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Sirsa News: कचरे की नहीं बनाई खाद तो अटकेगा भुगतान
Sun, 31 May 2026 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 31 May 2026 11:43 PM IST
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सिरसा ट्राली में लेकर जाते हुए पेड़ो और पार्क का कचरा
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- सीएसआई ब्रांच ने इंजीनियरिंग ब्रांच को भेजा पत्र, बोले-संस्थाओं को जारी करें नोटिस
- पार्क गोद लेने वालों पर नगर परिषद की सख्ती, संस्था को गोद देने के नियमों में शामिल है खाद बनाना
- बड़े स्तर पर पार्कों से नगर परिषद के सफाई कर्मचारी व एजेंसी के कर्मचारी उठाते हैं वेस्ट
- संस्थाएं को लाखों रुपये हर महीने हो रहा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर के पार्कों के रख-रखाव का जिम्मा संभाल रहीं संस्थाओं को अब हरित कचरे के निस्तारण के प्रति गंभीर होना पड़ेगा। नगर परिषद ने संकेत दिए हैं कि पार्कों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट से खाद बनाने की व्यवस्था नहीं करने वाली संस्थाओं के भुगतान पर रोक लगाई जा सकती है। इस संबंध में सीएसआई शाखा ने इंजीनियरिंग शाखा को पत्र भेजकर नियमों की अवहेलना करने वाली संस्थाओं को नोटिस जारी करने की मांग की है।
अधिकारियों के अनुसार, पार्क गोद देने की शर्तों में उल्लेख है कि संबंधित संस्था को पार्क परिसर में उत्पन्न होने वाले पत्तों, घास और अन्य जैविक अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना होगा। इसके लिए कंपोस्ट पिट बनाने के साथ साथ छोटे पार्कों में एक कोने में गड्ढा खोदकर या ट्री गार्ड प्रणाली के तहत खाद बनाना अनिवार्य है।
इस दिशा में अब तक संस्थाओं ने कोई कदम नहीं उठाया है। बड़े स्तर पर पार्कों के वेस्ट को डंपिंग साइटों पर डाला जाता है या पार्क के बाहर डालकर आग लगा दी जाती है। इस प्रकार के कई मामले अब नगर परिषद अधिकारियों के सामने आए हैं। इसके बाद यह सख्ती की जा रही है।
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पार्कों में कर्मचारी कर रहे सफाई, उठा रहे कचरा
निरीक्षण के दौरान सामने आया है कि पार्कों में संस्थाएं घास या पेड़ों के पत्तों को एक जगह पर इकट्ठा कर देती हैं। उसके बाद बड़े स्तर पर शिकायत नंबर व अधिकारियों को फोटो व मैसेज कर सफाई की मांग करती है। यह सरासर गलत है। ऐसे में एजेंसी व नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों को मजबूरन इस कचरे को उठाना पड़ता है। पिछले दो साल से यही प्रक्रिया चल आ रही है लेकिन कोई कार्रवाई इस संबंध में नहीं हुई है।
इसलिए जरूरी है कंपोस्ट पिट
- पार्क के पत्तों और घास की समस्या का हल होता है।
- इससे बनने वाली खाद का प्रयोग पार्क के अंदर किया जाता है। संस्था का खर्च घटता है।
- आसपास के लोग भी फलों व सब्जियों के छिलके इन पिट में डाल सकते हैं ताकि कंपोस्ट बेहतर बने।
- इसके कारण लगने वाली आग की घटनाएं भी कम होंगी।
सरकारी संस्थाओं को भी होंगे नोटिस जारी
शहर की कई सरकारी संस्थाओं की ओर से ग्रीन वेस्ट से खाद बनाने की दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है। इनमें शहीद भगत सिंह स्टेडियम, कॉलेज, विश्वविद्यालय, लघु सचिवालय परिसर व आवासीय कॉलोनी के पार्क, पुलिस लाइन व अन्य सरकारी भवनों में कंपोस्ट की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। इन सभी में अब कंपोस्ट पिट बनवाकर खाद बनवाई जाएगी।
रिपोर्ट के आधार पर संस्थाओं को जारी होंगे
जिन संस्थाओं को पार्क गोद दिए हैं। उनको निरीक्षण करने वाले जेई से रिकॉर्ड मांगा जाएगा कि उनके किस पार्क में कंपोस्ट पिट या अन्य व्यवस्था है। किनमें नहीं है जिनमें नहीं है उन सभी संस्थाओं को नोटिस जारी किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य में भुगतान को वेस्ट प्रबंधन और खाद निर्माण जैसी अनिवार्य शर्तों से जोड़ा जाएगा ताकि पार्कों की देखरेख के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का भी प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित किया जा सके।
कोट्स
कई पार्कों में कंपोस्ट पिट तक नहीं बनाए गए हैं। वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में पार्कों से निकलने वाले जैविक अवशेष सीधे उठाकर डंपिंग स्थलों तक पहुंचाए जा रहे हैं जबकि इन्हें खाद में परिवर्तित कर दोबारा हरित क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। ऐसा नहीं करने वाली संस्थाओं की राशि जारी करने पर रोक लगाई जाएगी।
-जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद
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- पार्क गोद लेने वालों पर नगर परिषद की सख्ती, संस्था को गोद देने के नियमों में शामिल है खाद बनाना
- बड़े स्तर पर पार्कों से नगर परिषद के सफाई कर्मचारी व एजेंसी के कर्मचारी उठाते हैं वेस्ट
- संस्थाएं को लाखों रुपये हर महीने हो रहा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर के पार्कों के रख-रखाव का जिम्मा संभाल रहीं संस्थाओं को अब हरित कचरे के निस्तारण के प्रति गंभीर होना पड़ेगा। नगर परिषद ने संकेत दिए हैं कि पार्कों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट से खाद बनाने की व्यवस्था नहीं करने वाली संस्थाओं के भुगतान पर रोक लगाई जा सकती है। इस संबंध में सीएसआई शाखा ने इंजीनियरिंग शाखा को पत्र भेजकर नियमों की अवहेलना करने वाली संस्थाओं को नोटिस जारी करने की मांग की है।
अधिकारियों के अनुसार, पार्क गोद देने की शर्तों में उल्लेख है कि संबंधित संस्था को पार्क परिसर में उत्पन्न होने वाले पत्तों, घास और अन्य जैविक अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना होगा। इसके लिए कंपोस्ट पिट बनाने के साथ साथ छोटे पार्कों में एक कोने में गड्ढा खोदकर या ट्री गार्ड प्रणाली के तहत खाद बनाना अनिवार्य है।
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इस दिशा में अब तक संस्थाओं ने कोई कदम नहीं उठाया है। बड़े स्तर पर पार्कों के वेस्ट को डंपिंग साइटों पर डाला जाता है या पार्क के बाहर डालकर आग लगा दी जाती है। इस प्रकार के कई मामले अब नगर परिषद अधिकारियों के सामने आए हैं। इसके बाद यह सख्ती की जा रही है।
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पार्कों में कर्मचारी कर रहे सफाई, उठा रहे कचरा
निरीक्षण के दौरान सामने आया है कि पार्कों में संस्थाएं घास या पेड़ों के पत्तों को एक जगह पर इकट्ठा कर देती हैं। उसके बाद बड़े स्तर पर शिकायत नंबर व अधिकारियों को फोटो व मैसेज कर सफाई की मांग करती है। यह सरासर गलत है। ऐसे में एजेंसी व नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों को मजबूरन इस कचरे को उठाना पड़ता है। पिछले दो साल से यही प्रक्रिया चल आ रही है लेकिन कोई कार्रवाई इस संबंध में नहीं हुई है।
इसलिए जरूरी है कंपोस्ट पिट
- पार्क के पत्तों और घास की समस्या का हल होता है।
- इससे बनने वाली खाद का प्रयोग पार्क के अंदर किया जाता है। संस्था का खर्च घटता है।
- आसपास के लोग भी फलों व सब्जियों के छिलके इन पिट में डाल सकते हैं ताकि कंपोस्ट बेहतर बने।
- इसके कारण लगने वाली आग की घटनाएं भी कम होंगी।
सरकारी संस्थाओं को भी होंगे नोटिस जारी
शहर की कई सरकारी संस्थाओं की ओर से ग्रीन वेस्ट से खाद बनाने की दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है। इनमें शहीद भगत सिंह स्टेडियम, कॉलेज, विश्वविद्यालय, लघु सचिवालय परिसर व आवासीय कॉलोनी के पार्क, पुलिस लाइन व अन्य सरकारी भवनों में कंपोस्ट की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। इन सभी में अब कंपोस्ट पिट बनवाकर खाद बनवाई जाएगी।
रिपोर्ट के आधार पर संस्थाओं को जारी होंगे
जिन संस्थाओं को पार्क गोद दिए हैं। उनको निरीक्षण करने वाले जेई से रिकॉर्ड मांगा जाएगा कि उनके किस पार्क में कंपोस्ट पिट या अन्य व्यवस्था है। किनमें नहीं है जिनमें नहीं है उन सभी संस्थाओं को नोटिस जारी किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य में भुगतान को वेस्ट प्रबंधन और खाद निर्माण जैसी अनिवार्य शर्तों से जोड़ा जाएगा ताकि पार्कों की देखरेख के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का भी प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित किया जा सके।
कोट्स
कई पार्कों में कंपोस्ट पिट तक नहीं बनाए गए हैं। वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में पार्कों से निकलने वाले जैविक अवशेष सीधे उठाकर डंपिंग स्थलों तक पहुंचाए जा रहे हैं जबकि इन्हें खाद में परिवर्तित कर दोबारा हरित क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। ऐसा नहीं करने वाली संस्थाओं की राशि जारी करने पर रोक लगाई जाएगी।
-जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद