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Sirsa News: मौसम की चाल से चकमा खा रहे किसान
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शाम के समय हकली धूल आई आसमान में नजर
डिंग मंडी/सिरसा। क्षेत्र में बीते एक सप्ताह से मौसम लगातार करवट बदल रहा है। दिन में गर्मी और शाम-सुबह हल्की ठंडक का असर बना हुआ है। रविवार शाम को आसमान में धूल की परत छाई रही, जिससे तेज हवाएं और आंधी की आशंका बनी रही। ऐसे में बदलता मौसम किसानों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है, खासकर उन किसानों के लिए जो एंड्रॉयड मोबाइल या तकनीकी साधनों का उपयोग नहीं करते।
जानकारी के अभाव में किसानों को अपनी फसलों में नुकसान झेलना पड़ रहा है। जिले के अनेक किसान इसी समस्या से जूझ रहे हैं। यहां आज भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत तरीकों से ही खेती कर रहे हैं। मोबाइल एप्स और सरकारी योजनाओं की उपलब्धता के बावजूद अधिकतर किसान मौसम के सटीक पूर्वानुमान से वंचित हैं।
किसान आसमान की स्थिति और अनुभव के आधार पर ही फसल की योजना बनाते हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें 24 से 48 घंटे पहले मौसम की पुख्ता जानकारी मिल जाए, तो वे बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या तेज लू से फसलों को काफी हद तक बचा सकते हैं।
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रविवार को अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते 24 घंटे में क्षेत्र में 4.2 एमएम बारिश हुई, जिससे सुबह और शाम के समय मौसम में ठंडक बनी हुई है।
रबी में नुकसान, अब खरीफ के लिए चिंता
रबी सीजन में अचानक आई बारिश ने सरसों और गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया। अब खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हैं, लेकिन मौसम की सटीक जानकारी को लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो ‘मेघदूत एप’ और ‘कृषि मौसम सेवा’ जैसे माध्यमों से मौसम संबंधी जानकारी किसानों को दी जा रही है। अब विभाग गांव स्तर पर जागरूकता शिविर लगाने की योजना बना रहा है, ताकि किसान इन एप्स का सही तरीके से इस्तेमाल करना सीख सकें।
किसानों ने रखी ये मांगें
- पंचायत या कृषि विभाग गांव के मंदिर या प्रमुख स्थान से मौसम संबंधी सूचना मुनादी के माध्यम से दिलवाए।
- गांव के मुख्य चौराहे पर सूचना बोर्ड लगाकर अपडेट दें।
- स्थानीय मोबाइल ग्रुप बनाकर किसानों तक सटीक मौसम पूर्वानुमान पहुंचाया जाए।
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हम लोग तो आसमान देखकर अंदाजा लगाते हैं। कब बारिश हो जाए, कुछ पता नहीं चलता। मैं फोन नहीं रखता और न ही फोन देखने का समय है। — दलीप सिंह, किसान
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मैं फेसबुक और यूट्यूब से मौसम देख लेता हूं, लेकिन गांव के बाकी लोग नहीं कर पाते। बहुत लोगों को तो फोन चलाना भी नहीं आता। — सतपाल, किसान
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जानकारी के अभाव में किसानों को अपनी फसलों में नुकसान झेलना पड़ रहा है। जिले के अनेक किसान इसी समस्या से जूझ रहे हैं। यहां आज भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत तरीकों से ही खेती कर रहे हैं। मोबाइल एप्स और सरकारी योजनाओं की उपलब्धता के बावजूद अधिकतर किसान मौसम के सटीक पूर्वानुमान से वंचित हैं।
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किसान आसमान की स्थिति और अनुभव के आधार पर ही फसल की योजना बनाते हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें 24 से 48 घंटे पहले मौसम की पुख्ता जानकारी मिल जाए, तो वे बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या तेज लू से फसलों को काफी हद तक बचा सकते हैं।
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रविवार को अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते 24 घंटे में क्षेत्र में 4.2 एमएम बारिश हुई, जिससे सुबह और शाम के समय मौसम में ठंडक बनी हुई है।
रबी में नुकसान, अब खरीफ के लिए चिंता
रबी सीजन में अचानक आई बारिश ने सरसों और गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया। अब खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हैं, लेकिन मौसम की सटीक जानकारी को लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो ‘मेघदूत एप’ और ‘कृषि मौसम सेवा’ जैसे माध्यमों से मौसम संबंधी जानकारी किसानों को दी जा रही है। अब विभाग गांव स्तर पर जागरूकता शिविर लगाने की योजना बना रहा है, ताकि किसान इन एप्स का सही तरीके से इस्तेमाल करना सीख सकें।
किसानों ने रखी ये मांगें
- पंचायत या कृषि विभाग गांव के मंदिर या प्रमुख स्थान से मौसम संबंधी सूचना मुनादी के माध्यम से दिलवाए।
- गांव के मुख्य चौराहे पर सूचना बोर्ड लगाकर अपडेट दें।
- स्थानीय मोबाइल ग्रुप बनाकर किसानों तक सटीक मौसम पूर्वानुमान पहुंचाया जाए।
हम लोग तो आसमान देखकर अंदाजा लगाते हैं। कब बारिश हो जाए, कुछ पता नहीं चलता। मैं फोन नहीं रखता और न ही फोन देखने का समय है। — दलीप सिंह, किसान
मैं फेसबुक और यूट्यूब से मौसम देख लेता हूं, लेकिन गांव के बाकी लोग नहीं कर पाते। बहुत लोगों को तो फोन चलाना भी नहीं आता। — सतपाल, किसान