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Sirsa News: करों की उलझन में फंसा व्यापार, समाधान की राह तलाश रहे व्यापारी, जीएसटी सुधार और व्यापारियों के हितों के लिए हरियाणा उद्योग व्यापार हित मंडल की बैठक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 17 Nov 2025 11:34 PM IST
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Businesses caught in tax confusion, traders seeking solutions; meeting of Haryana Industry and Trade Interest Board for GST reforms and traders' welfare
सिरसा में हरियाणा उद्योग व्यापार हित मंडल के सदस्य बैठक करते हुए। मंडल
सिरसा। जीएसटी प्रणाली में सुधार और व्यापारियों की समस्याओं पर चर्चा के लिए हरियाणा उद्योग व्यापार हित मंडल की महत्वपूर्ण बैठक सिरसा क्लब में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अनिल भाटिया ने की। भाटिया ने बताया कि कर की उलझन में व्यापार और व्यापारी फंस चुके हैं। इसलिए समाधान की राह के लिए एकजुटता जरूरी है।
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भाटिया ने कहा कि जिस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने आई थी और अंततः भारत पर शासन करने लगी थी, उसी तरह विदेशी ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनियां भी देश में अपना वर्चस्व बढ़ा रही हैं। इससे भारतीय व्यापारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और युवा वर्ग कम वेतन पर रोजगार करने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बावजूद वैट का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सरकार द्वारा कुछ जीएसटी दरें कम किए जाने के लिए व्यापारी वर्ग सरकार का धन्यवाद करता है, लेकिन जीएसटी अनुपालन की जटिलताओं में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। इस दौरान व्यापारियों पर बढ़ते कर भार और जीएसटी अनुपालन की जटिलताओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। संगठन की ओर से नेशनल ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड (भारत सरकार) के अध्यक्ष सुनील सिंघी को मांग पत्र भी सौंपा गया।
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भाटिया ने बताया कि ईमानदार व्यापारियों को अकाउंटेंट और कंसल्टेंट को भारी शुल्क देना पड़ता है, साथ ही उन्हें ग्रॉस प्रॉफिट पर जीएसटी और नेट प्रॉफिट पर आयकर देना पड़ता है, जो दोहरी कराधान की स्थिति उत्पन्न करता है और व्यापारी वर्ग के साथ अन्याय है। संगठन ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि जीएसटी को उत्पादन स्तर पर ही एक बार लगाया जाए और वैल्यू एडिशन टैक्स समाप्त किया जाए। इससे टैक्स चोरी पर रोक लगेगी, व्यापारियों को राहत मिलेगी और प्रशासनिक बोझ कम होगा। उन्होंने जोर दिया कि उत्पादन स्तर पर ध्यान केंद्रित करने से कर व्यवस्था अधिक सरल और पारदर्शी बन सकती है।
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वक्ताओं ने विदेशी ऑनलाइन कंपनियों द्वारा भारतीय खुदरा व्यापार को कमजोर करने पर चिंता जताई और सरकार से आग्रह किया कि ‘मेक इन इंडिया’ को ‘मार्केट बाय इंडियन’ के रूप में लागू किया जाए, जिससे देश का व्यापार, दुकानदार और अर्थव्यवस्था सुरक्षित रह सके। बैठक में ललित मोहन सैनी, जोगेंद्र सैनी, अनिल बजाज, मोहनलाल, संजय चुघ, गुलशन उप्पल, आरके गौर, राजेंद्र गोयनका, राजेश्वर, कृष्ण मौजूद रहे।
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