{"_id":"59f4db9d4f1c1b78548b99f2","slug":"91509219229-sirsa-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंखों में आंसू लेकर थेहड़ से अपना आशियाना खाली करके चले गए 44 परिवार,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंखों में आंसू लेकर थेहड़ से अपना आशियाना खाली करके चले गए 44 परिवार,
Updated Sun, 29 Oct 2017 01:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिरसा।
पांच दशक से थेहड़ पर वास करने वाले हजारों परिवारों में से 44 को आखिरकार शनिवार शाम तक अपना आशियाना छोड़कर जाना पड़ा। प्रशासन की ओर से किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच 44 परिवार मकान खाली करके अपना सारा सामान लेकर नये अस्थाई ठिकाने सेक्टर 19 स्थित हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में पहुंच चुके हैं।
शुक्रवार शाम से ही थेहड़ मोहल्ले को छावनी में तब्दील करने के बाद शनिवार सुबह पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार, उपमंडलाधीश राहुल हुड्डा, पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी पुलिस फोर्स और ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर थेहड़ पहुंचे। सरकार के वादे पर भरोसा करते हुए 44 परिवारों ने अपने-अपने मकानों से सामान बाहर निकालकर ट्रैक्टर ट्रालियों में लादना शुरू कर दिया। सुबह 11 बजे से पीड़ित परिवार ने थेहड़ से करीब पांच किलो मीटर दूर स्थित हाउसिंग बोर्ड की ओर पलायन करने लगे। सर्वप्रथम पलायन करने वालों में थेहड़वासी गुरचरण सिंह का परिवार रहा। दोपहर करीब दो बजे तक 18 परिवार सामान लेकर हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में पहुंच चुके थे। प्रशासन की ओर से यहां ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए नायब तहसीलदार महेंद्र कुमार और तहसीलदार अजय कुमार ने परिवारों को उनके फ्लैट अलाट किए।
थेहड़ वासियों ने अपने अस्थाई ठिकानों की साफ-सफाई करके उनमें अपना सामान रखा। प्रशासन की ओर से 44 परिवारों को ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट रहने को दिए हैं। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक इन परिवारों को सरकार की ओर से जमीन अलाट नहीं कर दी जाती। शाम को जब सभी परिवार थेहड़ खाली करके चले गए तो प्रशासन ने राहत की सांस ली। प्रशासन ने थेहड़ खाली करवाने की पूरी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करनी है। जो समयसीमा हाईकोर्ट की ओर से प्रशासन को दी गई थी उसी अवधि मेें प्रशासन ने शांति पूर्वक थेहड़ खाली करवाने का पहला और सबसे चुनौती पूर्ण चरण सफलता पूर्वक पास कर लिया।
विज्ञापन
आंख हैं भरी-भरी ओर तुम मुस्कुराने की बात करते हो
पिछले पचास सालों से थेहड़ पर रह रहे परिवार वालों को जब अपना आशियाना खाली करना पड़ा तो उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिवारों के मुखियाओं ने तो अपने दिल पर पत्थर रख लिया था, लेकिन महिलाएं अपने पर काबू रखती भी तो कैसे? जिस मकान में वो दुल्हन बनकर आई और जीवन के अनमोल पल इसी छत के नीचे बिताए। मां बनी तो अपने बच्चों की किलकारियों से घर का आंगन खुशियों से भरकर स्वर्ग की भांति हो गया। उसी घर को छोड़कर जाते वक्त महिलाओं की आंखें भर आईं। ड्यूटी पर