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Sirsa News: बैंक की नौकरी छोड़ लकड़ांवाली के किसान बंदीप सिंह ने जीवाणुओं से बदली मिट्टी, विविध फसलों से संवारा खेत
Mon, 28 Sep 2026 10:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 28 Sep 2026 10:37 PM IST
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किसान बंदीप सिंह।
सिरसा। प्राकृतिक खेती को सिर्फ रासायनिक खाद से दूरी तक सीमित रखने के बजाय गांव लकड़ांवाली निवासी बंदीप सिंह ने 12 एकड़ में इसे खेती के एक समग्र मॉडल के रूप में विकसित किया है। उन्होंने उपयोगी जीवाणुओं के प्रयोग से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता सुधारने के साथ खेत में फसल विविधता बढ़ाई।
निजी बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत बंदीप सिंह गिल ने जहर रहित भोजन और स्वस्थ मिट्टी के संकल्प के साथ अपनी नौकरी छोड़ दी। वर्तमान में उनके खेत में मूंग, बाजरा, सरसों, गेहूं, चना, लहसुन, आलू, प्याज, धनिया, मिर्च, सौंफ और अलसी सहित कई फसलें उगाई जा रही हैं। इसके साथ सौर ऊर्जा और तालाब के जरिये ऊर्जा व जल संरक्षण पर भी जोर दिया गया है।
प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले उन्होंने लगभग दो एकड़ में गेहूं का जैविक उत्पादन किया था। इस अनुभव ने उन्हें पूर्णकालिक रूप से खेती को अपनाने का आत्मविश्वास दिया, जिसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया।
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उपयोगी जीवाणुओं से मिट्टी में सुधार
बंदीप सिंह ने प्राकृतिक खेती की शुरुआत नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले उपयोगी जीवाणुओं के संवर्धन से की। इन जीवाणुओं को तैयार कर खेत में प्रयोग करने के बाद, मिट्टी में केंचुओं की संख्या बढ़ी और उसकी उर्वरता व जैविक गुणवत्ता में सुधार देखा गया। मिट्टी में आए इस सकारात्मक बदलाव ने प्राकृतिक खेती के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत किया।
फसल विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
इसके बाद बंदीप सिंह ने अपनी खेती में फसल विविधता बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में, उनकी 12 एकड़ भूमि पर मूंग, बाजरा, सरसों, गेहूं, चना, लहसुन, आलू, प्याज, धनिया, मिर्च, सौंफ और अलसी जैसी विभिन्न फसलें उगाई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, औषधीय पौधों का भी उत्पादन किया जा रहा है।
खेती में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए, बंदीप सिंह ने अपने खेत में सौर ऊर्जा की व्यवस्था की है और जल संरक्षण के लिए एक तालाब का भी निर्माण करवाया है। उनका मुख्य उद्देश्य रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करना और मिट्टी के स्वास्थ्य व प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना है।
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निजी बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत बंदीप सिंह गिल ने जहर रहित भोजन और स्वस्थ मिट्टी के संकल्प के साथ अपनी नौकरी छोड़ दी। वर्तमान में उनके खेत में मूंग, बाजरा, सरसों, गेहूं, चना, लहसुन, आलू, प्याज, धनिया, मिर्च, सौंफ और अलसी सहित कई फसलें उगाई जा रही हैं। इसके साथ सौर ऊर्जा और तालाब के जरिये ऊर्जा व जल संरक्षण पर भी जोर दिया गया है।
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प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले उन्होंने लगभग दो एकड़ में गेहूं का जैविक उत्पादन किया था। इस अनुभव ने उन्हें पूर्णकालिक रूप से खेती को अपनाने का आत्मविश्वास दिया, जिसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया।
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उपयोगी जीवाणुओं से मिट्टी में सुधार
बंदीप सिंह ने प्राकृतिक खेती की शुरुआत नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले उपयोगी जीवाणुओं के संवर्धन से की। इन जीवाणुओं को तैयार कर खेत में प्रयोग करने के बाद, मिट्टी में केंचुओं की संख्या बढ़ी और उसकी उर्वरता व जैविक गुणवत्ता में सुधार देखा गया। मिट्टी में आए इस सकारात्मक बदलाव ने प्राकृतिक खेती के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत किया।
फसल विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
इसके बाद बंदीप सिंह ने अपनी खेती में फसल विविधता बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में, उनकी 12 एकड़ भूमि पर मूंग, बाजरा, सरसों, गेहूं, चना, लहसुन, आलू, प्याज, धनिया, मिर्च, सौंफ और अलसी जैसी विभिन्न फसलें उगाई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, औषधीय पौधों का भी उत्पादन किया जा रहा है।
खेती में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए, बंदीप सिंह ने अपने खेत में सौर ऊर्जा की व्यवस्था की है और जल संरक्षण के लिए एक तालाब का भी निर्माण करवाया है। उनका मुख्य उद्देश्य रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करना और मिट्टी के स्वास्थ्य व प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना है।