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टोल टैक्स को लेकर बिफरे सात गांवों के ग्रामीण, धरना देकर कहा हमें टोल मुक्त किया जाए

Fri, 13 Apr 2018 12:59 AM IST
Updated Fri, 13 Apr 2018 12:59 AM IST
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टोल टैक्स को लेकर बिफरे सात गांवों के ग्रामीण, धरना देकर कहा हमें टोल मुक्त किया जाए
अमर उजाला ब्यूरो
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ओढां (सिरसा)।
राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर नौ पर गांव र्खुईयां मलकाना के निकट हाईवे अथोरिटी द्वारा बनाए गए टोल प्लाजा पर टोल टैक्स को लेकर साथ लगते गांवों के लोगों ने धरना प्रदर्शन किया। सूचना पाकर थाना प्रभारी कंवर सिंह, नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह और टोल प्लाजा के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की। करीब छह घंटे तक चली जद्दोजहद उपरांत ग्रामीणों व कंपनी के अधिकारियों केे बीच सहमति बनी तब जाकर लोगों ने धरना समाप्त किया।
गांव खुईयां मलकाना, मिठड़ी, नीलियांवाली, जंडवाला जटान, चोरमार, पाना और मलिकपुरा आदि गांवों के काफी लोग वीरवार को खुईयां मलकाना के निकट स्थित टोल प्लाजा पर एकत्रित हुए और विरोध प्रदर्शन करते हुए टोल नाके पर पर बैठ गए। सूचना पाकर थाना प्रभारी कंवर सिंह मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी ने धरना दे रहे लोगों को कहा कि वे राजमार्ग के से हटकर अन्य जगह बैठें अन्यथा पुलिस को उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विवश होना पड़ेगा। जिसके बाद ग्रामीण हाईवे से खड़े होकर अन्य जगह धूप में बैठ गए और अपना रोष जारी रखा। प्रदर्शन कर रहे मिठड़ी के सरपंच गुरपाल सिंह, नीलियांवाली के हरसिमरन सिंह, पाना के गुरप्रीत सिंह, जंडवाला के जगसीर सिंह, मलिकपुरा के पूर्व सरपंच इकबाल सिंह, खुईयां के सरपंच प्रतिनिधि संजय मेहता, नंबरदार सुखमेल सिंह मिठड़ी, अधिवक्ता मनिंद्र सिंह व भोला सिंह चोरमार आदि ने बताया कि उनके गांव टोल प्लाजा के बिल्कुल निकट पड़ते हैं। जिनमें से खुईयां मलकाना व नीलियांवाली करीब दो किलोमीटर ही पड़ते हैं जबकि गांव मिठड़ी भी करीब तीन किलोमीटर ही पड़ता है।
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उन्होंने बताया कि उन्हें दिन में कई बार खेत केे अलावा अन्य कार्याें के लिए डबवाली जाना होता है। इसके अतिरिक्त बच्चों को स्कूल छोड़ने व अन्य घरेलू कार्याें के लिए इस टोल नाके से होकर गुजरना पड़ता है। जिसके चलते उन्हें दिन में बार-बार टोल टैक्स अदा करना काफ ी महंगा साबित होगा। उन्होंने कहा कि अगर वे कर्मचारियों से कहते हैं तो वे उन्हें 255 रुपये का मासिक पास बनवाने की बात कहते हैं। उन्होंने बताया कि खुईयां से सिरसा करीब 50 किलोमीटर पड़ता है जहां रास्ते में कोई टोल नाका नहीं है। अगर वे अपने गांव से दो किलोमीटर डबवाली की ओर जाते हैं तो उन्हें आने-जाने में करीब 70 रुपये टोल टैक्स देना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि उनके अधिकांश कार्य डवबाली से पूरे होते हैं इसलिए टोल नाके के आस-पास के गांवों को टोल टैक्स से मुक्त किया जाए। गौरतलब हो कि टोल नाका 31 मार्च को शुरू हुआ था।
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घंटों चला बातचीत का दौर
प्रदर्शनकारियों ने टोल नाका के मैनेजर मोनू परमार से मिलकर टोल टैक्स न वसूलने की मांग की। इस बात पर मैनेजर ने ग्रामीणों को एनएचआई के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे उन्हें टोल मुक्त कर दिया जाए, लेकिन ग्रामीणों के न मानने पर मैनेजर ने इसकी सूचना कंपनी के अधिकारियों को दी। जिसके कुछ समय बाद कंपनी के पदाधिकारी कुलवीर अहलावत मौके पर पहुंचे। अधिकारी ने सरपंचों के प्रतिनिधि मंडल को बातचीत के लिए कार्यालय में बुलाया। सरपंचों ने उनके समक्ष अपनी मांगें दोहराते हुए कहा कि उन्हें टोल टैक्स से मुक्त किया जाए। इस बात पर अधिकारी ने लोगों को समझाया कि नियमों में किसी भी गांवों को टोल में छूट देने का कोई प्रावधान नहीं दिया गया, लेकिन वे भाईचारे के तौर पर कुछ निर्णय ले सकते हैं। अधिकारी ने कुछ सरपंचों के प्रतिनिधि मंडल पर बात छोड़ी की वे जो भी निर्णय लेंगे वे उस पर सहमति जताने की कोशिश करेंगे।