तैनात प्रशासनिक अधिकारी उन्हें यह कहकर शांत करने की कोशिश करते रहे कि रोने की क्या बात है, तुमको बदले में नया घर मिल रहा है इसलिए चेहरे पर मुस्कान लाओ और खुशी-खुशी नये घर जाओ। नम आंखों से महिलाओं ने जवाब दिया कि घर के पालतू जानवर को भी अगर कुछ हो जाता है तो दिल दहल जाता है, हमारा घर हमारे सुख-दुख के पलों का सालों से साथी रहा है। आज इस आशियाने को छोड़कर जाना पड़ रहा है तो आंखें भर आएंगी ही और तुम मुस्कुराने की बात कर रहे हो।
750 मकान करवाए जाने हैं खाली
पुरातत्व विभाग की ओर से प्राचीन थेहड़ को खाली करवाने की शुरुआत तो हो गई है, लेकिन ये सिलसिला अब थमने वाला नहीं। थेहड़ पर कुल 750 मकानों को खाली करवाने का नोटिस प्रशासन की ओर से दिया गया है। थेहड़ खाली करवाने के पहले चरण में 44 मकान खाली करवाए गए हैं, इसके बाद दूसरे चरण की शुरुआत होगी। 88 एकड़ में फैले थेहड़ को पुरातत्व विभाग ने एतिहासिक धरोहर करार दिया है। थेहड़ पर बने 30-40 मकानों को पुरातत्व विभाग की ओर से अवैध बताया गया है। इन मकानों में 20 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से यहां रहने वालों को बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क तक की सुविधाएं दे रखी हैं। यहां तक की नगर परिषद की ओर से यहां रहने वालों से हाउस टैक्स भी वसूल किया जाता है। 60 वर्षों से इस जगह पर रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, वोटर कार्ड और आधार कार्ड भी बने हुए हैं। 8 जून 2016 में सिरसा के थेहड़ मोहल्ला में पुरातात्विक विभाग की उच्च स्तरीय टीम ने दौरा किया था, जिसमें पुरातात्विक विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बिनानी भट्टाचार्य के नेतृत्व में आई टीम ने विभाग के अधिकारी डॉ. विनोद राणावत और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. सुखदेव सैनी शामिल थे। टीम ने थेहड़ के विभिन्न भागों का अवलोकन किया था। थेहड़ इलाके में खाली पड़े स्थान की भी निशानदेही की थी। अब चिह्नित किए गए थेहड़ के हिस्सों की पुरातात्विक महत्व के लिहाज से खुदाई की जाएगी।
ताले तोड़कर खुलवाए फ्लैट
थेहड़ से अपने मकान खाली करके जब 44 परिवार सामान लेकर हाउसिंग बोर्ड पहुंचे तो फ्लैटों में ताले लटके हुए मिले। हाऊसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को फ्लैट की चाभियां देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि उनके पास विभाग की ओर से चाबियां देने के कोई आदेश नहीं आए हैं। यह सुनकर अधिकारियों की सांसें गले में अटक गईं। इसके बाद अधिकारियों ने उपायुक्त प्रभजोत सिंह से बातचीत की तो उन्हें ताले तोड़ने के निर्देश मिल गए। इसके बाद 44 फ्लैटों के ताले तोड़े गए। फ्लैटों का गेट खुलने के बाद थेहड़वासियों ने अपना सामान अंदर रखा। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने अपने सीनियर अधिकारियों को घटना से अवगत करवा दिया है। उनका कहना है कि बिना अनुमति के ताले तोड़ना गैर कानूनी है।
रात तक फ्लैटों की बिजली रही गुल
