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135 एटीएम बंद, बैंकों में कैश न होने से लोग परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Tue, 06 Dec 2016 12:49 AM IST
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सिरसा। भले ही बैंकों से राशि निकालने की सीमा एक सप्ताह में 24 हजार रुपये तक है पर लोगों को इतनी राशि नहीं मिल रही है। अधिकतर एटीएम बंद पड़े रहते हैं इस लिए लोगों को निर्धारित ढाई हजार रुपये भी नहीं मिल रहे हैं। सोमवार को 181 में से 135 एटीएम नहीं चले। इससे दिन-प्रतिदिन लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
बैंकों में आए दिन कैश की समस्या बढ़ती जा रही है। नोट बंदी के बाद स्थिति जल्द सामान्य होने की बात बैंक अधिकारियों द्वारा कही जा रही थी पर दिन-प्रतिदिन स्थिति सामान्य होने की बजाय और गंभीर होती जा रही है। सोमवार को भी बैंकों के बाहर लंबी लाइनें देखी गई। लाइनों में लोग कैश निकालने के लिए घंटों तक खड़े रहे। एक खाताधारक को एक सप्ताह में 24 हजार रुपये निकालने की छूट सीमा दी गई है पर उसे धक्के खाने के बाद मात्र चार हजार रुपये ही मिल रहे हैं। दिन भर किसी भी बैंक में कैश नहीं मिलता। कैश न मिलने से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। अब तो कोई रुपये उधार भी नहीं देता। सभी घरों के मासिक खर्च महिने की शुरूआत में चुकाना होता है। अब सभी लोग अपने खर्च को चुकाने में असमर्थ होते जा रहे हैं। हजारों कर्मचारियों की आई करोड़ों की राशि भी बैंक अकाउंट में फंस कर रह गई है। बैंकों में जो कैश आता है उसे चार-चार हजार में वितरण कर अधिक से अधिक लोगों को राहत देने का प्रयास बैंकों की ओर से किया जा रहा है। बैंकों में कैश खत्म होने का नोटिस हमेश चस्पा रहता है। लोगों की परेशानी बच्चों की पढाई और घरेलू जरूरतें पूरी न होने पर बढ़ रही है। अधिकतर प्राइवेट स्कूल व उच्च शिक्षण संस्थानों में राशि केवल नए नोटों के रूप में ही स्वीकार की जा रही है। ऑनलाइन बैंकिंग से राशि न लेकर ये संस्थान अपने रिकॉर्ड को सरकार से छुपाकर रखना चाहते हैं। अब तक पर्दे के पिछे जो होता रहा उसको अब सार्वजनकि करने से घबरा रहे हैं। ट्यूशन वाले टीचर भी चालू राशि को कैश लेने में रूची दिखा रहे हैं। अधिकतर सरकारी शिक्षक भी ट्यूशन पढ़ाते हैं और ऐसा करने पर बैन है। इस लिए वे नहीं चाहते कि खातों के माध्यम से सरकार को पता चले कि वे कोई और धंधा भी जमाए बैठे हैं। सब अपनी सुविधा देख रहे हैं जो आम लोगों के लिए दुविधा बनती जा रही है।
लंबी होती लाइनें बता रही हैं लोगों की परेशानी
बैंकों में कैश निकलवाने के लिए हर रोज लग रही लंबी लाइनें लोगों की समस्या को बखूबी बता रही हैं। जब से नोट बंदी हुई है तब से भीड़ बढ रही है। बैंक खुलने से पहले से ही लोग बैंकों के बाहर लाइनों में लग जाते हैं। अधिकतर बैंकों में सुबह के समय कैश नहीं होता। दोपहर को 10 से 15 लाख तक एक बैंक में कैश आता है। उसके बाद कैश वितरण शुरू होता है। लाइन में लगे सभी लोग चार-चार रुपये भी नहीं ले पाते। यानि कि दिन भर लाइन में लगे रहे फिर भी खाली हाथ लौटने पर मजबूर होना पड़ता है। आज भी यही स्थिति देखी गई। बैंकों में नो कैश के नोटिस चस्पा किए हुए थे फिर भी लोग लाइनों में यह सोच कर लगे रहे कि पता नहीं कब कैश वाली गाड़ी आ जाए।
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आज 135 एटीएम बने सफेद हाथी
जिले भर में इन दिनों एटीएम सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। आज 181 में से 135 एटीएम नहीं चले। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि खाताधारक को एटीएम से हर रोज ढाई हजार निकालने की कितनी सुविधा मिल पा रही होगी। जिन एटीएम में राशि डाल दी जाती है उनमें से राशि निकालने के लिए लोग लंबी लाइनों में खड़े हो जाते हैं। ये लाइनें तब तक कम नहीं होती जब तक एटीएम में राशि समाप्त नहीं हो जाती। दिन भी लोगों को लाइनों में लगने के बाद ढाई हजार रुपये भी नसीब नहीं हो पा रहे हैं।
ऑनलाइन बैंकिंग बेहतर विकल्प
जिला अग्रणी बैंक अधिकारी एमपी शर्मा ने बताया कि कैशलेश ट्रांजक्शन बहुत अच्छा विकल्प है। उन्होंने बताया कि लोग कैशलेश ट्रांजक्शन कर अपने सभी कामकाज कर सकते हैं। लोगों को अपने घर बैठे रुपयों का लेन-देन करने की सुविधा कैशलेश ट्रांजक्शन से मिलती है तो उन्हें कैश के तहत लेन-देन करने से परहेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस विधि को लेकर थोड़ी समस्या हो सकती है पर अब नोट बंदी के दौरान यह सबसे बेहतर विकल्प है। अब लोग कैशलेश ट्रांजक्शन करने भी लगे हैं। हम हर रोज सेमीनार कर लोगों को समझा रहे हैं कि कैशलेश ट्रांजक्शन करना कितना कारगर साबित हो सकता है।
