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बेसहारा पशुओं से शहर कैसे होगा मुक्त, प्रशासन की कार्रवाई से पहले ही मालिकों को लग जाती है भनक
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रानियां रोड स्थित कॉलोनी में घूमते बेसहारा पशु।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। शहर की सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु हादसे की वजह बन रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाया है। शहर के अकेले रानियां रोड पर ही पशुओं की 50 से अधिक डेयरिया हैं। जिनके विस्थापन के लिए अब तक कोई कार्य नहीं हो पाया है। हालांकि पशु डेयरियां शहर से बाहर करने की योजना बनाई गई थी लेकिन यह भी ठंडे बस्ते में चली गई। इसके अलावा लोग घरों में भी पशुपालन कर रहे हैं। जिनके लिए भी कोई नियम नहीं है।
डेयरी संचालक तथा पशुपालक बछड़ा तथा बिना दूध वाली गाय को सड़कों पर खुला छोड़ देते है। इसके अलावा कुछ पशुपालक दिन के समय तो दुधारू गाय को छोड़ देते है जो दिन भर बाजारों में रेहड़ियों पर फल सब्जी तथा अन्य वस्तु खाकर शाम के समय लौट जाती है। दूध निकालने के बाद फिर से उसे खुला छोड़ दिया जाता है। इस कारण सड़कों पर खुले घूम रहे बेसहारा पशुओं से वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। जिसके चलते कोई गंभीर रूप से घायल होता है तो कोई अकाल मौत का ग्रास बन जाता है।
पशुओं के कानों में लगे हैं टैग
इन अधिकांश बेसहारा पशुओं के कानों में टैग लगे हुए हैं। जिससे इन पशुओं की पहचान की जा सकती है कि यह पशु बेसहारा है या किसी पशुपालक के नाम है। इस प्रकार के टैग दो कारणों से लगाए जाते हैं जिनमें एक तो पशु में वैक्सीनेशन व दूसरा सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने वाले पशु को लगाया जाता है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन व संबंधित विभाग यह पता नहीं लगा पा रहा है कि ये पशु कहां और किसके हैं।
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पशु पकड़ों अभियान की लग जाती है भनक
प्रशासन की तरफ से कई बार इन बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। लेकिन इसमें अधिक सफलता नहीं मिली। इसकी मुख्य वजह है कि जब भी विभाग व प्रशासन की तरफ से कार्रवाई की योजना बनाई जाती है उसी समय पशुपालकों को इसकी सूचना मिल जाती है। जिसके बाद वे अपने पशुओं पहचान कर उसे बांध लेते हैं।
पशु डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए योजना तैयार की जा रहा है। जिसके चलते जल्द ही इस समस्या का समाधान करवाया जाएगा। जिन पशुपालकों ने शहर में खुले में पशु छोड़ रखे है उन्हें भी नोटिस दिए जा रहे हैं और चालान कर रहे हैं।
-संदीप मलिक, ईओ नगर परिषद सिरसा।
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डेयरी संचालक तथा पशुपालक बछड़ा तथा बिना दूध वाली गाय को सड़कों पर खुला छोड़ देते है। इसके अलावा कुछ पशुपालक दिन के समय तो दुधारू गाय को छोड़ देते है जो दिन भर बाजारों में रेहड़ियों पर फल सब्जी तथा अन्य वस्तु खाकर शाम के समय लौट जाती है। दूध निकालने के बाद फिर से उसे खुला छोड़ दिया जाता है। इस कारण सड़कों पर खुले घूम रहे बेसहारा पशुओं से वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। जिसके चलते कोई गंभीर रूप से घायल होता है तो कोई अकाल मौत का ग्रास बन जाता है।
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पशुओं के कानों में लगे हैं टैग
इन अधिकांश बेसहारा पशुओं के कानों में टैग लगे हुए हैं। जिससे इन पशुओं की पहचान की जा सकती है कि यह पशु बेसहारा है या किसी पशुपालक के नाम है। इस प्रकार के टैग दो कारणों से लगाए जाते हैं जिनमें एक तो पशु में वैक्सीनेशन व दूसरा सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने वाले पशु को लगाया जाता है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन व संबंधित विभाग यह पता नहीं लगा पा रहा है कि ये पशु कहां और किसके हैं।
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पशु पकड़ों अभियान की लग जाती है भनक
प्रशासन की तरफ से कई बार इन बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। लेकिन इसमें अधिक सफलता नहीं मिली। इसकी मुख्य वजह है कि जब भी विभाग व प्रशासन की तरफ से कार्रवाई की योजना बनाई जाती है उसी समय पशुपालकों को इसकी सूचना मिल जाती है। जिसके बाद वे अपने पशुओं पहचान कर उसे बांध लेते हैं।
पशु डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए योजना तैयार की जा रहा है। जिसके चलते जल्द ही इस समस्या का समाधान करवाया जाएगा। जिन पशुपालकों ने शहर में खुले में पशु छोड़ रखे है उन्हें भी नोटिस दिए जा रहे हैं और चालान कर रहे हैं।
-संदीप मलिक, ईओ नगर परिषद सिरसा।

कॉलोनी की गली में पशुओं को बांधने के लिए बनाई गई व्यवस्था।- फोटो : Sirsa