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जिले में ब्लैक फंगस के चार नए मरीज, दो की मौत, आंकडा पहुंचा 33 पर
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जिले में ब्लैक फंगस के मरीज का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। शनिवार को सिरसा में ब्लैक फंगस के चार नए मरीज ओर मिले। जबकि दो मरीजों की मौत हो गई जिससे कि अब जिले में ब्लैक फंगस के कुल मरीजों की संख्या 33 हो गई है जबकि सात की मौत हुई है। वहीं निजी अस्पताल में करीब तीन मरीजों की स्थिति चिंताजनक है। ब्लैक फंगस उनके दिमाग में प्रवेश कर चुका है।
ब्लॅक फंगस को लेकर जिले में प्रशासन अलर्ट है। शनिवार को ब्लैक फंगस के चार मरीज मिले। शाम को सिरसा के एक मरीज और एक फतेहाबाद के मरीज की मौत हो गई। दोनों निजी अस्पताल में दाखिल थे। अभी तक मरने वालों में सिरसा के 6 मरीज और एक फतेहाबाद का मरीज है। मरीजों की कुल संख्या 33 हो गई। इसमें सिरसा सहित दूसरे जिलों के मरीज शामिल है। सिरसा के बालाजी अस्पताल में दस, मेडिसिटी में सात, संजीवनी में एक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में चार और जयपुर के एक निजी अस्पताल में एक मरीज दाखिल है।
डीसी ने की बैठक, स्टेराइड युक्त मेडिसिन न प्रयोग करने के दिए निर्देश : डीसी ने इस संबंध में आईएमए के चिकित्सकों और सीएमओ के साथ बैठक की। डीसी ने जिले के सभी 350 आरएमपी चिकित्सकों को निर्देश जारी करवाए कि कोई भी कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के दौरान स्टेराइड युक्त मेडिसिन का प्रयोग न करें। हालांकि बैठक में चर्चा हुई कि फिलहाल जो केस आ रहे हैं, वे वो मरीज है जो कि कोरोना से ठीक हुए है। वहीं डीसी के निर्देश पर सीएमओ मनीष बांसल ने हिसार में अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की विजिट भी की। जिस दौरान मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से इस रोग के बारे में चर्चा की। साथ ही सिरसा से आने वाले मरीजों को लेकर बेड पर भी चर्चा की गई।
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ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिखाई देने पर उपचार में न करें देरी : डीसी प्रदीप कुमार ने बताया कि ब्लैक फंगस एक प्रकार का फंगल संक्रमण है जो सांस के रास्ते पहले नाक व साइनस फिर आंख, फेफड़े व मस्तिष्क को तेजी से प्रभावित कर सकता है। यह ज्यादातर कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले डायबिटीज मरीजों को अपना शिकार बनाता है, हाल ही में कोविड से उभरे लोग भी इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चेहरे पर एक तरफ सूजन, दर्द या सुन्न रहना, तालू, नाक या चेहरे पर कालापन या लाल चकत्तों के निशान होना, नाक बंद होना, सूखापन या नाक से काले से कण या द्रव्य का स्त्राव होना, आंख की पुतली का नीचे झुकना या सूजना, आंख में सूजन, दर्द व सिरदर्द रहना, कम दिखाई देना या दांतों में दर्द या इनका ढीला पडना आदि ब्लैक फंगस के लक्षण है। उन्होंने बताया कि यह रोग मुख्यत: ऐसे डायबिटिक मरीज जिनमें शुगर स्तर अनियंत्रित रहता है, साथ ही कोविड में कम हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता स्टेरॉइड के सेवन से और कम हो जाती है या जो लोग लंबे समय से ऑक्सीजन स्पोर्ट पर हैं, को होने की संभावना बनी रहती है। कैंसर ग्रस्त मरीज या जिन्हें नया अंग लगा हो, की भी इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना अधिक होती है।
ब्लैक फंगस को लेकर प्रशासन गंभीर है। आरएमपी चिकित्सकों को निर्देश जारी किए गए कि वे स्टेराइड युक्त मेडिसिन कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज में ना प्रयोग करें। -प्रदीप कुमार, डीसी, सिरसा।
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ब्लॅक फंगस को लेकर जिले में प्रशासन अलर्ट है। शनिवार को ब्लैक फंगस के चार मरीज मिले। शाम को सिरसा के एक मरीज और एक फतेहाबाद के मरीज की मौत हो गई। दोनों निजी अस्पताल में दाखिल थे। अभी तक मरने वालों में सिरसा के 6 मरीज और एक फतेहाबाद का मरीज है। मरीजों की कुल संख्या 33 हो गई। इसमें सिरसा सहित दूसरे जिलों के मरीज शामिल है। सिरसा के बालाजी अस्पताल में दस, मेडिसिटी में सात, संजीवनी में एक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में चार और जयपुर के एक निजी अस्पताल में एक मरीज दाखिल है।
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डीसी ने की बैठक, स्टेराइड युक्त मेडिसिन न प्रयोग करने के दिए निर्देश : डीसी ने इस संबंध में आईएमए के चिकित्सकों और सीएमओ के साथ बैठक की। डीसी ने जिले के सभी 350 आरएमपी चिकित्सकों को निर्देश जारी करवाए कि कोई भी कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के दौरान स्टेराइड युक्त मेडिसिन का प्रयोग न करें। हालांकि बैठक में चर्चा हुई कि फिलहाल जो केस आ रहे हैं, वे वो मरीज है जो कि कोरोना से ठीक हुए है। वहीं डीसी के निर्देश पर सीएमओ मनीष बांसल ने हिसार में अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की विजिट भी की। जिस दौरान मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से इस रोग के बारे में चर्चा की। साथ ही सिरसा से आने वाले मरीजों को लेकर बेड पर भी चर्चा की गई।
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ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिखाई देने पर उपचार में न करें देरी : डीसी प्रदीप कुमार ने बताया कि ब्लैक फंगस एक प्रकार का फंगल संक्रमण है जो सांस के रास्ते पहले नाक व साइनस फिर आंख, फेफड़े व मस्तिष्क को तेजी से प्रभावित कर सकता है। यह ज्यादातर कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले डायबिटीज मरीजों को अपना शिकार बनाता है, हाल ही में कोविड से उभरे लोग भी इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चेहरे पर एक तरफ सूजन, दर्द या सुन्न रहना, तालू, नाक या चेहरे पर कालापन या लाल चकत्तों के निशान होना, नाक बंद होना, सूखापन या नाक से काले से कण या द्रव्य का स्त्राव होना, आंख की पुतली का नीचे झुकना या सूजना, आंख में सूजन, दर्द व सिरदर्द रहना, कम दिखाई देना या दांतों में दर्द या इनका ढीला पडना आदि ब्लैक फंगस के लक्षण है। उन्होंने बताया कि यह रोग मुख्यत: ऐसे डायबिटिक मरीज जिनमें शुगर स्तर अनियंत्रित रहता है, साथ ही कोविड में कम हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता स्टेरॉइड के सेवन से और कम हो जाती है या जो लोग लंबे समय से ऑक्सीजन स्पोर्ट पर हैं, को होने की संभावना बनी रहती है। कैंसर ग्रस्त मरीज या जिन्हें नया अंग लगा हो, की भी इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना अधिक होती है।
ब्लैक फंगस को लेकर प्रशासन गंभीर है। आरएमपी चिकित्सकों को निर्देश जारी किए गए कि वे स्टेराइड युक्त मेडिसिन कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज में ना प्रयोग करें। -प्रदीप कुमार, डीसी, सिरसा।