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अलीकां के पैक्स में निकला घोटाले का जिन,

Fri, 24 Nov 2017 01:19 AM IST
Updated Fri, 24 Nov 2017 01:19 AM IST
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अलीकां के पैक्स में निकला घोटाले का जिन,
ओढां।
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पैक्स सोसायटियाें को भ्रष्ट कर्मचारियों ने गबन का जरिया बनाकर रख दिया है। ताजा मामला गांव अलीकां के पैक्स का है जहां करोड़ों रुपये के घोटाले का जिन बाहर निकला है। मामला सामने आने के बाद कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक हड़कंप मचा हुआ है। मामले की जांच बैठा दी गई है, लेकिन जांच अधिकारी इस मामले में जांच का हवाला देकर कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं तो वहीं कोई भी कर्मचारी इस मामले में कुछ भी बताने से कन्नी काटते हुए खुद को पाक साफ बताते नजर आ रहे हैं।
पैक्स में एक करोड़ 14 लाख 50 हजार रुपये का गबन हुआ है। मामले से तब पर्दा उठा जब एक व्यक्ति ने सीएम विंडो में शिकायत डाली। अलीकां निवासी सुखेदव सिंह नामक व्यक्ति ने सीएम विंडो में शिकायत डाली थी कि अलीक ां पैक्स में बड़ा घोटाला हुआ है जिसकी जांच होनी चाहिए। शिकायत सीएम विंडो से होती हुई डबवाली के सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा के पास पहुंची तो उन्होंने विभाग के निरीक्षक आशीष बिश्नोई को जांच करने के निर्देश दिए। जांच टीम ने पैक्स का रिकॉर्ड कब्जेे में लेकर जांच शुरू कर दी। अधिकारी ने जब रिकॉर्ड का अवलोकन किया तो गबन की परतें उधड़नी शुरू हो गईं। सूत्रों के अनुसार अधिकारी ने जब पूरे रिकॉर्ड का बारीकी से अवलोकन किया तो उसमें करीब 14 लाख 50 हजार रुपये का गबन होना पाया गया। इस गबन मामले में प्राथमिक तौर पर पैक्स प्रबंधक लपेटे में आया है, लेकिन ज्यों-ज्यों जांच आगे बढे़गी त्यों-त्यों कई बड़ी मछलियाें पर भी गाज गिरना स्वाभाविक माना जा रहा है।
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यूं लगाते रहे अधिकारी पैक्स को चूना
पैक्स में जो भी वसूली आती थी उसमें पैक्स प्रबंधक सुभाष चंद्र कुल रकम में से जोड़ कम दिखाकर लाखों रुपये अपनी जेब में डालता रहा। ये सिलसिला पिछले पांच वर्ष से बेरोक-टोक चलता रहा। मामले से पर्दा तब उठा जब मौजगढ़ के एक किसान ने संदेह होने पर सीएम विंडो में शिकायत डाली, जिसके बाद महाप्रबंधक ने चार सदसीय टीम को जांच सौंपी है। इस घोटाले में मामले में मुख्य बात ये है कि पांच वर्ष तक पैक्स को चूना लगता रहा लेकिन इस दौरान किसी भी अधिकारी ने रिकॉर्ड चेक करने तक की जहमत नहीं उठाई।
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अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में बैंक अधिकारियों से लेकर तत्कालीन महाप्रबंधक तक सवाल उठने शुरू हो गए हैं, क्योंकि उन्होंने घोटाले के समय पिछले पांच वर्ष तक पैक्स का रिकॉर्ड तक जांचने की कोशिश नहीं की। नियमानुसार शाखा प्रबंधक कम ईओ और विकास अधिकारी द्वारा समय-समय पर पैक्स का रिकॉर्ड जांचना होता है। इस घोटाले में दूसरा बड़ा सवाल ये है कि पैक्स में हर वर्ष ऑडिट होती रही, लेकिन फिर भी गबन का सामने न आना अधिकारियों की भूमिका पर संदेह व्यक्त करता है। मामला सामने आने के बाद कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक सभी खुद को पाक साफ साबित करने की जुगत बैठाने में जुटे हुए हैं। जांच में पैक्स और शाखा प्रबंधक के अलावा कई अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पैक्स प्रबंधक ने अधिकारियों के सामने ये बताया है कि पूर्व ब्रांच मैनेजर और अन्य अधिकारी उससे समय-समय पर मोटी राशि ले जाते रहे हैं। जांच टीम जांच कर रही है कि आखिर इस खेल में किस-किस ने घोटाले की गोटियां खेली हैं।

सहायक रजिस्ट्रार ने महाप्रबंधक को करवाया अवगत
डबवाली के सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा महाप्रबंधक को भेजे पत्र में अवगत करवाया कि अलीकां में पैक्स में बड़ा घोटाला होना सामने आ रहा है। इस घोटाले के समय पैक्स प्रबंधक के तौर पर सुभाष चंद और शाखा प्रबंधक एवं कार्यकारी अधिकारी बीरबल राम तैनात थे। सहायक रजिस्ट्रार की सिफारिश पर महाप्रबंधक ने वहां के स्टाफ का तबादला कर दिया।

घोटाले का केंद्र बनी पैक्स
अगर पैक्स के घोटालों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इसकी फेहरिस्त काफी लंबी है। बिज्जूवाली में वर्ष 2015-16 में 12 लाख का घोटाला, ओढां में घोटाला, गोरीवाला में 2006 में दो लाख 60 हजार का घोटाला और 2013 में तत्कालीन प्रबंधक श्रीचंद द्वारा फर्जी लोन जारी कर 11 लाख का घोटाला, चोटाला में 2012 में बीज के अनुदान राशि में घोटाला काफी चर्चाआें में रह चुका है।

मेरे समय में नहीं हुआ घोटाला
मैं 10 जनवरी से 22 जून तक शाखा प्रबंधक के तौर पर रहा हूं। मैंने कई बार पैक्स का रिकॉर्ड जांचने की कोशिश की थी, लेकिन मुझे रिकॉर्ड नहीं दिया गया। इस बारे मैंने जीएम को मौखिक और लिखित रूप में अवगत भी करवा रखा है। जो घोटाला हुआ है वो मेरे कार्यकाल से पूर्व का है। मुझे इस बारे कोई जानकारी नहीं है और न ही इसमेें मेरी कोई भूमिका। मैं इस मामले में हर जांच के लिए तैयार हूं।

-बीरबल सिंह, तत्कालीन शाखा प्रबंधक अलीकां।


ये मामला एक व्यक्ति ने सीएम विंडो पर डाला था। मामला जैसे ही हमारे संज्ञान में आया तो हमने तुरंत मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी। इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी लगाई गई है, जिसमें एएम, डीईओ, अकाउंटेंट, निरीक्षक और रिटायर्ड क्लर्क को शामिल किया गया है। इस पूरे मामलेे में किस कर्मचारी या अधिकारी की क्या-क्या भूमिका रही है ये तो जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल हमने अलीकां के पूरे स्टाफ का तबादला कर दिया है। जिस समय घोटाला हुआ था उस समय पैक्स में सुभाष चंद और शाखा में बीरबल सिंह प्रबंधक के तौर पर तैनात था। पैक्स में कितने का घोटाला हुआ है और किस कर्मचारी की क्या भूमिका रही ये जांच में सामने आ जाएगा। फिलहाल मामले की जांच के उपरांत ही स्पष्ट कहा जा सकेगा।
-केके कुंडू, महाप्रबंधक।
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