फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   Satpal of village Ludesar planted Thai apple plum orchard in 6 acres of rainforest, earning millions

गांव लुदेसर के सतपाल ने 6 एकड़ बरानी जमीन में थाई एप्पल बेर का बाग लगाया, हो रही लाखों की कमाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:54 PM IST
विज्ञापन
Satpal of village Ludesar planted Thai apple plum orchard in 6 acres of rainforest, earning millions
किसान द्वारा की गई थाई एप्पल बेर की खेती। - फोटो : Sirsa
नाथूसरी चोपटा (सिरसा)। किसान का काम हमेशा ही खेती से जुड़ा होता है। किसान नौकरी मिलने पर कितने भी बड़े पद पर पहुंच जाएं। लेकिन हमेशा से ही खेती से संबंधित कार्य में उसकी रुचि कम नहीं होती। किसान को खेती का पूरा ज्ञान होता है और हर समय उसे बढ़ावा देने के बारे में सोचता है। गांव लुदेसर निवासी इतिहास प्रवक्ता सतपाल गाट ने 4 साल से बरानी पड़ी 6 एकड़ जमीन में थाई एप्पल बेर की खेती शुरू की।
विज्ञापन

इस कार्य में सतपाल की एमए, बीएड पत्नी सुलोचना ने भरपूर सहयोग दिया। जिससे परंपरागत खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी शुरू हो गई। वर्तमान में थाई एप्पल बेर से 6 लाख रुपये सालाना बचत होती है। अध्यापन के साथ-साथ आधुनिक खेती कार्य को बढ़ावा देने दंपती सतपाल और सुलोचना को गांव तथा आसपास के क्षेत्र में मान व सम्मान मिल रहा है। सतपाल ने बताया कि बरानी या बंजर जमीन में आधुनिक तरीके से विभिन्न किस्म के बाग या सब्जियां इत्यादि उगाकर कमाई करके आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
विज्ञापन

थाई एप्पल बेर स्वास्थ्य के लिए है बेहद गुणकारी
किसान सतपाल ने बताया कि नौकरी करने के साथ-साथ खेती की भी संभाल जरूरी होती है। बरानी पड़ी 6 एकड़ जमीन में बारिश होने पर ही थोड़ी बहुत पैदावार होती थी। अगर बारिश नहीं होती है तो जमीन खाली रह जाती। यह देख सतपाल ने बरानी जमीन से पैदावार लेने का जरिया खोजना शुरू किया। सतपाल ने बागवानी विभाग से जानकारी लेकर 4 साल पहले राजस्थान के सीकर से थाई एप्पल बेर के पौधे लाकर खेत में लगाए। बागवानी के इस कार्य में उनकी पत्नी सुलोचना ने भी भरपूर सहयोग दिया। पहले साल तो दूर-दूर से पानी लाकर पौधों को सिंचित करना पड़ा। फिर उन्होंने दूसरे खेत में ट्यूबवेल लगाकर अपने खर्चे से पाइप लाइन डालकर सिंचाई के पानी का प्रबंध किया। थाई एप्पल बेर में मिठास ज्यादा होती है खाने में सेब जैसा स्वाद देता है। यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है। थाई एप्पल बेर साल में दो बार लगते हैं। गर्मियों के मौसम में इसके फल खराब होने का अंदेशा ज्यादा हो जाता है। सर्दियों के मौसम में फलों की पैदावार और बिक्री दोनों ही ज्यादा होती है। थाई एप्पल बेर की उपज प्रति एकड़ के हिसाब से 100 क्विंटल के आसपास हो जाती है। आमतौर पर भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिलते हैं। आसपास के गांवों के लोग भी अब उनसे थाई एप्पल बेर के बाग को देखकर उनसे जानकारी लेकर लगाने लगे हैं। सतपाल का कहना है कि किसान परंपरागत खेती के साथ जमीन की उपजाऊ शक्ति के अनुसार किन्नू, अमरूद, थाई एप्पल बेर, अंगूर इत्यादि का बाग लगा कर कमाई करके पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

खेती करने के साथ-साथ इतिहास प्रवक्ता हैं सतपाल
सतपाल किसानी के साथ-साथ सिरसा में स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ाते हैं। खेती में उनका शौक होने के चलते वे इसे भी पूरी गंभीरता के साथ काम करते हैं। सतपाल का कहना है कि स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाने के बाद जो समय अतिरिक्त बचता है उसमें वह खेती करते हैं। सतपाल का कहना है वो एक किसान परिवार से है। इसलिए बचपन से खेती के बारे में भली भांति जानते हैं। इसलिए वह सरकारी नौकरी के साथ-साथ खेती भी करते हैं। वहीं उनकी पत्नी सुलोचना भी एमए, बीएड हैं जो घर के कामकाज के साथ-साथ खेती में भरपूर सहयोग देती है।

मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च हो जाता है ज्यादा
किसान सतपाल ने बताया कि उनके गांव के आसपास फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट ना होने के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। फलों को बेचने के लिए हिसार, जींद, करनाल या पंजाब में लेकर जाना पड़ता है। जिससे यातायात खर्चा ज्यादा हो जाता है। इनकी मांग है कि नाथूसरी चोपटा में फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार को फलों की खेती करने के लिए अनुदान या लोन का सरलीकरण किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed