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Sirsa News: सीडीएलयू ने बढ़ाया बजट, सरकार से 190 करोड़ रुपये मांगे, शोध और शिक्षण गुणवत्ता पर फोकस
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) ने वर्ष 2026-27 के लिए सरकार से 190 करोड़ रुपये की ग्रांट की मांग की है। पिछली बार लगभग 90 करोड़ रुपये की डिमांड की गई थी। वर्ष 2025 में ग्रांट की कमी के कारण विश्वविद्यालय प्रबंधन को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इस बार प्राप्त ग्रांट का प्रयोग नए भवन निर्माण के बजाय शोध कार्यों, शिक्षण गुणवत्ता और मौजूदा सुविधाओं के विकास पर किया जाएगा।
वर्तमान में विश्वविद्यालय को 28 करोड़ रुपये मिलने हैं, जिसमें विशेष ग्रांट और वर्ष की फाइल ग्रांट की आखिरी किश्त शामिल है। कुलपति प्रो. विजय कुमार ने बताया कि प्रबंधन को इस राशि का उपयोग सोच-समझकर करना होगा, क्योंकि लगभग 15 करोड़ रुपये शिक्षकों की फीस और 7 करोड़ रुपये परीक्षाओं और पेपर जांच के बकाया भुगतान में खर्च होने हैं।
विभागों ने पुराने बजट के आधार पर बनाई डिमांड
वर्ष 2025 में कई विभागों को मांग के अनुरूप ग्रांट नहीं मिल पाई थी। इस बार विभागों के विभागाध्यक्षों ने पुराने बजट के आधार पर नई डिमांड तैयार की है। उनका मानना है कि यदि इस बार भी पुराने बजट के अनुरूप पैसा मिला, तो विभागों का संचालन सुचारू रूप से हो सकेगा।
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ग्रांट का उपयोग और प्राथमिकताएं
शोध कार्यों और बेहतर शिक्षण व्यवस्था में निवेश।
मौजूदा भवनों में सुविधाओं का विकास, नए भवनों का निर्माण नहीं।
ई-गवर्नेंस, सीसीटीवी और अन्य सुविधाओं का विस्तार।
सुपर-100 में विद्यार्थियों का चयन और उन्हें बेहतर सुविधाएं प्रदान करना।
हॉस्टल सुविधाओं में सुधार और लाइब्रेरी को अपग्रेड करना।
विभागों में सुविधाओं को बढ़ाना।
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वर्ष 2025 की ग्रांट मिल चुकी है और कुछ अतिरिक्त ग्रांट जल्द ही प्राप्त होगी। वर्ष 2026-27 के लिए 190 करोड़ रुपये की ग्रांट सरकार से मांगी गई है। इसका उपयोग शोध, बेहतर शिक्षण व्यवस्था, सीसीटीवी और अन्य सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। विश्वविद्यालय के ग्रेड को बढ़ाने के लिए हर सुविधा का विकास हमारा लक्ष्य है। - प्रो. विजय कुमार, कुलपति, सीडीएलयू।
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वर्तमान में विश्वविद्यालय को 28 करोड़ रुपये मिलने हैं, जिसमें विशेष ग्रांट और वर्ष की फाइल ग्रांट की आखिरी किश्त शामिल है। कुलपति प्रो. विजय कुमार ने बताया कि प्रबंधन को इस राशि का उपयोग सोच-समझकर करना होगा, क्योंकि लगभग 15 करोड़ रुपये शिक्षकों की फीस और 7 करोड़ रुपये परीक्षाओं और पेपर जांच के बकाया भुगतान में खर्च होने हैं।
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विभागों ने पुराने बजट के आधार पर बनाई डिमांड
वर्ष 2025 में कई विभागों को मांग के अनुरूप ग्रांट नहीं मिल पाई थी। इस बार विभागों के विभागाध्यक्षों ने पुराने बजट के आधार पर नई डिमांड तैयार की है। उनका मानना है कि यदि इस बार भी पुराने बजट के अनुरूप पैसा मिला, तो विभागों का संचालन सुचारू रूप से हो सकेगा।
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ग्रांट का उपयोग और प्राथमिकताएं
शोध कार्यों और बेहतर शिक्षण व्यवस्था में निवेश।
मौजूदा भवनों में सुविधाओं का विकास, नए भवनों का निर्माण नहीं।
ई-गवर्नेंस, सीसीटीवी और अन्य सुविधाओं का विस्तार।
सुपर-100 में विद्यार्थियों का चयन और उन्हें बेहतर सुविधाएं प्रदान करना।
हॉस्टल सुविधाओं में सुधार और लाइब्रेरी को अपग्रेड करना।
विभागों में सुविधाओं को बढ़ाना।
वर्ष 2025 की ग्रांट मिल चुकी है और कुछ अतिरिक्त ग्रांट जल्द ही प्राप्त होगी। वर्ष 2026-27 के लिए 190 करोड़ रुपये की ग्रांट सरकार से मांगी गई है। इसका उपयोग शोध, बेहतर शिक्षण व्यवस्था, सीसीटीवी और अन्य सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। विश्वविद्यालय के ग्रेड को बढ़ाने के लिए हर सुविधा का विकास हमारा लक्ष्य है। - प्रो. विजय कुमार, कुलपति, सीडीएलयू।