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हत्यारे दोस्त को आजीवन कारावास
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2015 01:37 AM IST
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गांव गिगोरानी में पिछले वर्ष हुए संजय हत्याकांड के दोषी को सेशन कोर्ट ने आजीवन कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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अभियोजन के अनुसार गिगोरानी निवासी संजय कुमार की गांव के रोहताश से अच्छी दोस्ती थी। सितंबर 2014 में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था।
एक अक्टूबर को दोनों के बीच खेत में झगड़ा हो गया। इस दौरान रोहताश ने डंडे से पीट-पीटकर संजय को मार डाला। इसी समय संजय का भतीजा सोनू स्कूल से पढ़कर खेत के रास्ते घर लौट रहा था।
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उसने इस घटना को अपनी आंखों से देखा और घर आकर परिजनों को इसके बारे में बताया। परिवार वाले खेतों में पहुंचे तो संजय मृत हालत में मिला।
मर्डर की सूचना मिलते ही चौपटा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले सोनू के बयान दर्ज करके आरोपी रोहताश के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया।
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सेशन जज बिमलेश तंवर ने सोनू की गवाही व अन्य सबूतों के आधार पर सोमवार को रोहताश को दोषी करार देकर उम्र कैद की सजा सुनाई।
साधू हत्याकांड में सभी आरोपी बरी
सिरसा। कालांवाली रेलवे स्टेशन के पास सितंबर 2014 में हुए साधू हत्याकांड में सेशन कोर्ट ने सभी हत्यारोपियों को बरी कर दिया है।
जीआरपी हत्यारोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत अदालत समक्ष पेश नहीं कर सकी और इसी आधार पर न्यायाधीश बिमलेश तंवर की अदालत ने हत्यारोपियों को बरी कर दिया।
घटनाक्रम अनुसार 13 सितंबर 2014 को रेलवे स्टेशन के पास जीआरपी को खून से लथपथ एक साधू का शव मिला था।
पुलिस साधू की शिनाख्त तो नहीं करवा सकी लेकिन गुत्थी को सुलझाने का दावा करते हुए अलवर निवासी दलबीर सिंह, गुरबचन सिंह व कालांवाली निवासी विजय कुमार को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
जीआरपी का कहना था कि उक्त तीनों ने शराब के नशे में साधू को मौत के घाट उतार डाला। हत्याकांड का मुख्य कारण साधू द्वारा बताए गए सट्टे के नंबर का गलत निकलना बताया गया।
सेशन कोर्ट में जीआरपी एक भी ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई और न्यायाधीश बिमलेश तंवर ने तीनों आरोपियों को सबूतों के अभाव में सोमवार शाम बरी कर दिया।