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Sirsa News: फर्जी फर्म बनाकर 1.38 अरब कमाने के मामले में आरोपी को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी
Sun, 24 Aug 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 24 Aug 2025 12:34 AM IST
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सिरसा। फर्जी फर्मों के मामले में आरोपियों की परेशानियां बढ़ने वाली हैं क्योंकि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) हिसार ने एक मामले में आरोपी रहे शख्स को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी कर ली है। यह मामला सिगरेट, खल, बीड़ी, जर्दा, चावल और सीमेंट की बिक्री का फर्जी लेनदेन दिखाकर एक अरब 38 करोड़ 58 लाख 88 हजार एक सौ अस्सी रुपये की राशि प्राप्त करने का है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को कोर्ट में थी लेकिन बार एसोसिएशन के वर्क सस्पेंड के चलते नहीं हो पाई।
18 अगस्त को एसीबी ने मामले के आरोपी सिरसा निवासी विशाल कुमार को सरकारी गवाह बनाने की अनुमति के लिए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद न्यायाधीश राजन वालिया ने अभियुक्तों को इस आवेदन की सूचना देने और जवाब दाखिल करने के लिए 26 अगस्त की निर्धारित की है। कोर्ट की अनुमति मिल जाती है तो इस मामले में विशाल की गवाही सबसे अहम साबित हो सकती है।
इस मामले में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो (अब एसीबी) हिसार ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से पारित आदेश पर 26 जून 2022 को एफआईआर दर्ज की थी। एसीबी हिसार ने कोर्ट को बताया है कि मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन के मालिक विशाल कुमार वर्ष 2012 में पदम बंसल के कमीशन एजेंट की दुकान पर तीन हजार प्रति माह के वेतन पर काम करता था। पदम बंसल और अमित बंसल ने बैंक में खाता खोलने और जीवन बीमा के बहाने विशाल कुमार के मूल दस्तावेज और हस्ताक्षर ले लिए थे।
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विशाल कुमार को सिरसा स्थित फर्म विशाल कॉर्पोरेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस तरह उन्होंने मैसर्स भारत ट्रेडिंग कंपनी नाम से एक फर्म भी खोली थी और जिसका मालिक विजय कुमार बताया गया था जो उनकी दुकान में काम करता था। रजत ट्रेडिंग कंपनी के मालिक सुशील कुमार और लीलाधर बताए गए थे। ये अमित बंसल और उसके पिता पदम बंसल के साथ ड्राइवर के रूप में काम करते थे। इन फर्मों के सभी लेनदेन अमित बंसल और उसके पिता पदम बंसल की ओर से दिखाए गए थे।
डीईटी व स्टेनो से मिलीभगत कर फर्जी रिफंड लिया
मैसर्स पदम कुमार अमित कुमार की फर्म ने वर्ष 2012-13 में मैसर्स अग्रवाल एंड संस, मैसर्स ओम प्रकाश अश्विनी कुमार, मैसर्स बाला जी एंटरप्राइजेज सिरसा से 5.25 प्रतिशत वैट की दर से माल खरीदा और माल को मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन को बेचा जाना दर्शाया। इन फर्मों को अमित बंसल और पदम बंसल की ओर से पंजीकृत दिखाया गया है। उन्होंने इन फर्मों के बीच फर्जी व काल्पनिक लेनदेन दिखाकर वर्ष 2011-12 के लिए रिटर्न दाखिल किया और 4,96,454 रुपये का रिफंड लिया, वर्ष 2012-13 के लिए रिटर्न दाखिल करके मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन के खाते में 50,69,755 रुपये का फर्जी रिफंड लिया और सरकार को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने ईटीओ डीपी बेनीवाल, ईटीओ अश्विनी सोनी और स्टेनो संत स्वरूप के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्जी व काल्पनिक फर्म बनाकर और रिफंड लेने के इरादे से जाली इनपुट दिखाकर सरकार को नुकसान पहुंचाया।
एसआईटी को निर्धारित स्थान पर नहीं मिलीं फर्में
2011-12 से 2014-15 की अवधि के दौरान फर्म मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन ने सरकार को 31 करोड़ 53 लाख 73 हजार 950 रुपये राजस्व का नुकसान पहुंचाया। जांच के दौरान यह पाया गया कि दोनों फर्मों को आरोपी अमित बंसल के पते, यानी दुकान संख्या 8, दलाल स्ट्रीट जनता भवन रोड सिरसा पर पंजीकृत दिखाया गया था लेकिन दोनों फर्में वहां नहीं मिलीं। एसआईटी की टिप्पणियों के अनुसार दोनों फर्में यानी रजत ट्रेडर्स सिरसा और विशाल कॉर्पोरेशन फर्जी व काल्पनिक लेनदेन में शामिल पाई गईं। इसके अलावा उक्त दोनों फर्जी फर्मों ने तत्कालीन ईटीओ अश्वनी सोनी के साथ मिलीभगत करके 5.25 प्रतिशत कर की दर से 1,53,54,008 रुपये की बिक्री दिखाकर सरकार से 4,96,454 रुपये का फर्जी रिफंड ले लिया।
जुलाई 2016 में सीएजी ने तैयार की थी रिपोर्ट
