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फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन मामला: एसआईटी ने एक और आरोपी को किया तलब
Updated Thu, 23 Aug 2018 01:44 AM IST
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चोपटा में फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन का मामला : एसआईटी ने एक और आरोपी को किया तलब
चोपटा। फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन मामले में चोपटा बिजली निगम के तत्कालीन कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। जेई का कार्यभार संभाले हुए चोपटा बिजली निगम के एक अन्य कर्मचारी को बुधवार सुबह पुलिस ने उसके घर से काबू किया है। इससे पहले एक अन्य जेई नाथूसरी कलां के लीलाधर को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। जोकि अब जेल की सलाखों के पीछे है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वो पूछताछ के लिए आरोपित जेई को लेकर आई है।
ये है पूरा मामला: वर्ष 2017 में चोपटा क्षेत्र में फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन का मामला सामने आया था। करीब डेढ़ दर्जन किसानों से बिजली निगम के ठेकेदार व निगम के अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने निगम की फर्जी रसीदें काटकर ट्यूबवेल का फर्जी कनेक्शन कर दिया था। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब निगम की विजिलेंस टीम ने एरिया में छापामारी की और रिकॉर्ड जांचा। आनन-फानन में बिजली निगम के अधिकारियों ने किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शनों को फर्जी घोषित कर उखाड़ दिए व किसानों पर ही एफआईआर दर्ज करवा दी गई। क्षेत्र में यह मामला काफी चर्चा में रहा और क्षेत्र के किसानों ने मामले में पीड़ित किसानों की आवाज उठाई। इसके बाद किसानों के फिर से कनेक्शन नियमित रूप से करवाए गए एवं किसानों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करवाया गया। बाद में मामले की जांच के लिए निगम की एसआईटी का गठन हुआ। जिसमें करीब चार दर्जन से ज्यादा कर्मचारी एवं अधिकारियों को चार्जशीट किया गया। अंतिम रिपोर्ट में निगम के ठेकेदार सुरजीत के अलावा निगम के आठ अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई। पहली एफआईआर 7 मई 2017, 4 एफआईआर 1 जुलाई 2017, 2 एफआईआर 2 जुलाई 2017 व 2 4 जुलाई 2017 को चोपटा के मौजूदा एसडीओ रवि कंबोज की तरफ से जेई लीलाधर, रणजीत, छोटूराम, प्रेम राठी, गुरचरण सिंह लहंगा, कैशियर जयसिंह, एसडीओ सुरेंद्र सहारण व एक अन्य के खिलाफ करवाई गई।
जांच प्रक्रिया में शामिल करने के लिए लेकर आए हैं कर्मचारी को:
चोपटा में फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन मामले में फिलहाल जांच चल रही है। जांच के संबंध में ही बिजली निगम के कर्मचारी को लेकर आए हैं। आगामी कार्रवाई जांच के उपरांत की की जाएगी।
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-डीएसपी नरसिंह, एसआईटी इंचार्ज।
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चोपटा। फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन मामले में चोपटा बिजली निगम के तत्कालीन कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। जेई का कार्यभार संभाले हुए चोपटा बिजली निगम के एक अन्य कर्मचारी को बुधवार सुबह पुलिस ने उसके घर से काबू किया है। इससे पहले एक अन्य जेई नाथूसरी कलां के लीलाधर को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। जोकि अब जेल की सलाखों के पीछे है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वो पूछताछ के लिए आरोपित जेई को लेकर आई है।
ये है पूरा मामला: वर्ष 2017 में चोपटा क्षेत्र में फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन का मामला सामने आया था। करीब डेढ़ दर्जन किसानों से बिजली निगम के ठेकेदार व निगम के अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने निगम की फर्जी रसीदें काटकर ट्यूबवेल का फर्जी कनेक्शन कर दिया था। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब निगम की विजिलेंस टीम ने एरिया में छापामारी की और रिकॉर्ड जांचा। आनन-फानन में बिजली निगम के अधिकारियों ने किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शनों को फर्जी घोषित कर उखाड़ दिए व किसानों पर ही एफआईआर दर्ज करवा दी गई। क्षेत्र में यह मामला काफी चर्चा में रहा और क्षेत्र के किसानों ने मामले में पीड़ित किसानों की आवाज उठाई। इसके बाद किसानों के फिर से कनेक्शन नियमित रूप से करवाए गए एवं किसानों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करवाया गया। बाद में मामले की जांच के लिए निगम की एसआईटी का गठन हुआ। जिसमें करीब चार दर्जन से ज्यादा कर्मचारी एवं अधिकारियों को चार्जशीट किया गया। अंतिम रिपोर्ट में निगम के ठेकेदार सुरजीत के अलावा निगम के आठ अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई। पहली एफआईआर 7 मई 2017, 4 एफआईआर 1 जुलाई 2017, 2 एफआईआर 2 जुलाई 2017 व 2 4 जुलाई 2017 को चोपटा के मौजूदा एसडीओ रवि कंबोज की तरफ से जेई लीलाधर, रणजीत, छोटूराम, प्रेम राठी, गुरचरण सिंह लहंगा, कैशियर जयसिंह, एसडीओ सुरेंद्र सहारण व एक अन्य के खिलाफ करवाई गई।
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जांच प्रक्रिया में शामिल करने के लिए लेकर आए हैं कर्मचारी को:
चोपटा में फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन मामले में फिलहाल जांच चल रही है। जांच के संबंध में ही बिजली निगम के कर्मचारी को लेकर आए हैं। आगामी कार्रवाई जांच के उपरांत की की जाएगी।
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-डीएसपी नरसिंह, एसआईटी इंचार्ज।