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Sirsa News: सर्द मौसम में रखें पशुओं का विशेष ध्यान

Tue, 16 Jan 2024 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Tue, 16 Jan 2024 02:20 AM IST
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Take special care of animals in cold weather
सिरसा में पशुओं के साथ खड़े पशुपालन विभाग के निदेशक डाॅ. विद्यासागर। 
सिरसा। सर्द मौसम में पशुओं का बचाव करना बेहद जरूरी है। पशुपालकों को पशुओं के बचाव के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। इसके लिए पशुपालन विभाग के निदेशक विद्यासागर ने विशेष सलाह दी है।
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उन्होंने बताया कि चार डिग्री सेल्सियस से कम तापमान को शीतलहर माना जाता है। इससे पशुओं को नुकसान होता है। पशु के देर तक कम तापमान में रहने, वातावरण में नमी और हवा की तेज गति से नुकसान बढ़ जाता है। पहले शीतलहर का पूर्वानुमान, आमजन को इस बाबत सचेत करना, शीतलहर से बचाव के लिए समय रहते तैयारी करने से काफी हद तक नुकसान से बचा जा सकता है।
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शीतलहर से पालतू पशुओं और जंगली जानवरों के चोटिल होने और मृत्यु होने की आशंका रहती है। नवजात, बाल, युवा पशुओं के श्वसन तंत्र की बीमारी से पीड़ित, दुधारू और कमजोर पशुओं पर शीतलहर का प्रभाव अधिक होता है। शीतलहर के दौरान पशुओं के शरीर का तापमान कम हो जाता है, जिससे पशुओं को भूख कम लगना, भारी पशुओं में जोड़ों में दर्द का होना, कुत्तों में कैनल कफ और श्वसन तंत्र की बीमारियां आदि का होना अमूमन लक्षण पाए जाते हैं।
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शीतलहर से बचाव के उपाय
पशुबाड़ों में रोशनी का उचित प्रबंध होना चाहिए।
पशुओं के पीने के लिए गर्म/गुनगुने पानी का प्रयोग करें।
पशुओं के बैठने के स्थान को सूखा रखने के लिए पराली इत्यादि का प्रयोग करें।

धूप निकलने पर पशुओं को खुले में बांधें ताकि उनके शरीर का तापमान सामान्य रहे।
सर्दियों के दिनों में पशुपालकों को आसपास के मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी रखना चाहिए।

नवजात बच्चों व बीमार पशुओं को रात के समय किसी बोरी या तिरपाल से ढक दें। धूप निकलने पर हटा दें।
सर्दियों के दिनों में दुधारू पशुओं और छह माह से अधिक गाभिन पशुओं को अधिक मात्रा में संतुलित पोषाहार दें।

पशुओं को अधिक ऊर्जा पैदा करने वाले अवयव जैसे खल, गुड़ आदि के साथ संतुलित आहार दें ताकि पशुओं का शरीर गरम रहे।

धूप निकलने पर पशुओं को गर्म/ताजे पानी से नहलाकर सरसों के तेल की मालिश करें, जिससे पशुओं को खुश्की आदि से बचाया जा सके।
सर्दियों के दिनों में पशुओं के आवास का उचित प्रबंध करना चाहिए। टीन से बने पशु आवास को घास-फूस से चारों ओर से ढक देना चाहिए ताकि पशुओं को ठंडी हवा से बचाया जा सके। पशुबाड़ों का निर्माण मौसम के अनुकूल करना चाहिए ताकि सर्दियों में अधिकतम धूप शेड में आ सके।



शीतलहर के दौरान पशुपालक यह रखें सावधानी

पशुबाड़ों में नमी, धुआं न रहे।

पशुओं को ठंडा आहार और ठंडा पानी नहीं पिलाना चाहिए।
पशुओं को रात के समय और अत्यधिक ठंड में बाहर नहीं रखना चाहिए।
सर्दियों में जहां तक संभव हो, पशु मेलों का आयोजन नहीं करना चाहिए।
पशुओं के मृत शरीर को पशुओं की चारागाह के आसपास दफन नहीं करना चाहिए।
सर्दियों में पशुओं को खुले स्थान पर न तो बांधें और न ही घूमने के लिए खुला छोड़ें।
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