सुबह बिजली निगम की टीम फ्लैटों में बिजली सप्लाई शुरू करने के लिए पहुंची तो बिजली उपकरण गायब मिले। ट्रांसफार्मर चालू करने के लिए जिन उपकरणों का लगा होना जरूरी है वह भी गायब थे। ऐसे में फ्लैटों में बिजली सप्लाई देने के लिए बिजली निगम की टीम दोपहर से लेकर रात तक जुटी रही। निगम के एसई पीके चौहान ने बताया कि फ्लैटों में बिजली सप्लाई जारी करने के लिए निगम अधिकारी व कर्मचारी जी जान से लगे हुए हैं। रात तक सप्लाई हर हाल में शुरू कर दी जाएगी। वहीं, हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि बिजली उपकरण चोरी होने के संबंध में पुलिस विभाग को शिकायत दी जाएगी।
ये थेहड़वासी हुए फ्लैटों में शिफ्ट
थेहड़ खाली करवाने के पहले चरण में 44 परिवारों को हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में शिफ्ट किया गया है। जिन लोगों को फ्लैट मिले हैं उनमें दलबीर कौर, जगसीर सिंह, बलवान, अतर सिंह, राजेश, राजकुमार, बलवान पुत्र जयवीर, महेंद्र, राज, प्रकाश, सरदूल सिंह, रामा देवी, बुधराम, दर्शन, बीबो, फकीरचंद, नीतू, पवन शर्मा, जीत सिंह, टीटूसिंह, गुरचरण सिंह, संदीप, बिंद्र, जगसीर, शमशेर, काला सिंह, पवन, हरबंस, किशन, बंसीराम, मुन्नाराम, कालू, जोगिंद्र, दर्शन सिंह पुत्र प्रीतम सिंह, सोनू, लखविंद्र सिंह, रामकिशन, पालाराम, गंगाराम, पवन, रामकुमार, वीराराम, सोनू पुत्र जंगीर सिंह, विक्रमजीत सिंह शामिल हैं। इन परिवारों को ग्राउंड फ्लोर पर फ्लैट दिए गए हैं।
स्थाई जगह उपलब्ध करवाई जाएगी
थेहड़ हमारी संस्कृत धरोहर का हिस्सा है। हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए सरकार थेहड़ पर बने मकानों को खाली करवा रही है। शुरू में 44 परिवारों को अस्थाई रूप से हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट रहने के लिए दिए गए हैं। बाद में इनकों स्थाई जगह उपलब्ध करवा दी जाएगी। शांति व्यवस्था कायम रहे इसके लिए सुरक्षा संबंधित हर प्रकार के कदम उठाए गए हैं। लोग शांति पूर्वक अपने मकान खाली करके फ्लैटों में शिफ्ट हो गए हैं।
-डॉ. प्रवीण कुमार, निदेशक पुरातत्व विभाग हरियाणा।
विज्ञापन
पांच दशक से थेहड़ पर वास करने वाले हजारों परिवारों में से 44 को आखिरकार शनिवार शाम तक अपना आशियाना छोड़कर जाना पड़ा। प्रशासन की ओर से किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच 44 परिवार मकान खाली करके अपना सारा सामान लेकर नये अस्थाई ठिकाने सेक्टर 19 स्थित हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में पहुंच चुके हैं।
शुक्रवार शाम से ही थेहड़ मोहल्ले को छावनी में तब्दील करने के बाद शनिवार सुबह पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार, उपमंडलाधीश राहुल हुड्डा, पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी पुलिस फोर्स और ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर थेहड़ पहुंचे। सरकार के वादे पर भरोसा करते हुए 44 परिवारों ने अपने-अपने मकानों से सामान बाहर निकालकर ट्रैक्टर ट्रालियों में लादना शुरू कर दिया। सुबह 11 बजे से पीड़ित परिवार ने थेहड़ से करीब पांच किलो मीटर दूर स्थित हाउसिंग बोर्ड की ओर पलायन करने लगे। सर्वप्रथम पलायन करने वालों में थेहड़वासी गुरचरण सिंह का परिवार रहा। दोपहर करीब दो बजे तक 18 परिवार सामान लेकर हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में पहुंच चुके थे। प्रशासन की ओर से यहां ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए नायब तहसीलदार महेंद्र कुमार और तहसीलदार अजय कुमार ने परिवारों को उनके फ्लैट अलाट किए।
