05 Sep 2026 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sat, 05 Sep 2026 11:43 PM IST
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The atmosphere resounded with chants of "Sukhchain Singh Amar Rahe" (Long live Sukhchain Singh) as a final farewell was bid with teary eyes.
शहीद सुखचैन सिंह को सलामी देते सेना के जवान।
सिरसा। जम्मू-कश्मीर में तैनात सैनिक सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह पैतृक गांव कुत्ताबढ़ लाया गया। अंतिम दर्शन के दौरान ‘सुखचैन सिंह अमर रहे’ के नारों के बीच सांत्वना देने आए लोग भी भावुक हो उठे। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पार्थिव देह पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि दी। गांव के श्मशान घाट में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पांच वर्षीय बेटे आकाशदीप ने चिता को मुखाग्नि दी।
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प्रशासन की ओर से रानियां के तहसीलदार शुभम शर्मा ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सेना और पुलिस की टुकड़ी ने शस्त्र सलामी दी। इससे पहले पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने के दौरान भंभूर, मंगाला, मल्लेकां, माधोसिंघाना और ढाणी चंडीगढ़ सहित अनेक स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि दी। सुखचैन सिंह वर्ष 2015 में सेना में भर्ती हुए थे। वह 10 दिन की छुट्टी पर घर आने वाले थे। उनके पुत्र आकाशदीप का जन्मदिन एक अक्तूबर को है। परिवार उनके घर लौटने की प्रतीक्षा कर रहा था। सेना की ओर से कर्नल ओपी सुमेरा, कर्नल इंद्र सिंह, सूबेदार नरेंद्र सिंह और सूबेदार मनजिंद्र सिंह ने श्रद्धांजलि दी। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से लालचंद ने उन्हें नमन किया। ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बैनीवाल, संत ब्रह्मदास, संत हरिनामदास और वरिष्ठ नेता जगदीश चोपड़ा भी उपस्थित रहे।
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प्रशासन की बेरुखी से नाराज परिजनों ने रोकी अंतिम यात्रा

परिजनों ने प्रशासन की कथित बेरुखी से नाराज होकर करीब आधे घंटे तक अंतिम यात्रा रोक दी। वे एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे। परिजनों का कहना था कि निधन के तीन दिन बीतने के बावजूद कोई प्रशासनिक अधिकारी उनके घर नहीं पहुंचा। उन्होंने मांग की कि कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर लिखित आश्वासन दे। इसके बाद ही अंतिम यात्रा आगे बढ़ाई जाएगी। सूचना मिलने पर ऐलनाबाद के डीएसपी जगदीश चंद्र और रानियां थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। डीएसपी ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से फोन पर बात कराने की पेशकश भी की लेकिन परिजनों ने इन्कार कर दिया। करीब आधे घंटे बाद ग्रामीणों ने ही परिवार को समझाया और मुख्यमंत्री से मुलाकात का भरोसा दिलाया। इसके बाद अंतिम यात्रा आगे बढ़ी।
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जब पापा आएंगे तो शिकायत करूंगा, यहां सब तंग करते हैं...

अंतिम संस्कार के दौरान बेहद भावुक दृश्य सामने आया। बेटे आकाशदीप को नहीं पता था कि अब उसके पापा कभी नहीं आएंगे। वह कह रहा था, ‘जब पापा आएंगे तो शिकायत करूंगा, यहां सब तंग करते हैं और मारते रहते हैं।’ यह सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पत्नी निर्मल कौर, माता अमरकौर और भाई सर्वजीत सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था।
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