ये लिया सरपंचों ने फैसला
सरपंचोें ने बैठक कर फैसला लिया कि नीलियांवाली व खुईयां मलाकाना दोनों गांव टोल प्लाजा के करीब दो किलोमीटर के दायरे में आते हैं इसलिए उन्हें टोल मुक्त किया जाए। इसके अलावा जो अन्य गांव हैं उनसे प्रतिमाह 100 रुपये चार्ज वसूला जाए। ये निर्णय जब अधिकारी की टेबल पर पहुंचा तो उन्होंने प्रथम तौर पर इंकार कर दिया लेकिन ग्रामीणों द्वारा बार-बार आग्रह करने पर उन्होंने दोनों गांवों को टोल मुक्त करना स्वीकार कर लिया। लेकिन अन्य गांवों पर 125 रुपये चार्ज की सहमति बनी। सभी गांव इस फैसले पर अपनी स्वीकृति दे चुके थे लेकिन मिठड़ी के ग्रामीण इस बात पर अड़ गए कि उनका गांव टोल नाका से महज करीब तीन किलोमीटर ही पड़ता है इसलिए उन्हें भी चार्ज रहित दायरे में शामिल किया जाए। इस बात पर सहमति न बनने पर दो घंटे तक जद्दोजहद चलती रही। जिसके बाद मिठड़ी के ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनका निर्णय नहीं माना जाता है तो वे धरने से नहीं उठेंगे। विभिन्न गांवों के सरपंचों ने ग्रामीणों को समझाया लेकिन वे अपनी बात पर अडिग रहे। सरपंच व अन्य लोगों के बार-बार आग्रह पर कंपनी के अधिकारी ने अपनी मौखिक स्वीकृति दे दी।

ये हुआ फै सला
फैसले के मुताबिक खुईयां मलकाना, नीलियांवाली व मिठड़ी को टोल टैक्स रहित किया गया है, जबकि चोरमार, मलिकपुरा, जंडवाला जटान और पाना आदि को प्रति माह 125 रुपये का चार्ज दिया गया है, जिसमेें प्रावधान किया गया है कि ये नियम लोगों के निजी वाहनों के लिए लागू होगा। वाहन चालक का पता उक्त गांवों से ही होना चाहिए।

ये हैं प्रावधान
एनएचआई के प्रावधान के मुताबिक कार-जीप वैन या हल्के वाहन के लिए एक तरफ 50 रुपये व दोनों तरफ 75 रुपये तथा एक तरफा मासिक शुल्क 50 यात्रियों तक 1620 रुपये का प्रावधान है। हल्के वाणिज्य वाहन, हल्के माल वाहन या मिनी बस के लिए एक तरफ ा 80 व दोनों तरफा 120 रुपये तथा मासिक 2620 रुपये, ट्रक व बस एक तरफा 165 व दोनों तरफा 250 तथा मासिक 5490 रुपये, 3 धुरी वाले वाणिज्य वाहन का एक तरफा 180 व दोनों तरफा 270 रुपये तथा मासिक 5990 रुपये का प्रावधान है। इसके अलावा 7 या अधिक धुरी वाले वाहन पर 315 व दोनों तरफ से 475 एवं मासिक 10 हजार 480 रु पये का प्रावधान है। जो वाहन जिले में पंजीकृत है उनके चार्ज शुल्क में कटौती दी गई है।



एनएचआई के प्रावधानों में किसी को भी टोल टैक्स में छूट नहीं है। नियम सभी के लिए मान्य है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर कुछ राहत दी गई है जिसमें 3 गांवों को टैक्स रहित किया गया है तथा अन्य कुछ गांवों से 125 रुपये चार्ज लिया जाएगा।
-कुलवीर अलहावत, पदाधिकारी (टोल टैक्स कंपनी)।
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