विज्ञापन
थेहड़ वासियों ने अपने अस्थाई ठिकानों की साफ-सफाई करके उनमें अपना सामान रखा। प्रशासन की ओर से 44 परिवारों को ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट रहने को दिए हैं। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक इन परिवारों को सरकार की ओर से जमीन अलाट नहीं कर दी जाती। शाम को जब सभी परिवार थेहड़ खाली करके चले गए तो प्रशासन ने राहत की सांस ली। प्रशासन ने थेहड़ खाली करवाने की पूरी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करनी है। जो समयसीमा हाईकोर्ट की ओर से प्रशासन को दी गई थी उसी अवधि मेें प्रशासन ने शांति पूर्वक थेहड़ खाली करवाने का पहला और सबसे चुनौती पूर्ण चरण सफलता पूर्वक पास कर लिया।
विज्ञापन
आंख हैं भरी-भरी ओर तुम मुस्कुराने की बात करते हो
पिछले पचास सालों से थेहड़ पर रह रहे परिवार वालों को जब अपना आशियाना खाली करना पड़ा तो उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिवारों के मुखियाओं ने तो अपने दिल पर पत्थर रख लिया था, लेकिन महिलाएं अपने पर काबू रखती भी तो कैसे? जिस मकान में वो दुल्हन बनकर आई और जीवन के अनमोल पल इसी छत के नीचे बिताए। मां बनी तो अपने बच्चों की किलकारियों से घर का आंगन खुशियों से भरकर स्वर्ग की भांति हो गया। उसी घर को छोड़कर जाते वक्त महिलाओं की आंखें भर आईं। ड्यूटी पर तैनात प्रशासनिक अधिकारी उन्हें यह कहकर शांत करने की कोशिश करते रहे कि रोने की क्या बात है, तुमको बदले में नया घर मिल रहा है इसलिए चेहरे पर मुस्कान लाओ और खुशी-खुशी नये घर जाओ। नम आंखों से महिलाओं ने जवाब दिया कि घर के पालतू जानवर को भी अगर कुछ हो जाता है तो दिल दहल जाता है, हमारा घर हमारे सुख-दुख के पलों का सालों से साथी रहा है। आज इस आशियाने को छोड़कर जाना पड़ रहा है तो आंखें भर आएंगी ही और तुम मुस्कुराने की बात कर रहे हो।
750 मकान करवाए जाने हैं खाली
पुरातत्व विभाग की ओर से प्राचीन थेहड़ को खाली करवाने की शुरुआत तो हो गई है, लेकिन ये सिलसिला अब थमने वाला नहीं। थेहड़ पर कुल 750 मकानों को खाली करवाने का नोटिस प्रशासन की ओर से दिया गया है। थेहड़ खाली करवाने के पहले चरण में 44 मकान खाली करवाए गए हैं, इसके बाद दूसरे चरण की शुरुआत होगी। 88 एकड़ में फैले थेहड़ को पुरातत्व विभाग ने एतिहासिक धरोहर करार दिया है। थेहड़ पर बने 30-40 मकानों को पुरातत्व विभाग की ओर से अवैध बताया गया है। इन मकानों में 20 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से यहां रहने वालों को बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क तक की सुविधाएं दे रखी हैं। यहां तक की नगर परिषद की ओर से यहां रहने वालों से हाउस टैक्स भी वसूल किया जाता है। 60 वर्षों से इस जगह पर रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, वोटर कार्ड और आधार कार्ड भी बने हुए हैं। 8 जून 2016 में सिरसा के थेहड़ मोहल्ला में पुरातात्विक विभाग की उच्च स्तरीय टीम ने दौरा किया था, जिसमें पुरातात्विक विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बिनानी भट्टाचार्य के नेतृत्व में आई टीम ने विभाग के अधिकारी डॉ. विनोद राणावत और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. सुखदेव सैनी शामिल थे। टीम ने थेहड़ के विभिन्न भागों का अवलोकन किया था। थेहड़ इलाके में खाली पड़े स्थान की भी निशानदेही की थी। अब चिह्नित किए गए थेहड़ के हिस्सों की पुरातात्विक महत्व के लिहाज से खुदाई की जाएगी।