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बैंकों में आए दिन कैश की समस्या बढ़ती जा रही है। नोट बंदी के बाद स्थिति जल्द सामान्य होने की बात बैंक अधिकारियों द्वारा कही जा रही थी पर दिन-प्रतिदिन स्थिति सामान्य होने की बजाय और गंभीर होती जा रही है। सोमवार को भी बैंकों के बाहर लंबी लाइनें देखी गई। लाइनों में लोग कैश निकालने के लिए घंटों तक खड़े रहे। एक खाताधारक को एक सप्ताह में 24 हजार रुपये निकालने की छूट सीमा दी गई है पर उसे धक्के खाने के बाद मात्र चार हजार रुपये ही मिल रहे हैं। दिन भर किसी भी बैंक में कैश नहीं मिलता। कैश न मिलने से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। अब तो कोई रुपये उधार भी नहीं देता। सभी घरों के मासिक खर्च महिने की शुरूआत में चुकाना होता है। अब सभी लोग अपने खर्च को चुकाने में असमर्थ होते जा रहे हैं। हजारों कर्मचारियों की आई करोड़ों की राशि भी बैंक अकाउंट में फंस कर रह गई है। बैंकों में जो कैश आता है उसे चार-चार हजार में वितरण कर अधिक से अधिक लोगों को राहत देने का प्रयास बैंकों की ओर से किया जा रहा है। बैंकों में कैश खत्म होने का नोटिस हमेश चस्पा रहता है। लोगों की परेशानी बच्चों की पढाई और घरेलू जरूरतें पूरी न होने पर बढ़ रही है। अधिकतर प्राइवेट स्कूल व उच्च शिक्षण संस्थानों में राशि केवल नए नोटों के रूप में ही स्वीकार की जा रही है। ऑनलाइन बैंकिंग से राशि न लेकर ये संस्थान अपने रिकॉर्ड को सरकार से छुपाकर रखना चाहते हैं। अब तक पर्दे के पिछे जो होता रहा उसको अब सार्वजनकि करने से घबरा रहे हैं। ट्यूशन वाले टीचर भी चालू राशि को कैश लेने में रूची दिखा रहे हैं। अधिकतर सरकारी शिक्षक भी ट्यूशन पढ़ाते हैं और ऐसा करने पर बैन है। इस लिए वे नहीं चाहते कि खातों के माध्यम से सरकार को पता चले कि वे कोई और धंधा भी जमाए बैठे हैं। सब अपनी सुविधा देख रहे हैं जो आम लोगों के लिए दुविधा बनती जा रही है।
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लंबी होती लाइनें बता रही हैं लोगों की परेशानी
बैंकों में कैश निकलवाने के लिए हर रोज लग रही लंबी लाइनें लोगों की समस्या को बखूबी बता रही हैं। जब से नोट बंदी हुई है तब से भीड़ बढ रही है। बैंक खुलने से पहले से ही लोग बैंकों के बाहर लाइनों में लग जाते हैं। अधिकतर बैंकों में सुबह के समय कैश नहीं होता। दोपहर को 10 से 15 लाख तक एक बैंक में कैश आता है। उसके बाद कैश वितरण शुरू होता है। लाइन में लगे सभी लोग चार-चार रुपये भी नहीं ले पाते। यानि कि दिन भर लाइन में लगे रहे फिर भी खाली हाथ लौटने पर मजबूर होना पड़ता है। आज भी यही स्थिति देखी गई। बैंकों में नो कैश के नोटिस चस्पा किए हुए थे फिर भी लोग लाइनों में यह सोच कर लगे रहे कि पता नहीं कब कैश वाली गाड़ी आ जाए।
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आज 135 एटीएम बने सफेद हाथी
जिले भर में इन दिनों एटीएम सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। आज 181 में से 135 एटीएम नहीं चले। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि खाताधारक को एटीएम से हर रोज ढाई हजार निकालने की कितनी सुविधा मिल पा रही होगी। जिन एटीएम में राशि डाल दी जाती है उनमें से राशि निकालने के लिए लोग लंबी लाइनों में खड़े हो जाते हैं। ये लाइनें तब तक कम नहीं होती जब तक एटीएम में राशि समाप्त नहीं हो जाती। दिन भी लोगों को लाइनों में लगने के बाद ढाई हजार रुपये भी नसीब नहीं हो पा रहे हैं।
ऑनलाइन बैंकिंग बेहतर विकल्प
जिला अग्रणी बैंक अधिकारी एमपी शर्मा ने बताया कि कैशलेश ट्रांजक्शन बहुत अच्छा विकल्प है। उन्होंने बताया कि लोग कैशलेश ट्रांजक्शन कर अपने सभी कामकाज कर सकते हैं। लोगों को अपने घर बैठे रुपयों का लेन-देन करने की सुविधा कैशलेश ट्रांजक्शन से मिलती है तो उन्हें कैश के तहत लेन-देन करने से परहेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस विधि को लेकर थोड़ी समस्या हो सकती है पर अब नोट बंदी के दौरान यह सबसे बेहतर विकल्प है। अब लोग कैशलेश ट्रांजक्शन करने भी लगे हैं। हम हर रोज सेमीनार कर लोगों को समझा रहे हैं कि कैशलेश ट्रांजक्शन करना कितना कारगर साबित हो सकता है।