{"_id":"6a9dc0496802ca76990a0e1b","slug":"sweepers-strike-sirsa-news-c-128-1-svns1027-164508-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: नोटिस के बाद भी काम पर नहीं लौटे कर्मचारी, कॉलोनियों में लगे कूड़े के अंबार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: नोटिस के बाद भी काम पर नहीं लौटे कर्मचारी, कॉलोनियों में लगे कूड़े के अंबार
Mon, 07 Sep 2026 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 07 Sep 2026 01:04 AM IST
विज्ञापन
नगर परिषद के हड़ताली कर्मचारी झाडू के साथ विरोध जताते हुए सरकारी आदेशों की प्रतियां जलाते हुए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की आज होगी अहम बैठक, प्रशासन सोमवार को युद्ध स्तर पर चलाएगा अभियान
हड़ताली कर्मचारी आर-पार की लड़ाई को तैयार, वकील तक किए हायर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर की कॉलोनियों में कचरे का अंबार लगा है। अभी चुप्पी साधे हुए शहरवासी भी पार्षदों से कचरे को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर बनाए ग्रुपों में इन दिनों हड़ताल और कचरे की उठाने पर चर्चा है। वहीं, सरकार के सख्त आदेशों व नोटिस देने के बाद भी हड़ताली सफाई कर्मचारी झुकना नहीं चाहते हैं।
धरना स्थल से सफाई कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने घोषणा कर दी है कि वे सरकार के सामने नहीं झुकेंगे। उनकी अपनी मांगों के लिए लड़ाई जारी रहेगी। सरकार उन्हें दबाना चाहती है और वे नहीं दबेंगे। यदि उन्हें जेल जाना पड़ता तो वे जेल जाने को तैयार हैं।
रविवार को कर्मचारियों ने सरकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर रोष जताया। इसके बाद बाजारों में रोष मार्च निकालकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन की ओर से एजेंसियों को आदेश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था करें ताकि कॉलोनियों व बाजारों में सफाई करवाई जा सके। हालांकि, डोर-टू-डोर को लेकर डंपिंग पॉइंटों से कुछ जगहों पर कचरा जरूर उठाया जाता रहा है।
विज्ञापन
पूरी तरह से कचरा अभी तक डंपिंग पॉइंटों से नहीं उठा रहा है। इस कारण आलम यह है कि कॉलोनियों की गलियों में जगह-जगह पर कूड़ा पड़ा हुआ है। मिनी बाईपास पूरी तरह से कचरे से अटा है। ग्रीन बेल्टों व पार्कों के आसपास कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इसके बाद भी प्रशासन दावे करता है कि कचरे की उठान डंपिंग पॉइंटों से की जा रही है।
6 महीने तक दिया जाएगा एजेंसी का टेंडर
नगर परिषद प्रशासन ने रोड स्वीपिंग करने के लिए एजेंसी को छह माह का टेंडर दिया जाएगा। कारण यह कि मौजूदा एजेंसी का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने जा रहा है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने टेंडर पांच साल के लिए देने को लेकर निर्देश जारी किए थे। उसकी अनुमति भी मुख्यालय स्तर पर पेंडिंग हैं। वहीं, हड़ताल को देखते हुए भी छह माह के लिए टेंडर दिया जा रहा है।
एसोसिएशन के प्रधान बोले
एसोसिएशन के प्रधान मनोज अठवाल ने कहा कि प्रशासन छह माह के लिए एजेंसी को टेंडर दे रही है। टेंडर के माध्यम से भी चार जोन में शहर को बांटा गया है। 232 के आसपास कर्मचारी एजेंसी लगाती है। एजेंसी कर्मचारियों को डीसी रेट नहीं मिलता है। प्रशासनिक अधिकारी यदि कर्मचारियों को डीसी रेट पर भी पैसा देता दिया जाए तो दो करोड़ 40 लाख रुपये ही खर्च होंगे। सरकार क्या कर्मचारियों को डीसी रेट तक उपलब्ध नहीं करवा सकती है।
डोर-टू-डोर कचरा उठान बंद होने से लोग परेशान
हड़ताल का असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियां बंद होने के कारण कई कॉलोनियों में घरों से कचरा नहीं उठ पा रहा है। मजबूरी में लोगों को कचरा सड़क किनारे या निर्धारित कचरा पॉइंटों पर डालना पड़ रहा है। नियमित कचरा उठान नहीं होने के कारण कई स्थानों पर कचरे के ढेर लग गए हैं। बाजारों में भी दुकानों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचरा जमा हो रहा है। आलम यह है कि अब लोगों के लिए घरों में जमा होने वाले कूड़े को फेंकने के लिए दिक्कत आ रही है। आसपास के खाली प्लॉट भर चुके हैं। कचरा डालने पर विवाद होने लगा है। वहीं ग्रीन बेल्ट व मुख्य सड़कों के साथ कूड़ा डालने से बदबूदार माहौल बन रहा है। इससे आमजन को ज्यादा परेशानी होती है।
विज्ञापन
हड़ताली कर्मचारी आर-पार की लड़ाई को तैयार, वकील तक किए हायर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर की कॉलोनियों में कचरे का अंबार लगा है। अभी चुप्पी साधे हुए शहरवासी भी पार्षदों से कचरे को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर बनाए ग्रुपों में इन दिनों हड़ताल और कचरे की उठाने पर चर्चा है। वहीं, सरकार के सख्त आदेशों व नोटिस देने के बाद भी हड़ताली सफाई कर्मचारी झुकना नहीं चाहते हैं।
धरना स्थल से सफाई कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने घोषणा कर दी है कि वे सरकार के सामने नहीं झुकेंगे। उनकी अपनी मांगों के लिए लड़ाई जारी रहेगी। सरकार उन्हें दबाना चाहती है और वे नहीं दबेंगे। यदि उन्हें जेल जाना पड़ता तो वे जेल जाने को तैयार हैं।
विज्ञापन
रविवार को कर्मचारियों ने सरकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर रोष जताया। इसके बाद बाजारों में रोष मार्च निकालकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन की ओर से एजेंसियों को आदेश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था करें ताकि कॉलोनियों व बाजारों में सफाई करवाई जा सके। हालांकि, डोर-टू-डोर को लेकर डंपिंग पॉइंटों से कुछ जगहों पर कचरा जरूर उठाया जाता रहा है।
विज्ञापन
पूरी तरह से कचरा अभी तक डंपिंग पॉइंटों से नहीं उठा रहा है। इस कारण आलम यह है कि कॉलोनियों की गलियों में जगह-जगह पर कूड़ा पड़ा हुआ है। मिनी बाईपास पूरी तरह से कचरे से अटा है। ग्रीन बेल्टों व पार्कों के आसपास कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इसके बाद भी प्रशासन दावे करता है कि कचरे की उठान डंपिंग पॉइंटों से की जा रही है।
6 महीने तक दिया जाएगा एजेंसी का टेंडर
नगर परिषद प्रशासन ने रोड स्वीपिंग करने के लिए एजेंसी को छह माह का टेंडर दिया जाएगा। कारण यह कि मौजूदा एजेंसी का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने जा रहा है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने टेंडर पांच साल के लिए देने को लेकर निर्देश जारी किए थे। उसकी अनुमति भी मुख्यालय स्तर पर पेंडिंग हैं। वहीं, हड़ताल को देखते हुए भी छह माह के लिए टेंडर दिया जा रहा है।
एसोसिएशन के प्रधान बोले
एसोसिएशन के प्रधान मनोज अठवाल ने कहा कि प्रशासन छह माह के लिए एजेंसी को टेंडर दे रही है। टेंडर के माध्यम से भी चार जोन में शहर को बांटा गया है। 232 के आसपास कर्मचारी एजेंसी लगाती है। एजेंसी कर्मचारियों को डीसी रेट नहीं मिलता है। प्रशासनिक अधिकारी यदि कर्मचारियों को डीसी रेट पर भी पैसा देता दिया जाए तो दो करोड़ 40 लाख रुपये ही खर्च होंगे। सरकार क्या कर्मचारियों को डीसी रेट तक उपलब्ध नहीं करवा सकती है।
डोर-टू-डोर कचरा उठान बंद होने से लोग परेशान
हड़ताल का असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियां बंद होने के कारण कई कॉलोनियों में घरों से कचरा नहीं उठ पा रहा है। मजबूरी में लोगों को कचरा सड़क किनारे या निर्धारित कचरा पॉइंटों पर डालना पड़ रहा है। नियमित कचरा उठान नहीं होने के कारण कई स्थानों पर कचरे के ढेर लग गए हैं। बाजारों में भी दुकानों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचरा जमा हो रहा है। आलम यह है कि अब लोगों के लिए घरों में जमा होने वाले कूड़े को फेंकने के लिए दिक्कत आ रही है। आसपास के खाली प्लॉट भर चुके हैं। कचरा डालने पर विवाद होने लगा है। वहीं ग्रीन बेल्ट व मुख्य सड़कों के साथ कूड़ा डालने से बदबूदार माहौल बन रहा है। इससे आमजन को ज्यादा परेशानी होती है।