ताले तोड़कर खुलवाए फ्लैट
थेहड़ से अपने मकान खाली करके जब 44 परिवार सामान लेकर हाउसिंग बोर्ड पहुंचे तो फ्लैटों में ताले लटके हुए मिले। हाऊसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को फ्लैट की चाभियां देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि उनके पास विभाग की ओर से चाबियां देने के कोई आदेश नहीं आए हैं। यह सुनकर अधिकारियों की सांसें गले में अटक गईं। इसके बाद अधिकारियों ने उपायुक्त प्रभजोत सिंह से बातचीत की तो उन्हें ताले तोड़ने के निर्देश मिल गए। इसके बाद 44 फ्लैटों के ताले तोड़े गए। फ्लैटों का गेट खुलने के बाद थेहड़वासियों ने अपना सामान अंदर रखा। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने अपने सीनियर अधिकारियों को घटना से अवगत करवा दिया है। उनका कहना है कि बिना अनुमति के ताले तोड़ना गैर कानूनी है।
रात तक फ्लैटों की बिजली रही गुल
सुबह बिजली निगम की टीम फ्लैटों में बिजली सप्लाई शुरू करने के लिए पहुंची तो बिजली उपकरण गायब मिले। ट्रांसफार्मर चालू करने के लिए जिन उपकरणों का लगा होना जरूरी है वह भी गायब थे। ऐसे में फ्लैटों में बिजली सप्लाई देने के लिए बिजली निगम की टीम दोपहर से लेकर रात तक जुटी रही। निगम के एसई पीके चौहान ने बताया कि फ्लैटों में बिजली सप्लाई जारी करने के लिए निगम अधिकारी व कर्मचारी जी जान से लगे हुए हैं। रात तक सप्लाई हर हाल में शुरू कर दी जाएगी। वहीं, हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि बिजली उपकरण चोरी होने के संबंध में पुलिस विभाग को शिकायत दी जाएगी।
ये थेहड़वासी हुए फ्लैटों में शिफ्ट
थेहड़ खाली करवाने के पहले चरण में 44 परिवारों को हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में शिफ्ट किया गया है। जिन लोगों को फ्लैट मिले हैं उनमें दलबीर कौर, जगसीर सिंह, बलवान, अतर सिंह, राजेश, राजकुमार, बलवान पुत्र जयवीर, महेंद्र, राज, प्रकाश, सरदूल सिंह, रामा देवी, बुधराम, दर्शन, बीबो, फकीरचंद, नीतू, पवन शर्मा, जीत सिंह, टीटूसिंह, गुरचरण सिंह, संदीप, बिंद्र, जगसीर, शमशेर, काला सिंह, पवन, हरबंस, किशन, बंसीराम, मुन्नाराम, कालू, जोगिंद्र, दर्शन सिंह पुत्र प्रीतम सिंह, सोनू, लखविंद्र सिंह, रामकिशन, पालाराम, गंगाराम, पवन, रामकुमार, वीराराम, सोनू पुत्र जंगीर सिंह, विक्रमजीत सिंह शामिल हैं। इन परिवारों को ग्राउंड फ्लोर पर फ्लैट दिए गए हैं।
स्थाई जगह उपलब्ध करवाई जाएगी
थेहड़ हमारी संस्कृत धरोहर का हिस्सा है। हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए सरकार थेहड़ पर बने मकानों को खाली करवा रही है। शुरू में 44 परिवारों को अस्थाई रूप से हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट रहने के लिए दिए गए हैं। बाद में इनकों स्थाई जगह उपलब्ध करवा दी जाएगी। शांति व्यवस्था कायम रहे इसके लिए सुरक्षा संबंधित हर प्रकार के कदम उठाए गए हैं। लोग शांति पूर्वक अपने मकान खाली करके फ्लैटों में शिफ्ट हो गए हैं।
-डॉ. प्रवीण कुमार, निदेशक पुरातत्व विभाग हरियाणा।