{"_id":"6533fd5c0dbe86a89f0ce0a4","slug":"instead-of-darkening-the-environment-with-smoke-by-burning-firecrackers-light-up-the-city-by-lighting-ghee-lamps-sirsa-news-c-128-1-sir1002-8546-2023-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: पटाखे जलाकर पर्यावरण में धुएं का अंधेरा करने के बजाय घी के दीये जगाकर शहर को जगमग करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: पटाखे जलाकर पर्यावरण में धुएं का अंधेरा करने के बजाय घी के दीये जगाकर शहर को जगमग करें
Sat, 21 Oct 2023 10:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 21 Oct 2023 10:03 PM IST
विज्ञापन
सिरसा।
दिवाली पर पटाखों का शोरगुल न केवल प्रदूषण को बढ़ाता है, बल्कि बुजुर्गाें, सांस के रोगियों व दिल के मरीजों को भी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए दिवाली पर पटाखे जलाकर पर्यावरण में धुएं का अंधेरा करने के बजाय घी के दीये जगाकर शहर को जगमग करें। यह खुशियों का त्योहार है, इसको मनाने के लिए महज पटाखों व आतिशबाजी पर ही केंद्रित नहीं होना चाहिए। यह कहना है जनमंच में अपनी राय देने वाले जागरूक नागरिकों का।
शहरवासियों की माने तो आतिशबाजी पूरी तरह से बैन होनी चाहिए और लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जाना चाहिए। लोगों को पटाखों चलाने की जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, जिससे आपसी भाईचारा बढ़े।
किसी भी समस्या के समाधान के लिए बेहद जरूरी है कि लोगों में खुद के लिए जागरूकता हो, सचेतता हो। निसंदेह प्रदूषण मानव जीवन के लिए खतरा है। यह खतरा हम खुद ही मोल ले रहे हैं और उसके अपने हिसाब से तर्क भी दे रहे हैं। इसको रोकने के लिए हमें त्योहारों के महत्व को समझना होगा और उसी के अनुसार अपना कर्म करना होगा। तब जाकर ही हम खुद भी बच सकते हैं और मानवीय जीवन को भी बचा सकते हैं। लोगों को ग्रीन पटाखे जलाने चाहिए ताकि प्रदूषण न हो। सभी को प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने का संकल्प लेना चाहिए।-
विज्ञापन
कृष्ण कुमार निर्माण, समाज सेवी
पटाखों व फसल अवशेष जलाने से अक्टूबर-नवंबर के दौरान वायु प्रदूषण सामयिक रूप से बढ़ जाता है। इनके सहायक कारक हैं जो पूरे वर्ष बने रहते हैं। ऐसे में केंद्र राज्य सरकार को मिलकर इस पर कड़े कदम उठाने चाहिए और लोग खुद भी प्रदूषण रहित पर्यावरण को तैयार करें। लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना चाहिए। जागरूकता ही वह कड़ी है जो इसका अचूक समाधान है। हमें भगवान श्रीराम की तरह शांत व आज्ञापालक होना चाहिए। पटाखों को छोड़कर दीयों की रोशनी से दिवाली जगमग करनी चाहिए।
डॉ. कुलदीप सिंह ढींडसा, महानिदेशक, जननायक चौधरी देवीलाल विद्यापीठ सिरसा।
दिवाली दीपों का त्योहार है। पटाखों को बजाने के बजाए लोग दीप जलाकर खुशी जाहिर करें। जिस राशि से हम पटाखों की खरीद करते हैं वह किसी सामाजिक काम में लाकर लोगों की सहायता की जा सकती है। जिले में काफी लोग ऐसे हैं जिनका कोई भी नहीं है। उन्हें मिठाई व उनके जरूरत की वस्तु दानकर उन्हें भी खुशियों में शामिल कर सकते हैं। पटाखों के कारण वायु व ध्वनि प्रदूषण होता है। जबकि आप अगर पटाखों के बजाय दीप जलाते हो तो उससे रोशनी होगी। पर्यावरण प्रदूषण करने से आने वाले समय में हमें ही परेशानी होगी और बीमारी के चपेट में आना पड़ेगा। इस लिए लोगों को जागरूक होना आवश्यक है। - सुनीता सहारण, समाजसेवी
विज्ञापन
दिवाली पर पटाखों का शोरगुल न केवल प्रदूषण को बढ़ाता है, बल्कि बुजुर्गाें, सांस के रोगियों व दिल के मरीजों को भी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए दिवाली पर पटाखे जलाकर पर्यावरण में धुएं का अंधेरा करने के बजाय घी के दीये जगाकर शहर को जगमग करें। यह खुशियों का त्योहार है, इसको मनाने के लिए महज पटाखों व आतिशबाजी पर ही केंद्रित नहीं होना चाहिए। यह कहना है जनमंच में अपनी राय देने वाले जागरूक नागरिकों का।
शहरवासियों की माने तो आतिशबाजी पूरी तरह से बैन होनी चाहिए और लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जाना चाहिए। लोगों को पटाखों चलाने की जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, जिससे आपसी भाईचारा बढ़े।
विज्ञापन
किसी भी समस्या के समाधान के लिए बेहद जरूरी है कि लोगों में खुद के लिए जागरूकता हो, सचेतता हो। निसंदेह प्रदूषण मानव जीवन के लिए खतरा है। यह खतरा हम खुद ही मोल ले रहे हैं और उसके अपने हिसाब से तर्क भी दे रहे हैं। इसको रोकने के लिए हमें त्योहारों के महत्व को समझना होगा और उसी के अनुसार अपना कर्म करना होगा। तब जाकर ही हम खुद भी बच सकते हैं और मानवीय जीवन को भी बचा सकते हैं। लोगों को ग्रीन पटाखे जलाने चाहिए ताकि प्रदूषण न हो। सभी को प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने का संकल्प लेना चाहिए।-
विज्ञापन
कृष्ण कुमार निर्माण, समाज सेवी
पटाखों व फसल अवशेष जलाने से अक्टूबर-नवंबर के दौरान वायु प्रदूषण सामयिक रूप से बढ़ जाता है। इनके सहायक कारक हैं जो पूरे वर्ष बने रहते हैं। ऐसे में केंद्र राज्य सरकार को मिलकर इस पर कड़े कदम उठाने चाहिए और लोग खुद भी प्रदूषण रहित पर्यावरण को तैयार करें। लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना चाहिए। जागरूकता ही वह कड़ी है जो इसका अचूक समाधान है। हमें भगवान श्रीराम की तरह शांत व आज्ञापालक होना चाहिए। पटाखों को छोड़कर दीयों की रोशनी से दिवाली जगमग करनी चाहिए।
डॉ. कुलदीप सिंह ढींडसा, महानिदेशक, जननायक चौधरी देवीलाल विद्यापीठ सिरसा।
दिवाली दीपों का त्योहार है। पटाखों को बजाने के बजाए लोग दीप जलाकर खुशी जाहिर करें। जिस राशि से हम पटाखों की खरीद करते हैं वह किसी सामाजिक काम में लाकर लोगों की सहायता की जा सकती है। जिले में काफी लोग ऐसे हैं जिनका कोई भी नहीं है। उन्हें मिठाई व उनके जरूरत की वस्तु दानकर उन्हें भी खुशियों में शामिल कर सकते हैं। पटाखों के कारण वायु व ध्वनि प्रदूषण होता है। जबकि आप अगर पटाखों के बजाय दीप जलाते हो तो उससे रोशनी होगी। पर्यावरण प्रदूषण करने से आने वाले समय में हमें ही परेशानी होगी और बीमारी के चपेट में आना पड़ेगा। इस लिए लोगों को जागरूक होना आवश्यक है। - सुनीता सहारण, समाजसेवी