जांच में यह भी पाया गया कि वर्ष 2014-15 में विशाल कॉर्पोरेशन ने सिगरेट, खल, बीड़ी, जर्दा, चावल और सीमेंट की बिक्री के फर्जी लेनदेन दिखाकर 1.38 अरब रुपये की राशि प्राप्त की। इस पर सीएजी (भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा विभाग) ने एक जुलाई 2016 को अपनी रिपोर्ट के माध्यम से 1,27,00,389 रुपये का कर मूल्यांकन निर्धारित किया। इस प्रकार कई और अवैधताएं और अनियमितताएं जैसा कि शिकायत में उल्लेख हैं।
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18 अगस्त को एसीबी ने मामले के आरोपी सिरसा निवासी विशाल कुमार को सरकारी गवाह बनाने की अनुमति के लिए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद न्यायाधीश राजन वालिया ने अभियुक्तों को इस आवेदन की सूचना देने और जवाब दाखिल करने के लिए 26 अगस्त की निर्धारित की है। कोर्ट की अनुमति मिल जाती है तो इस मामले में विशाल की गवाही सबसे अहम साबित हो सकती है।
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इस मामले में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो (अब एसीबी) हिसार ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से पारित आदेश पर 26 जून 2022 को एफआईआर दर्ज की थी। एसीबी हिसार ने कोर्ट को बताया है कि मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन के मालिक विशाल कुमार वर्ष 2012 में पदम बंसल के कमीशन एजेंट की दुकान पर तीन हजार प्रति माह के वेतन पर काम करता था। पदम बंसल और अमित बंसल ने बैंक में खाता खोलने और जीवन बीमा के बहाने विशाल कुमार के मूल दस्तावेज और हस्ताक्षर ले लिए थे।
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विशाल कुमार को सिरसा स्थित फर्म विशाल कॉर्पोरेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस तरह उन्होंने मैसर्स भारत ट्रेडिंग कंपनी नाम से एक फर्म भी खोली थी और जिसका मालिक विजय कुमार बताया गया था जो उनकी दुकान में काम करता था। रजत ट्रेडिंग कंपनी के मालिक सुशील कुमार और लीलाधर बताए गए थे। ये अमित बंसल और उसके पिता पदम बंसल के साथ ड्राइवर के रूप में काम करते थे। इन फर्मों के सभी लेनदेन अमित बंसल और उसके पिता पदम बंसल की ओर से दिखाए गए थे।
डीईटी व स्टेनो से मिलीभगत कर फर्जी रिफंड लिया
मैसर्स पदम कुमार अमित कुमार की फर्म ने वर्ष 2012-13 में मैसर्स अग्रवाल एंड संस, मैसर्स ओम प्रकाश अश्विनी कुमार, मैसर्स बाला जी एंटरप्राइजेज सिरसा से 5.25 प्रतिशत वैट की दर से माल खरीदा और माल को मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन को बेचा जाना दर्शाया। इन फर्मों को अमित बंसल और पदम बंसल की ओर से पंजीकृत दिखाया गया है। उन्होंने इन फर्मों के बीच फर्जी व काल्पनिक लेनदेन दिखाकर वर्ष 2011-12 के लिए रिटर्न दाखिल किया और 4,96,454 रुपये का रिफंड लिया, वर्ष 2012-13 के लिए रिटर्न दाखिल करके मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन के खाते में 50,69,755 रुपये का फर्जी रिफंड लिया और सरकार को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने ईटीओ डीपी बेनीवाल, ईटीओ अश्विनी सोनी और स्टेनो संत स्वरूप के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्जी व काल्पनिक फर्म बनाकर और रिफंड लेने के इरादे से जाली इनपुट दिखाकर सरकार को नुकसान पहुंचाया।
एसआईटी को निर्धारित स्थान पर नहीं मिलीं फर्में
2011-12 से 2014-15 की अवधि के दौरान फर्म मैसर्स विशाल कॉर्पोरेशन ने सरकार को 31 करोड़ 53 लाख 73 हजार 950 रुपये राजस्व का नुकसान पहुंचाया। जांच के दौरान यह पाया गया कि दोनों फर्मों को आरोपी अमित बंसल के पते, यानी दुकान संख्या 8, दलाल स्ट्रीट जनता भवन रोड सिरसा पर पंजीकृत दिखाया गया था लेकिन दोनों फर्में वहां नहीं मिलीं। एसआईटी की टिप्पणियों के अनुसार दोनों फर्में यानी रजत ट्रेडर्स सिरसा और विशाल कॉर्पोरेशन फर्जी व काल्पनिक लेनदेन में शामिल पाई गईं। इसके अलावा उक्त दोनों फर्जी फर्मों ने तत्कालीन ईटीओ अश्वनी सोनी के साथ मिलीभगत करके 5.25 प्रतिशत कर की दर से 1,53,54,008 रुपये की बिक्री दिखाकर सरकार से 4,96,454 रुपये का फर्जी रिफंड ले लिया।
जुलाई 2016 में सीएजी ने तैयार की थी रिपोर्ट
जांच में यह भी पाया गया कि वर्ष 2014-15 में विशाल कॉर्पोरेशन ने सिगरेट, खल, बीड़ी, जर्दा, चावल और सीमेंट की बिक्री के फर्जी लेनदेन दिखाकर 1.38 अरब रुपये की राशि प्राप्त की। इस पर सीएजी (भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा विभाग) ने एक जुलाई 2016 को अपनी रिपोर्ट के माध्यम से 1,27,00,389 रुपये का कर मूल्यांकन निर्धारित किया। इस प्रकार कई और अवैधताएं और अनियमितताएं जैसा कि शिकायत में उल्लेख हैं।