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Sirsa News: जगह जगह से टूटा चैनल, जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नहीं ली सुध
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टूटे हुए चैनल को दिखाते हुए ग्रामीण।
चोपटा। जल है तो कल है। ऐसे स्लोगन के माध्यम से जल संरक्षण की नसीहत देने वाला जन स्वास्थ्य विभाग खुद ही इसी जिम्मेदारी को निभाना भूल गया है। दरअसल, खंड के गांव राजपुरा साहनी में जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से 2008 में जलघर का निर्माण कार्य करवाया गया था। अब समय के अनुसार जनस्वास्थ्य विभाग की आरसीसी चैनल जगह-जगह टूट गई है।
इसे अब तक बदला नहीं किया गया। इस कारण जलघर के वाटर टैंक में पूरा पानी नहीं पहुंचता है। इस संबंध में ग्रामीण भीम सिंह, रविंद्र ने बताया कि इस बारे कई बार जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, परंतु पानी की बर्बादी को रोकने के लिए विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। पानी की कमी के कारण लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि विभाग पानी को बर्बाद कर रहा है।
पूर्व सीएम ने 18 लाख की परियोजना को दी थी मंजूरी
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समय में जलघर की मरम्मत के लिए 18 लाख रुपये मंजूर हुए थे। वह पैसा कहां पर लगाया गा है। उसका किसी को पता नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, 18 लाख रुपये का काम कागजों में ही पूरा किया जा चुका है। यदि यह बजट सही तरह से लग गया होता तो पानी बर्बाद नहीं होता।
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टैंक में नहीं हुई सफाई
ग्रामीणों के अनुसार, जलघर में पानी की आपूर्ति के लिए मात्र एक टैंक बनाया गया हैं। इससे गांव के साथ-साथ गांव की ढाणियों व गुसाईयाना की ढाणियों में पानी की सप्लाई दी जाती है। टैंक की सफाई समय पर न होने के कारण टैंक में गाद जमा हो रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, जलघर की सफाई की जिम्मेदारी सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है। ग्राम पंचायत को मनरेगा स्कीम के तहत समय अनुसार सफाई करवानी चाहिए।
-- -- -- -- -- यदि आरसीसी चैनल कहीं से टूट गया है तो उसे दुरुस्त करवाने का कार्य किया जाएगा। ताकि जलघर तक पानी पूरी मात्रा में पहुंच सके। उसके बाद आरसीसी पाइप को बदलने का कार्य करवाया जाएगा।
- गौरव कंसल, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग
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इसे अब तक बदला नहीं किया गया। इस कारण जलघर के वाटर टैंक में पूरा पानी नहीं पहुंचता है। इस संबंध में ग्रामीण भीम सिंह, रविंद्र ने बताया कि इस बारे कई बार जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, परंतु पानी की बर्बादी को रोकने के लिए विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। पानी की कमी के कारण लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि विभाग पानी को बर्बाद कर रहा है।
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पूर्व सीएम ने 18 लाख की परियोजना को दी थी मंजूरी
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समय में जलघर की मरम्मत के लिए 18 लाख रुपये मंजूर हुए थे। वह पैसा कहां पर लगाया गा है। उसका किसी को पता नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, 18 लाख रुपये का काम कागजों में ही पूरा किया जा चुका है। यदि यह बजट सही तरह से लग गया होता तो पानी बर्बाद नहीं होता।
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टैंक में नहीं हुई सफाई
ग्रामीणों के अनुसार, जलघर में पानी की आपूर्ति के लिए मात्र एक टैंक बनाया गया हैं। इससे गांव के साथ-साथ गांव की ढाणियों व गुसाईयाना की ढाणियों में पानी की सप्लाई दी जाती है। टैंक की सफाई समय पर न होने के कारण टैंक में गाद जमा हो रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, जलघर की सफाई की जिम्मेदारी सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है। ग्राम पंचायत को मनरेगा स्कीम के तहत समय अनुसार सफाई करवानी चाहिए।
- गौरव कंसल, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग